आमदनी के हिसाब से आपको बैंक से कितना Home Loan मिल सकता है? यहां जानिए

अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं और जानना चाहते हैं कि आपकी सैलरी पर बैंक आपको कितना होम लोन देगा, तो ये जानकारी आपको यहां मिल सकती है. यहां जानिए लोन की एलिजिबिलिटी कैसे तय होती है, कौन-कौन से फैक्टर असर डालते हैं और कैसे बढ़ा सकते हैं अपनी लोन लिमिट.
आमदनी के हिसाब से आपको बैंक से कितना Home Loan मिल सकता है? यहां जानिए

घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन उस सपने को पूरा करने के लिए ये जानना ज़रूरी है कि आपकी आमदनी पर बैंक आपको कितना लोन देगा. होम लोन एलिजिबिलिटी (Home Loan Eligibility) समझने के लिए आपको दो बातें समझनी होंगी –

  • पहली- क्या आपकी आमदनी और क्रेडिट स्कोर लोन लेने लायक हैं?
  • दूसरी- आपकी आमदनी के हिसाब से आपको कितना लोन मिल सकता है?

दो बड़ी बातें – Net Income और Income Stability

1. Net Income यानी हाथ में आने वाली सैलरी

आपकी सैलरी स्लिप में जो ग्रॉस सैलरी लिखी होती है, वो आपकी असली इनकम नहीं होती. उसमें से PF, टैक्स और इंश्योरेंस जैसे डिडक्शन कटने के बाद जो पैसा आपके अकाउंट में आता है, वही आपकी नेट इनकम होती है. बैंक इसी नेट इनकम से तय करता है कि आप हर महीने कितनी EMI आराम से चुका सकते हैं.

अगर आपकी नेट इनकम ₹1 लाख महीना है (यानी सालाना ₹12 लाख), तो बैंक आमतौर पर ₹45 से ₹50 लाख तक का लोन मंजूर कर सकता है.

2. Income Stability यानी आमदनी की स्थिरता

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखता, बल्कि ये भी देखता है कि वो कितनी स्थिर है. अगर आप किसी नामी कंपनी में रेगुलर जॉब करते हैं, तो बैंक का भरोसा ज़्यादा होता है. वहीं, अगर आप फ्रीलांसर या कंसल्टेंट हैं, तो बैंक थोड़ा सतर्क रहता है.

कैसे तय होती है लोन एलिजिबिलिटी

SBI Reality के ब्‍लॉग के मुताबिक बैंक आम तौर पर कुछ गुणांक (multipliers) का इस्तेमाल करके लोन की रकम का अनुमान लगाते हैं:

ग्रॉस एलिजिबिलिटी मल्टीप्लायर

अक्सर ये आपकी सालाना आय का करीब 4 गुना होता है. मतलब, अगर आप हर महीने 1 लाख रुपए कमाते हैं, तो आपकी सालाना आय 12 लाख रुपए हुई. इस हिसाब से बैंक आपको ज़्यादा से ज़्यादा 50 लाख रुपए तक का लोन देने को तैयार हो सकते हैं. लेकिन ये उनकी तरफ़ से दी जा सकने वाली अधिकतम सीमा है.

नेट एलिजिबिलिटी फैक्टर

मान लीजिए कि आपके टैक्स, PF और ग्रुप इंश्योरेंस में आपकी ग्रॉस इनकम का 25% कट जाता है. ऐसे मामलों में, दूसरे सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए, मल्टीप्लायर आमतौर पर 6 गुना तक सेट किया जाता है. जैसे, अगर PF, TDS और ग्रुप इंश्योरेंस के बाद आपकी शुद्ध सैलरी 9 लाख रुपए सालाना है, तो बैंक आपको बेस्ट केस सिनेरियो में करीब 48 लाख से 54 लाख रुपए तक का लोन दे सकता है.

EMI और डिस्पोजेबल इनकम

सबसे आख़िर में, एक सामान्य नियम ये है कि आपके होम लोन की EMI आपकी 'डिस्पोजेबल इनकम' (वो आय जो आपके पास खर्चे और टैक्स के बाद बचती है) के 40% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए. ऊपर दिए गए उदाहरण में, अगर आपकी नेट मंथली डिस्पोजेबल इनकम 45,000 रुपए प्रति माह है, तो आपको लगभग उतनी ही EMI वाला लोन दिया जाएगा जो 15-20 साल के लिए 45 से 50 लाख रुपए के लोन के बराबर होगा.

लोन एलिजिबिलिटी कैसे बढ़ाएं

  • को-एप्लिकेंट जोड़ें – अगर आपके पति या पत्नी की स्थिर इनकम है और उनका CIBIL स्कोर अच्छा है, तो उन्हें को-एप्लिकेंट बनाकर आप लोन अमाउंट बढ़ा सकते हैं.
  • पुराने लोन क्लियर करें –अगर आपके ऊपर पहले से कोई पर्सनल लोन या कार लोन चल रहा है, तो उसे क्लियर करने से आपकी EMI क्षमता बढ़ेगी.
  • अच्छा CIBIL स्कोर रखें – 750+ स्कोर पर बैंक आपको बेहतर ब्याज दर और अधिक लोन लिमिट देता है.
  • असेट दिखाएं – अगर आपके पास प्रॉपर्टी, गोल्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी संपत्ति है, तो उसे गिरवी रखकर आप लोन लिमिट बढ़ा सकते हैं.

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. बैंक होम लोन तय कैसे करता है?

A. बैंक आपकी नेट इनकम, खर्च, CIBIL स्कोर और नौकरी की स्थिरता देखकर तय करता है कि आप कितनी EMI संभाल सकते हैं.

Q2. ₹50,000 सैलरी पर कितना लोन मिलेगा?

A. ₹50,000 महीना सैलरी पर लगभग ₹25 से ₹30 लाख तक का लोन मिल सकता है, अगर बाकी शर्तें सही हों.

Q3. EMI कितनी होनी चाहिए?

A. आपकी EMI आपकी नेट सैलरी के 40% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए.

Q4. को-एप्लिकेंट जोड़ने से लोन लिमिट बढ़ेगी क्या?

A. हां, अगर को-एप्लिकेंट की आमदनी स्थिर है और CIBIL स्कोर अच्छा है, तो लोन लिमिट बढ़ सकती है.

Q5. CIBIL स्कोर खराब हो तो क्या लोन मिलेगा?

A. अगर स्कोर कम है तो लोन मिलना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में पहले स्कोर सुधारना बेहतर होता है.

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