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HDFC Bank ने 8 जून 2026 से अपनी MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) में 5 से 10 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ोतरी कर दी है. प्रतीकात्मक फोटो
Banking: अगर आपका होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन HDFC Bank से चल रहा है तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है. देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank ने अपनी MCLR दरों में बढ़ोतरी कर दी है.
दिलचस्प बात यह है कि ये फैसला ऐसे समय आया है जब 5 जून 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था. इसके बावजूद बैंक ने अपनी आंतरिक लेंडिंग कॉस्ट के आधार पर MCLR बढ़ाने का फैसला लिया है.
जिन ग्राहकों के लोन MCLR आधारित हैं, उनकी अगली रीसेट डेट पर EMI या लोन अवधि बढ़ सकती है. वहीं Repo Linked Loan, External Benchmark Loan या फिक्स्ड रेट लोन वाले ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा.
MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate. यह वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर बैंक कुछ प्रकार के लोन देने की कैलकुलेशन करता है. बैंक अपने लोन की ब्याज दर तय करने के लिए MCLR को एक बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल करते हैं. आसान भाषा में समझें तो:
RBI ने साल 2016 में MCLR सिस्टम लागू किया था.
HDFC Bank MCLR Rates (8 जून 2026 से लागू)
| अवधि | नया MCLR | पुराना MCLR | बदलाव |
| Overnight | 8.10% | 8.05% | +5 bps |
| 1 Month | 8.05% | 8.05% | कोई बदलाव नहीं |
| 3 Month | 8.20% | 8.15% | +5 bps |
| 6 Month | 8.35% | 8.30% | +5 bps |
| 1 Year | 8.40% | 8.35% | +5 bps |
| 2 Year | 8.55% | 8.45% | +10 bps |
| 3 Year | 8.65% | 8.60% | +5 bps |
2 साल के MCLR में सबसे ज्यादा 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई है.
MCLR आधारित होम लोन
अगर आपका पुराना होम लोन MCLR से लिंक्ड है तो अगली रीसेट डेट पर ब्याज दर बढ़ सकती है.
कार लोन
कई पुराने वाहन ऋण MCLR आधारित होते हैं. ऐसे ग्राहकों की EMI पर असर पड़ सकता है.
बिजनेस लोन
MSME और बिजनेस ग्राहकों के कुछ फ्लोटिंग रेट लोन भी MCLR से जुड़े होते हैं. उन पर भी सीधा असर देखने को मिलेगा.
पर्सनल लोन
कुछ फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, अधिकतर बैंक पर्सनल लोन फिक्स रेट पर ही देते हैं.
Repo Linked Loans
अगर आपका लोन RBI Repo Rate से जुड़ा है, तो MCLR बढ़ने का सीधा असर नहीं होगा.
Fixed Rate Loans
इनकी EMI समान बनी रहेगी.
नए External Benchmark Loans
2019 के बाद जारी किए गए कई रिटेल लोन External Benchmark Lending Rate (EBLR) से जुड़े हुए हैं. ऐसे ग्राहकों पर MCLR बदलाव का असर नहीं पड़ता.
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए:
अगर दर 8.40% हो जाती है, तो EMI में बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन पूरे लोन काल में कुल ब्याज भुगतान बढ़ सकता है. छोटा बदलाव लंबे समय में हजारों रुपये का अतिरिक्त ब्याज बन सकता है.

MCLR में बदलाव केवल ब्याज दर की खबर नहीं है. इसका सीधा असर लाखों उधारकर्ताओं की जेब पर पड़ सकता है.
खासतौर पर उन परिवारों के लिए जिनकी पहले से EMI चल रही है, यह बदलाव महत्वपूर्ण है.
अगर आपका HDFC Bank लोन MCLR आधारित है:
अगर आपका लोन Repo Linked है:
Step 1: Loan Statement डाउनलोड करें.
Step 2: Benchmark Type देखें.
Step 3: यदि वहां MCLR लिखा है तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.
Step 4: Reset Date नोट करें.
Step 5: बैंक से नई EMI या नई ब्याज दर की जानकारी लें.
MCLR में छोटी बढ़ोतरी तुरंत बड़ी EMI वृद्धि नहीं लाती, लेकिन लंबे समय के लोन में इसका संचयी प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है. इसलिए उधारकर्ताओं को अपने लोन की रीसेट अवधि और बेंचमार्क को समझना चाहिए.
जरूरी नहीं कि ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई ही बढ़े. मुमकिन है कि आपकी ईएमआई पर कोई असर ना दिखे, बल्कि आपके लोन की अवधि ही बढ़ा दी जाए. आमतौर पर बैंक यही प्रैक्टिस करते हैं, ताकि ग्राहकों पर ईएमआई का बोझ ना बढ़े. हालांकि, ऐसे में बहुत से लोग कनफ्यूजन में रहते हैं. उन्हें लगता है कि उनकी ईएमआई पर ब्याज बढ़ने का असर नहीं हुआ है, लेकिन हकीकत ये होती है कि असर सीधे उनकी ईएमआई पर नहीं, बल्कि उनके लोन की अवधि पर दिखता है. हालांकि, अगर आप चाहे तो बैंक से कहकर अपनी ईएमआई बढ़वा सकते हैं, ताकि लोन चुकाने की अवधि ना बढ़े.
HDFC Bank की MCLR में 5 से 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके लोन MCLR से जुड़े हुए हैं. हालांकि सभी उधारकर्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा. Repo Linked और Fixed Rate Loan वाले ग्राहकों को फिलहाल राहत मिल सकती है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि आप अपने लोन का बेंचमार्क और रीसेट डेट जरूर जांचें.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 MCLR क्या होता है?
MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) यह किसी बैंक का वह न्यूनतम आंतरिक ब्याज दर है, जिससे कम दर पर बैंक किसी भी ग्राहक को लोन नहीं दे सकता.
Q2 लोन की ईएमआई (EMI) क्या होती है?
EMI का मतलब Equated Monthly Installment है, जो कर्ज चुकाने के लिए हर महीने बैंक को दी जाने वाली एक निश्चित राशि होती है.
Q3 फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट (Fixed Interest Rate) किसे कहते हैं?
जिस लोन की ब्याज दर पूरे लोन काल (Tenure) के दौरान एक समान रहती है और बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं बदलती, उसे फिक्स्ड रेट कहते हैं.
Q4 फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट (Floating Interest Rate) क्या है?
इस व्यवस्था में लोन की ब्याज दरें बाजार और रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों के आधार पर समय-समय पर बदलती रहती हैं.
Q5 MCLR बढ़ने या घटने का लोन पर क्या असर पड़ता है?
MCLR बढ़ने पर आपका लोन महंगा (EMI या लोन की अवधि बढ़ जाती है) हो जाता है, और इसके घटने पर लोन सस्ता हो जाता है.