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हर इंसान का सपना होता है कि उसका अपना एक घर हो लेकिन बढ़ती महंगाई और आसमान छूती प्रॉपर्टी कीमतों के बीच यह सपना अक्सर होम लोन के बिना पूरा नहीं हो पाता है.वैसे कई बार ऐसा भी होता है कि बैंक भी आपकी होम लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देता है, जिससे लोगों को लगता है कि अब घर का सपना टूट गय,लेकिन असल में ऐसा नहीं है. जी हां कुछ समझदारी और तैयारी से आप बैंक की ‘ना’ को ‘हां’ में बदल सकते हैं और दोबारा अप्लाई करने पर आसानी से लोन पास करवा सकते हैं.
तो फिर अगर आपका होम लोन बार-बार रिजेक्ट हो रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. नीचे दिए गए पांच आसान लेकिन असरदार टिप्स को अपनाकर आप बैंक को दोबारा से अपने पक्ष में मना सकते हैं.
होम लोन रिजेक्ट होने की सबसे आम कारण आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) होता है. बैंक किसी भी लोन को मंजूर करने से पहले यह देखता है कि आपके पिछले भुगतान रिकॉर्ड कैसे रहे हैं.तो अगर आपने पहले किसी लोन या क्रेडिट कार्ड की EMI समय पर नहीं चुकाई है, तो सिबिल स्कोर गिर जाता है, और बैंक को लगता है कि आप “रिस्क” हैं.
जी हां अगर आपका स्कोर 750 से कम है, तो सबसे पहले इसे सुधारने पर ध्यान देना चाहिए इसके लिए अपने क्रेडिट कार्ड बिल टाइम पर भरें, पुरानी ईएमआई मिस ना करें, और अगर कोई गलती सिबिल रिपोर्ट में दिख रही है तो उसे सिबिल की वेबसाइट पर जाकर सुधारें.असल में लगातार तीन से छह महीने अच्छे भुगतान रिकॉर्ड रखने से स्कोर तेजी से ऊपर जाता है. एक बार स्कोर 750+ हो जाए, तो बैंक खुद लोन देने को तैयार हो जाते हैं.
अक्सर ऐसा होता है कि लोग जल्द से जल्द लोन चुकाने की चाह में छोटी अवधि (जैसे 10 या 15 साल) का टेन्योर को चुन लेते हैं. लेकिन ऐसा करने से EMI बहुत ज्यादा हो जाती है और बैंक को लगता है कि आपकी आय के अनुसार यह बोझ ज्यादा है.
इसलिए कोशिश करें और लोन टेन्योर 20-25 साल तक बढ़ाएं. ऐसा करने से EMI कम हो जाएगी और बैंक को लगेगा कि आप लोन आसानी से चुका सकते हैं, इससे आपकी लोन मंजूरी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
अगर आपके नाम से लोन रिजेक्ट हुआ है, तो फिर को-एप्लीकेंट जोड़ना एक स्मार्ट कदम हो सकता है. जी हां आप अपने जीवनसाथी, माता-पिता या भाई को को-एप्लीकेंट बना सकते हैं — बशर्ते उनका सिबिल स्कोर अच्छा हो और उनकी इनकम स्थिर हो.
को-एप्लीकेंट जोड़ने से बैंक को दोहरी गारंटी मिल जाती है. इनकम का ऑप्शन बढ़ता है और बैंक का भरोसा मजबूत होता है कि लोन समय पर चुकाया जा सकेगा. यही कारण है कि को-एप्लीकेंट वाले केस में बैंक जल्दी मंजूरी देता है.
अगर आपका सेविंग या सैलरी अकाउंट किसी बैंक में कई सालों से चल रहा है, तो उस बैंक से होम लोन लेना हमेशा आसान रहता है. बैंक के पास पहले से आपका ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, इनकम पैटर्न और खर्चों का पूरा हिसाब होता है. इस वजह से बैंक को आपके ऊपर भरोसा करने में समय नहीं लगता.
दूसरी ओर, किसी नए बैंक में एप्लीकेशन करने पर वे ज्यादा जांच करते हैं और एक्स्ट्रा डाक्यूमेंट्स मांगते हैं. इससे रिजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए कोशिश करें कि उसी बैंक में लोन के लिए आवेदन करें जहां आपका पुराना अकाउंट है.
अगर बैंक आपकी एप्लीकेशन रिजेक्ट कर चुका है, तो अगली बार थोड़ा ज्यादा डाउन पेमेंट करें. आमतौर पर लोग प्रॉपर्टी वैल्यू का 10-15% एडवांस देते हैं, लेकिन अगर आप 25-30% तक डाउन पेमेंट कर देते हैं, तो बैंक का रिस्क कम हो जाता है.
ज्यादा डाउन पेमेंट का मतलब है कि आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत है और आप लोन को लेकर गंभीर हैं. इससे बैंक का भरोसा बढ़ता है और लोन अप्रूव होने की संभावना लगभग 90% तक बढ़ जाती है. इसके साथ ही, इससे आपकी EMI भी कम हो जाती है और ब्याज का बोझ घटता है.
आपको बता दें कि बैंक लोन देते समय Fixed Obligation to Income Ratio (FOIR) देखता है.तो अगर आपकी आधी इनकम पहले से ईएमआई में जा रही है, तो नया लोन मुश्किल से मंजूर होता है.तो इसलिए कोशिश करें कि आपकी कुल EMI आपकी इनकम के 50% से कम रहे.
लोन रिजेक्ट होना कोई अंत नहीं है, यह केवल एक संकेत है कि आपको अपनी फाइनेंशियल स्थिति सुधारने की जरूरत है. सिबिल स्कोर सुधारें, सही बैंक चुनें, डाउन पेमेंट बढ़ाएं और को-एप्लीकेंट जोड़ें, तो बैंक आपकी लोन एप्लीकेशन को मना नहीं कर सकेगा. याद रखें, लोन लेने से ज्यादा जरूरी है लोन की तैयारी करना, क्योंकि स्मार्ट तैयारी ही घर के सपने को हकीकत में बदलती है.
Top 5 FAQs
1. बैंक होम लोन एप्लीकेशन क्यों रिजेक्ट करते हैं?
कम सिबिल स्कोर, अधिक EMI बोझ, अस्थिर इनकम, अधूरी डॉक्यूमेंटेशन या ज्यादा क्रेडिट देनदारी के कारण बैंक एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देता है.
2. होम लोन के लिए अच्छा सिबिल स्कोर कितना होना चाहिए?
750 या उससे अधिक का सिबिल स्कोर होम लोन अप्रूवल के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
3. क्या को-एप्लीकेंट जोड़ने से लोन मंजूरी में मदद मिलती है?
हां, को-एप्लीकेंट की इनकम और क्रेडिट हिस्ट्री जुड़ने से बैंक का भरोसा बढ़ता है और लोन जल्दी अप्रूव होता है.
4. लोन अवधि बढ़ाने से क्या फायदा होता है?
लोन टेन्योर बढ़ाने से EMI कम हो जाती है, जिससे बैंक को लगता है कि आप आसानी से भुगतान कर पाएंगे, और लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ जाती है.
5. ज्यादा डाउन पेमेंट करने से क्या लाभ होता है?
ज्यादा डाउन पेमेंट करने से बैंक का रिस्क घटता है, ब्याज का बोझ कम होता है और लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ जाती है.
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