HDFC बैंक से बर्खास्त संपथ कुमार की बड़ी तैयारी, टर्मिनेशन के खिलाफ करेंगे अपील! जानिए कैसे खुद को बता रहे बेकसूर

HDFC बैंक के 'कॉर्पोरेट बैटल' में अब एक नया मोड़ आ गया है. बर्खास्त किए गए ग्रुप हेड (ब्रांच बैंकिंग) संपथ कुमार अब बैंक के फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में हैं. सूत्रों के अनुसार, संपथ कुमार का तर्क है कि AT-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामले में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं थी और उनका नाम केवल 'निगरानी में कमी' (Oversight) के आधार पर बलि का बकरा बनाया गया है.
HDFC बैंक से बर्खास्त संपथ कुमार की बड़ी तैयारी, टर्मिनेशन के खिलाफ करेंगे अपील! जानिए कैसे खुद को बता रहे बेकसूर

हाल ही में HDFC बैंक के ग्रुप हेड (ब्रांच बैंकिंग) संपथ कुमार को बर्खास्त किया गया था. अब सूत्रों के हवाले से ये खबर आ रही है कि वह टर्मिनेशन के खिलाफ अपील करेंगे. सूत्रों का दावा है कि AT-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामले में संपथ कुमार की सीधी भूमिका नहीं है.

बताया जा रहा है कि निगरानी में कमी के चलते संपथ कुमार की सेवा समाप्त की गई. संपथ कुमार साउथ और वेस्ट के ग्रुप हेड (ब्रांच बैंकिंग) थे, साथ में इंटरनेशनल मैंडेट भी संभाल रहे थे. आइए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है.

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'अस्पष्ट' आरोपों की कोई जगह नहीं: SEBI चेयरमैन

जब SEBI चेयरमैन से पूछा गया कि क्या इस्तीफे में उठाए गए ‘एथिक्स’ और ‘गवर्नेंस’ के मुद्दे जांच के लिए पर्याप्त हैं, तो उनका जवाब साफ था-

सबूत कहां हैं: चेयरमैन ने कहा कि आप ‘अस्पष्ट’ (Vague) आरोप नहीं लगा सकते. अगर कोई मुद्दा उठाया गया है, तो उसे साफ-साफ और विस्तार से बताना जरूरी है.

बोर्ड की सहमति जरूरी: अगर इस्तीफे में बताए गए कारणों को बोर्ड ने स्वीकार नहीं किया और वे बोर्ड मीटिंग के लिखित रिकॉर्ड (Minutes) में दर्ज नहीं हैं, तो SEBI उनके आधार पर जांच शुरू नहीं कर सकता.

LODR नियम और स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका

SEBI के LODR (Listing Obligations and Disclosure Requirements) नियमों के तहत स्वतंत्र निदेशकों के लिए सख्त नियम तय हैं:

चिंता जताने का अधिकार: अगर किसी स्वतंत्र निदेशक को बैंक के कामकाज में गड़बड़ी नजर आती है, तो वह बोर्ड के सामने अपनी चिंता रख सकता है.

रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी: बोर्ड की जिम्मेदारी है कि इन चिंताओं को मीटिंग के ‘मिनट्स’ में शामिल किया जाए.

छोटे निवेशकों के रक्षक: स्वतंत्र निदेशक ‘माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स’ के हितों की रक्षा करते हैं. अगर वह अपनी बात रिकॉर्ड में नहीं लाते, तो इसे उनकी जिम्मेदारी में कमी माना जाता है.

असली विवाद क्या है?

पूरा मामला विदेशी बैंक क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) के डूबने से जुड़ा है.

धोखाधड़ी के आरोप: कहा जा रहा है कि HDFC बैंक के अधिकारियों ने खासकर NRI ग्राहकों को ‘क्रेडिट सुइस’ के AT-1 बॉन्ड्स यह कहकर बेचे कि ये FD जैसे सुरक्षित हैं.

असल सच्चाई: AT-1 बॉन्ड्स काफी जोखिम भरे होते हैं. मार्च 2023 में जब क्रेडिट सुइस डूबा, तो इन बॉन्ड्स की वैल्यू पूरी तरह खत्म हो गई- यानी निवेशकों का पैसा डूब गया.

खाली कागज पर साइन का आरोप: कुछ ग्राहकों का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाकर उनके FCNR डिपॉजिट को इन जोखिम भरे बॉन्ड्स में बदल दिया.

संपथ कुमार पर कार्रवाई क्यों हुई?

संपथ कुमार HDFC बैंक के ‘रिटेल ब्रांच बैंकिंग’ में अहम पद पर थे.

नौकरी से निकाला गया: बैंक ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है. माना जा रहा है कि अतनु चक्रवर्ती ने जाने से पहले इस ‘मिस-सेलिंग’ मामले की आंतरिक जांच शुरू करवाई थी.

जवाबदेही दिखाने की कोशिश: चक्रवर्ती के हटने के बाद बैंक ने यह कार्रवाई करके संकेत दिया है कि वह गड़बड़ियों पर सख्त है.

आगे क्या हो सकता है?

बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है.

RBI की जांच: रिजर्व बैंक यह जांच कर सकता है कि क्या ग्राहकों को जानबूझकर गलत जानकारी दी गई.

SEBI की नजर: अगर यह साबित होता है कि बोर्ड ने गड़बड़ियों को नजरअंदाज किया, तो SEBI कड़ी कार्रवाई कर सकती है.

निवेशकों की सुरक्षा: इस पूरे मामले में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका और छोटे निवेशकों के हित सबसे अहम बने हुए हैं.

Conclusion

यह मामला केवल एक अधिकारी की नौकरी जाने का नहीं है, बल्कि देश के सबसे भरोसेमंद बैंक की 'साख' का है. अगर संपथ कुमार अपनी अपील में सफल होते हैं, तो यह बैंक के मैनेजमेंट पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करेगा. वहीं, अगर ग्राहकों को उनका डूबा हुआ पैसा वापस नहीं मिलता, तो बैंकिंग सिस्टम से लोगों का भरोसा उठ सकता है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- क्या संपथ कुमार को दोबारा नौकरी मिल सकती है?

यह अपील के नतीजे पर निर्भर करेगा. अगर वे साबित कर पाए कि प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उन्हें राहत मिल सकती है.

2- AT-1 बॉन्ड्स में निवेश करना क्यों खतरनाक था?

क्योंकि इन बॉन्ड्स में 'राइट-ऑफ' क्लॉज होता है. अगर बैंक डूबता है, तो निवेशक का पैसा सबसे पहले खत्म किया जाता है.

3- क्या SEBI इस मामले को बंद कर सकता है?

नहीं, SEBI तभी जांच करेगा जब उसे नियमों (LODR) का सीधा उल्लंघन दिखेगा. अस्पष्ट बातों पर वे समय बर्बाद नहीं करना चाहते.

4- छोटे निवेशकों (Minority Shareholders) का क्या होगा?

स्वतंत्र निदेशकों की यह जिम्मेदारी है कि वे इनके हितों की रक्षा करें. अगर गड़बड़ी साबित हुई, तो निवेशकों को हर्जाना मिल सकता है.

5- अतनु चक्रवर्ती का अगला कदम क्या हो सकता है?

संभव है कि वे नियामक संस्थाओं (Regulators) को गोपनीय तरीके से विस्तृत जानकारी सौंपें, जो बोर्ड मीटिंग में नहीं दी गई थी.

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