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फेस्टिव सीज़न आने वाला है और आप कुछ नया खरीदने की सोच रहे हैं- शायद अपने सपनों का घर. लेकिन, लोन की EMI का बोझ अक्सर इस खुशी को थोड़ा कम कर देता है. अब सोचिए, अचानक आपको एक खुशखबरी मिले कि आपकी EMI कम होने वाली है. कैसा लगेगा?
बस ऐसी ही शानदार खबर HDFC बैंक लेकर आया है. फेस्टिव सीज़न शुरू होने से पहले ही, HDFC बैंक ने अपने लाखों ग्राहकों को एक बड़ा तोहफा दिया है. बैंक ने अपनी ब्याज दरें, जिन्हें MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) कहते हैं, 5 बेसिस प्वाइंट तक घटा दी हैं. इसका सीधा मतलब है कि अब होम लोन लेना थोड़ा सस्ता हो जाएगा. और अगर आपने पहले से लोन ले रखा है, तो आपकी मासिक किस्त (EMI) पर भी इसका असर पड़ेगा.
आज हम जानेंगे कि ये MCLR क्या होता है, HDFC बैंक ने कितनी दरें घटाई हैं और सबसे जरूरी, अगर आपने 25 लाख का होम लोन लिया है और तीन साल हो चुके हैं, तो आपकी EMI में कितना अंतर आएगा. चलिए, एक-एक बात को बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं.मतलब साफ है- अब आपकी EMI थोड़ी हल्की होगी और जेब पर बोझ भी कम. सवाल यही है कि आखिर EMI में कितनी राहत मिलेगी? आइए, इसे 6 सवालों के जवाब में समझें और आसान कैलकुलेशन देखें.
| अवधि (Tenor) | नई MCLR दर | पहले की MCLR दर | कितना बदला |
| ओवरनाइट | 8.55% | 8.60% | -0.05% |
| 1 महीना | 8.55% | 8.60% | -0.05% |
| 3 महीने | 8.60% | 8.65% | -0.05% |
| 6 महीने | 8.65% | 8.70% | -0.05% |
| 1 साल | 8.65% | 8.70% | -0.05% |
| 2 साल | 8.70% | 8.75% | -0.05% |
| 3 साल | 8.75% | 8.75% | कोई बदलाव नहीं |
जैसा कि आप देख सकते हैं, 3 साल के MCLR में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन बाकी सभी मुख्य अवधि के MCLR कम हुए हैं. होम लोन अक्सर 1 साल या उससे ज़्यादा के MCLR से जुड़े होते हैं.
जवाब: बैंक ने अपने MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) को 5 बेसिस प्वाइंट यानी 0.05% घटाया है. 6 महीने और 1 साल का MCLR अब 8.70% से घटकर 8.65% हो गया है.
जवाब: जब भी बैंक ब्याज दर घटाता है तो EMI या तो कम हो जाती है या फिर लोन का टेन्योर घटा दिया जाता है.
जवाब: मान लीजिए किसी ने 20 साल के लिए 25 लाख का होम लोन लिया है और 3 साल EMI भर चुका है.
पहले ब्याज दर: 8.70%
नई ब्याज दर: 8.65%
EMI कैलकुलेशन (लगभग)
पुरानी EMI (8.70% पर): ₹22,055
नई EMI (8.65% पर): ₹21,987
यानी EMI में लगभग ₹68 की कमी होगी.
जवाब: अगर मान लें कि ब्याज दर पूरी बाकी अवधि (17 साल) तक यही रहे, तो EMI कम होने से लगभग ₹13,800 से ज्यादा की बचत हो सकती है.
जवाब: यह बदलाव उन लोन पर होगा जो MCLR से लिंक्ड हैं. जैसे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन.
जवाब: ब्याज दरों में थोड़ी भी कमी ग्राहकों को बड़ी राहत देती है. EMI हल्की होते ही हर महीने का कैश फ्लो सुधरता है और फेस्टिव सीजन में खर्च करना आसान हो जाता है.
HDFC बैंक की यह दर कटौती भले ही छोटी लगे, लेकिन असर बड़ा है. EMI में कुछ सौ रुपये की राहत भी लंबे समय में हजारों की बचत कराती है. अगर आपने भी लोन लिया है तो यह आपके लिए खुशखबरी है.
A: यह वह ब्याज दर है जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को लोन देता है. हर बैंक अपनी MCLR तय करता है.
A: 1 बेसिस प्वाइंट = 0.01%. यानी 5 बेसिस प्वाइंट = 0.05%.
A: जरूरी नहीं. कुछ मामलों में EMI वही रहती है और लोन का टेन्योर कम हो जाता है.
A: फ्लोटिंग रेट लोन में ब्याज दर बाजार के हिसाब से बदलती है, जबकि फिक्स्ड रेट लोन में EMI तय रहती है.