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माइनस (-1) सिबिल स्कोर समझते हैं? कुछ लोग इसे शून्य (0) सिबिल स्कोर भी कहते हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि बैंक के पास आपकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री ही नहीं है. अगर किसी व्यक्ति का सिबिल स्कोर माइनस (-1) हो, तब भी लोन लेने में काफी दिक्कत हो सकती है क्योंकि क्रेडिट हिस्ट्री न होने के कारण बैंक आप पर भरोसा नहीं कर पाता. अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आपकी FD इस मामले में आपके लिए मददगार हो सकती है और आपके सिबिल स्कोर को तेजी से दौड़ा सकती है.
अगर आपका सिबिल स्कोर खराब है या है ही नहीं, तो कोई भी बैंक या NBFC आपको बिना किसी गारंटी के लोन या क्रेडिट कार्ड देने का जोखिम नहीं उठाना चाहता. यहीं पर FD आपकी मदद करती है. आप बैंक में एक FD खुलवाकर उसके बदले लोन या एक सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड (Secured Credit Card) ले सकते हैं. ऐसे में आपकी एफडी कोलैटरल का काम करती है.
जैसे ही आप एफडी से लोन की रकम निकालते हैं या फिर सिक्योर्ड कार्ड का इस्तेमाल करके रकम निकासी करते हैं, बैंक में आपका कर्ज शुरू हो जाता है. इसके बाद जब आप समय से किस्त देकर इस लोन का रीपेमेंट करते हैं तो इससे आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री डेवलप होने लगती है. जब आप लोन का भुगतान कर देते हैं तो आपका सिबिल स्कोर भी बढ़ जाता है.
FD पर लिए गए लोन की अवधि आपकी एफडी की अवधि पर निर्भर करती है. FD के बदले जो भी लोन आपने लिया है, उसे फिक्स्ड डिपॉजिट की मैच्योरिटी से पहले चुकाना होता है. बता दें कि FD पर लिए गए लोन पर आमतौर पर FD पर मिलने वाले ब्याज दर से 2% अधिक ब्याज लगता है. लेकिन इस लोन पर आपसे प्रोसेसिंग फीस वगैरह नहीं ली जाती.
सिबिल स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. आपका स्कोर जितना अच्छा होगा, लोन उतनी ही आसानी से मिल जाएगा और बेहतर ब्याज दरों पर मिलेगा. आमतौर पर बैंक 750 या इससे ज्यादा के स्कोर को अच्छा मानते हैं. एक बार जब आपका स्कोर तैयार हो जाए तो आप एक सामान्य अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड और लोन के लिए आसानी से अप्लाई कर सकते हैं.