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Debit Card EMI लेने से आपका CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है (फाइल फोटो)
आप डेबिट कार्ड EMI का भुगतान कैसे करते हैं, इसी बात से आपका क्रेडिट स्कोर तय होता है.असल में क्रेडिट कार्ड का बिल टाइम पर पेमेंट करने से आपका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होता है, वहीं दूसरी तरफ पेमेंट चूकने (डिफॉल्ट करने) या एक साथ कई लोन लेने से बैंकों से दोबारा लोन मिलने की आपकी क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है.
डेबिट कार्ड EMI चुकाने का आपका तरीका आपके क्रेडिट स्कोर, फाइनेंशियल डिसिप्लिन (वित्तीय अनुशासन) और दूसरे बैंकों से लोन मिलने की योग्यता को तय करता है. तो इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि आप सही प्लानिंग करें ताकि बकाया किस्तों को समय पर चुकाया जा सके.
आजकल उन लोगों के बीच डेबिट कार्ड EMI एक बहुत ही पॉपुलर पेमेंट ऑप्शन बन गया है, जो बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से बिना एक बार में पूरा पैसा दिए सामान या सर्विसेज खरीदना चाहते हैं.
आजकल के टाइम में स्मार्टफोन से लेकर किचन के सामान, म्यूजिक सिस्टम और होम क्लीनिंग प्रोडक्ट्स तक कई ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स अब ग्राहकों को अपने डेबिट कार्ड का ही यूज करके इन खरीदारियों को आसान मासिक किस्तों (EMIs) में बदलने की सुविधा देते हैं.
इसके बावजूद, एक जरूरी सवाल जो हर किसी सामने बार-बार आता है, वो यह है कि इस सर्विस का यूज करने से किसी के क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है.तो आइए इस बात को थोड़ा गहराई से समझते हैं कि डेबिट कार्ड EMI आपके क्रेडिट स्कोर को कैसे प्रभावित कर सकती है.
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इस सवाल का सीधा सा जवाब है कि हां, पड़ता है.असल में ज्यादातर मामलों में, बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस डेबिट कार्ड EMI को एक छोटे लोन की तरह ही देखते हैं. इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भी दी जाती है. तो फिर इसका मतलब यह है कि एक उधारकर्ता (बोरोवर) के रूप में आपके पेमेंट करने के तरीके को करीब से ट्रैक किया जाता है और इसका सीधा असर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है.
तो अब आप समझ लीजिए कि अगर आप अपने डेबिट कार्ड की EMI मिस कर देते हैं या उसे चुकाने में पूरी तरह नाकाम रहते हैं, तो इस लापरवाही का आपके भविष्य में लोन लेने की क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है.
डेबिट कार्ड EMI (Equated Monthly Instalment) एक ऐसा बेनेफिट्स वाला ऑप्शन है जिसके जरिए आप कोई भी प्रोडक्ट या सर्विस तुरंत खरीद सकते हैं और उसकी रकम को पहले से तय की गई फिक्स मंथली किस्तों में धीरे-धीरे चुका सकते हैं.
इस सिस्टम में, बैंक आपके अकाउंट से एक साथ पूरा पैसा काटने की जगह आपकी तरफ से मर्चेंट (दुकानदार/वेबसाइट) को पूरा पेमेंट कर देता है और फिर हर महीने वह पैसा किस्तों के रूप में आपसे लेता रहता है.
केवल मान लेते हैं कि अगर आप ₹75,000 का एक लैपटॉप 3 या 6 महीने के EMI प्लान पर खरीदते हैं, तो आपको एक बार में ₹75,000 देने के बजाय हर महीने छोटी-छोटी किस्तें चुकानी पड़ सकती हैं.
डेबिट कार्ड EMI आपके क्रेडिट स्कोर को कैसे प्रभावित करती है
आपको बता दें कि आपका क्रेडिट स्कोर 3 अंकों का एक नंबर होता है, जो आमतौर पर 300 से 900 के बीच होता है. एक बात समझ लें कि डेबिट या क्रेडिट कार्ड EMI को अक्सर एक लोन की तरह ही रिपोर्ट किया जाता है, तो फिर इसलिए टाइम पर किस्तों का पेमेंट करने से आपका क्रेडिट स्कोर बहुत अच्छा हो सकता है, जबकि पेमेंट मिस करने से यह खराब हो सकता है.तो कोई भी नया लोन या EMI लेने से पहले इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए.
| स्थिति (Action) | क्रेडिट स्कोर पर असर | ख्य लाभ / नुकसान |
| समय पर EMI चुकाना | पॉजिटिव | पेमेंट हिस्ट्री बेहतर होती है और बैंकों का भरोसा बढ़ता है |
| EMI पेमेंट मिस करना | नेगेटिव | स्कोर घट जाता है और भविष्य में लोन मिलना मुश्किल होता है |
| एक साथ कई EMI लेना | मध्यम / रिस्की | कर्ज का बोझ बढ़ता है, सही मैनेजमेंट न होने पर 'डेब्ट ट्रैप' का खतरा |
| EMI सफलतापूर्वक बंद करना | बहुत अच्छा (पॉजिटिव) | अनुशासित क्रेडिट हिस्ट्री बनती है और नए लोन की राह आसान होती है |
1-बड़ी खरीदारियों को आसानी से मैनेज करने में मदद मिलती है, बस आपको इसके लिए सही प्लानिंग की जरूरत होती है.
2-उन लोगों के लिए बहुत काम की है जो क्रेडिट कार्ड का यूज नहीं करना चाहते
3-अगर किस्तों को समय पर चुकाया जाए, तो इससे एक साफ-सुथरी क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद मिलती है
4-यह आसान शर्तों और फ्लेक्सिबल टाइम के साथ खरीदारी का स्मूद एक्सपीरियंस देती है
5-अगर जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो यह सर्विस बेहद मददगार साबित हो सकती है
आपको यह बात साफ तौर पर समझ लेनी चाहिए कि भले ही कोई ऑफर ‘0% EMI’ (नो-कॉस्ट ईएमआई) का दावा करता हो, फिर भी बैंक प्रोसेसिंग फीस, हिडन चार्ज या जीएसटी वसूल सकते हैं.तो इसलिए कोई भी EMI प्लान चुनने से पहले उसकी शर्तों को हमेशा ध्यान से पढ़ें.
अपने सेविंग्स अकाउंट में हमेशा जरूरी बैलेंस बनाए रखें ताकि ऑटो-डेबिट (खाते से अपने आप पैसा कटना) फेल न हो और आप पेनल्टी (जुर्माने) से बच सकें.तो अगर कोई शक हो, तो जल्दबाजी में खरीदारी न करें, पहले इस तरह के लेन-देन के नफे-नुकसान को अच्छी तरह समझ लें और जरूरत पड़ने पर किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लें ताकि आपका फैसला सही हो.
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आपको बता दें कि डेबिट कार्ड EMI आपके क्रेडिट स्कोर को बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है. असल में यह पूरी तरह इस बात पर डिपेंड करता है कि आप अपनी किस्तों को कितनी जिम्मेदारी से चुकाते हैं.तो हमेशा अपनी जेब (चुकाने की क्षमता) देखकर ही उधार लें, एक्सपर्ट्स की सलाह लें और एक अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखने के लिए अपनी EMIs को रेगुलरली ट्रैक करते रहें.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या Debit Card EMI Credit Score में दिखती है?
हां, कई बैंक इसे Loan की तरह रिपोर्ट करते हैं
Q2 EMI Miss होने पर क्या होगा?
CIBIL Score गिर सकता है और Penalty लग सकती है
Q3 क्या 0% EMI सच में फ्री होती है?
नहीं, कई बार Hidden Charges और GST लगते हैं
Q4 क्या Debit Card EMI लेना सुरक्षित है?
हां, अगर जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें
Q5 एक साथ कितनी EMI लेना सही है?
उतनी ही लें जितनी आसानी से चुकाई जा सके