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घर तो हर कोई खरीदना चाहता है, लेकिन कोई भी बिना होम लोन के घर नहीं ले पाता है. घरों की कीमत है भी इतनी कि कुछ गिने-चुने अमीरों के अलावा बाकी हर किसी को घर खरीदने के लिए होम लोन की जरूरत पड़ती है. हालांकि, अधिकतर लोग होम लोन लेने के बाद अक्सर एक गलती कर बैठते हैं, जिसकी वजह से उनका जो लोन 20 साल में चुकाया जा सकता था, उसे चुकाने में उन्हें 25 से 30 साल तक का समय लग जाता है.
जब भी बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में बदलाव किया जाता है तो इसकी वजह से होम लोन चुकाने की अवधि बढ़ जाती है. अधिकतर लोग शुरुआत में इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन बाद में जब उन्हें पता चलता है, तो वह बैंक से इसकी शिकायत करते हैं. कई बार तो इस ओर ध्यान जाते-जाते इतनी देर हो चुकी होती है कि आपका काफी नुकसान हो जाता है.
मान लीजिए कि आपने 8 फीसदी की दर पर 30 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लिया. इस तरह आपकी ईएमआई करीब 25,093 रुपये की बनेगी. मान लेते हैं कि होम लोन लेने के 5 साल बाद आपके होम लोन की दर 11 फीसदी हो जाती है. इस वक्त आपके होम लोन का आउटस्टैंडिंग प्रिंसिपल अमाउंट 26 लाख रुपये के करीब बचेगा, क्योंकि शुरुआती सालों की ईएमआई में ब्याज का हिस्सा अधिक होता है, जबकि प्रिंसिपल अमाउंट का हिस्सा कम होता है.
5 साल बाद की स्थिति में आपको लगेगा कि ईएमआई के अब 15 साल बचे हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है. दरअसल, ब्याज दर बढ़ने के साथ ही आपके लोन की अवधि को ईएमआई को देखते हुए एडजस्ट कर दिया जाता है. इससे आपकी ईएमआई जस की तस रहती है, लेकिन आपके लोन की अवधि बढ़ जाती है.
तो अगर आपकी ईएमआई पहले जितनी 25,093 रुपये के करीब ही रखी जाती है तो आपके लोन की बची हुई अवधि 15 साल नहीं, बल्कि 28 साल हो जाएगी. यहां अगर आपकी ईएमआई 15 साल के हिसाब से देखी जाए तो वह बढ़कर 29,500 रुपये के करीब हो जाएगी. इस तरह जो लोग आप 20 साल में चुकाने वाले थे, उसे चुकाने में आपको करीब 33 साल लग जाएंगे.
अगर आप नहीं चाहते कि आपके होम लोन की अवधि बढ़ जाए, तो जब-जब ब्याज दरें बढ़ें, तो आपको बैंक से बात कर के अपने हम लोन को रीस्ट्रक्चर करवाना होगा. आपको बैंक से कहना होगा कि वह आपको होम लोन की अवधि ना बढ़ाए, बल्कि ईएमआई को नई ब्याज दर के हिसाब से बढ़ा या घटा दे. अधिकतर ग्राहक यही गलती करते हैं और बैंक से लोन को रीस्ट्रक्चर नहीं कराते हैं, जिसके चलते बाद में उन्हें दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं.