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घर खरीदना लगभग हर इंसान का सपना होता है. लेकिन घर लेने से पहले सबसे जरूरी सवाल ये होता है कि बैंक आपकी आमदनी के हिसाब से आपको कितना होम लोन देगा. कई लोग अच्छी सैलरी होने के बावजूद कम लोन मिलने पर हैरान हो जाते हैं. इसकी वजह है कि बैंक सिर्फ सैलरी नहीं देखता, बल्कि कई फैक्टर्स के आधार पर Home Loan Eligibility तय करता है. चलिए आसान और बोलचाल वाली भाषा में पूरा गणित समझते हैं.
होम लोन एलिजिबिलिटी का मतलब है कि बैंक आपको अधिकतम कितनी रकम तक का लोन दे सकता है. इसे तय करने के लिए बैंक दो बुनियादी बातें देखता है.
आपकी सैलरी स्लिप में जो ग्रॉस सैलरी लिखी होती है, वो आपकी असली कमाई नहीं मानी जाती. PF, टैक्स, इंश्योरेंस और दूसरे डिडक्शन कटने के बाद जो पैसा आपके अकाउंट में आता है, वही आपकी नेट इनकम होती है. बैंक इसी नेट इनकम के आधार पर तय करता है कि आप हर महीने कितनी EMI दे सकते हैं.
अगर आपकी नेट इनकम 1 लाख रुपए महीना है यानी सालाना करीब 12 लाख रुपए, तो बैंक आमतौर पर 45 से 50 लाख रुपए तक का होम लोन मंजूर कर सकता है.
बैंक ये भी देखता है कि आपकी इनकम कितनी स्थिर है. अगर आप किसी नामी कंपनी में रेगुलर जॉब करते हैं, तो बैंक का भरोसा ज्यादा होता है. अगर आप फ्रीलांसर, कंसल्टेंट या बिजनेस करते हैं, तो बैंक थोड़ा सतर्क रहता है और ज्यादा डॉक्यूमेंट मांग सकता है.
SBI Reality के ब्लॉग के मुताबिक, बैंक आमतौर पर कुछ मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करते हैं.
अक्सर बैंक आपकी सालाना ग्रॉस इनकम का करीब 4 गुना तक लोन देने पर विचार करता है. मतलब अगर आपकी सालाना इनकम 12 लाख रुपए है, तो बैंक अधिकतम 48 से 50 लाख रुपए तक का लोन ऑफर कर सकता है. ये अधिकतम सीमा होती है.
अगर आपकी ग्रॉस इनकम में से करीब 25% PF, TDS और इंश्योरेंस में कट जाता है, तो बैंक नेट इनकम को आधार बनाता है. ऐसे केस में मल्टीप्लायर 5 से 6 गुना तक हो सकता है.
अगर आपकी शुद्ध सालाना सैलरी 9 लाख रुपए है, तो बेस्ट केस सिनेरियो में बैंक आपको 48 से 54 लाख रुपए तक का लोन दे सकता है.
एक सामान्य नियम ये है कि आपकी होम लोन EMI, आपकी डिस्पोजेबल इनकम के 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. डिस्पोजेबल इनकम यानी वो रकम जो टैक्स और जरूरी खर्चों के बाद आपके पास बचती है.
मान लीजिए- अगर आपकी नेट डिस्पोजेबल इनकम 45,000 रुपए महीना है, तो बैंक उतनी ही EMI वाला लोन देगा, जो 15 से 20 साल की अवधि में करीब 45 से 50 लाख रुपए के लोन के बराबर हो.
अगर आपके पति या पत्नी की स्थिर इनकम है और CIBIL स्कोर अच्छा है, तो उन्हें को-एप्लिकेंट बनाकर आप लोन अमाउंट बढ़ा सकते हैं.
अगर पर्सनल लोन या कार लोन चल रहा है, तो उसे बंद करने से आपकी EMI क्षमता बढ़ जाती है.
750 या उससे ज्यादा स्कोर होने पर बैंक बेहतर ब्याज दर और ज्यादा लोन लिमिट देता है.
अगर आपके पास FD, गोल्ड या कोई दूसरी प्रॉपर्टी है, तो उसे दिखाकर या गिरवी रखकर लोन लिमिट बढ़ाई जा सकती है.
Q1. क्या सिर्फ सैलरी देखकर बैंक होम लोन देता है?
नहीं, बैंक नेट इनकम, इनकम स्टेबिलिटी और CIBIL स्कोर भी देखता है.
Q2. 1 लाख रुपए महीना कमाने पर कितना होम लोन मिल सकता है?
आमतौर पर 45 से 50 लाख रुपए तक का लोन मिल सकता है, लेकिन ये बैंक पर निर्भर करता है.
Q3. EMI कितनी होनी चाहिए?
होम लोन EMI आपकी डिस्पोजेबल इनकम के 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
Q4. CIBIL स्कोर कितना जरूरी है?
750 से ज्यादा स्कोर होने पर लोन आसानी से और कम ब्याज दर पर मिलता है.
Q5. क्या को-एप्लिकेंट जोड़ने से लोन बढ़ता है?
हां, को-एप्लिकेंट की स्थिर इनकम और अच्छा स्कोर लोन अमाउंट बढ़ा सकता है.