सस्ता Loan लेने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा! इस बैंक ने की 35 bps तक की कटौती, 3 महीने में 0.60% गिरे रेट

बैंक की तरफ से 35 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की गई है यानी अब लोगों को एचडीएफसी बैंक से कर्ज 0.30 फीसदी सस्ता मिलेगा. बैंक ने जून में 10 बेसिस प्वाइंट और मई में 15 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. इस तरह 3 महीने में बैंक 60 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है.
सस्ता Loan लेने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा! इस बैंक ने की 35 bps तक की कटौती, 3 महीने में 0.60% गिरे रेट

प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने एमसीएलआर (MCLR) में कटौती का ऐलान किया है. बैंक की तरफ से की गई इस कटौती से कर्ज लेने वाले लोगों को फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें कम ब्याज (Interest Rate) चुकाना पड़ेगा. बैंक की तरफ से 35 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की गई है यानी अब लोगों को एचडीएफसी बैंक से कर्ज 0.30 फीसदी सस्ता मिलेगा. बैंक ने जून में 10 बेसिस प्वाइंट और मई में 15 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. इस तरह 3 महीने में बैंक 60 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है.

इस कटौती के बाद अब बैंक की एमसीएलआर रेंज 8.6 फीसदी से 8.8 फीसदी तक हो गई है. एचडीएफसी बैंक की तरफ से की गई यह कटौती 7 जुलाई 2025 से ही लागू हो चुकी है. बैंक की तरफ से यह कटौती जून में भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद आई है. इससे पहले फरवरी और अप्रैल में भी आरबीआई ने 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. यानी अब तक केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कुल मिलाकर 100 बेसिस प्वाइंट यानी 1 फीसदी की कटौती कर चुका है.

अब क्या हो गई नई दरें?

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कटौती के बाद बैंक के ओवरनाइट और एक महीने के एमसीएलआर में 30 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. अब यह 8.9 फीसदी से घटकर 8.6 फीसदी रह गया है. वहीं बैंक के 3 महीने के एमसीएलआर में 20 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए इसे 8.95 फीसदी से घटाकर 8.75 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा 6 महीने के एमसीएलआर में 30 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है, जिसके बाद अब यह 9.05 फीसदी से घटकर 8.75 फीसदी हो गया है.

अगर एक साल के एमसीएलआर की बात करें तो इसमें भी 30 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है, जिसके बाद यह दर 9.05 फीसदी से घटकर 8.75 फीसदी हो गई है. अगर 2 साल के एमसीएलआर की बात करें तो इसमें सबसे ज्यादा 35 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है और यह 9.10 फीसदी से घटकर 8.75 फीसदी हो गया है. 3 साल के एमसीएलआर में 30 बेसिस प्वाइंट की कटौती के साथ इसे 9.10 फीसदी से घटाकर 8.80 फीसदी कर दिया गया है.

hdfc mclr

क्या होता है MCLR?

MCLR भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से तय किया गया रेट है जो कॉमर्शियल बैंकों की तरफ से लोन की ब्याज दर तय करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. भारत में नोटबंदी के बाद से इसे लागू किया गया है. इससे ग्राहकों के लिए लोन लेना आसान हो गया है. MCLR वह न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है. दरअसल जब आप किसी बैंक से कर्ज लेते हैं तो बैंक की तरफ से लिए जाने वाले ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है. अब इसी आधार दर की जगह पर बैंक MCLR का इस्तेमाल कर रहे हैं.

MCLR बढ़ने पर क्‍यों महंगा होता है लोन?

MCLR न्‍यूनतम दर है, ऐसे में ये साफ है कि बैंक इसके रेट के नीचे ग्राहकों को लोन नहीं दे सकते यानी MCLR जितना बढ़ेगा, लोन पर ब्याज भी उतना ही ऊपर जाएगा. ऐसे में मार्जिनल कॉस्ट से जुड़े लोन जैसे- होम लोन, व्हीकल लोन आदि पर ब्याज दरें बढ़ जाएंगी. हालांकि ऐसा नहीं है कि MCLR बढ़ते ही अगले महीने से आपकी ईएमआई भी बढ़ जाएगी. यहां पर गौर करने वाली बात ये है कि MCLR रेट बढ़ने पर आपके लोन पर ब्याज दरें तुरंत नहीं बढ़ती हैं. लोन लेने वालों की EMI रीसेट डेट पर ही आगे बढ़ती है.

क्‍या है MCLR का मकसद?

बैंकों के लेंडिंग रेट्स की नीतिगत दरों के ट्रांसमिशन में सुधार लाने और सभी बैंकों की ब्‍याज दरों की निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के मकसद से MCLR को लागू किया गया. MCLR लागू होने के बाद से होम लोन जैसे लोन सस्‍ते हुए हैं. MCLR की गणना धनराशि की सीमांत लागत (Marginal Cost of Funds), आवधिक प्रीमियम (Period Premium), संचालन खर्च (Operating Expenses) और नकदी भंडार अनुपात (Cash Reserves Ratio) को बनाए रखने की लागत के आधार पर की जाती है. बाद में इस गणना के आधार पर लोन दिया जाता है. यह आधार दर से सस्ता होता है. बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, तीन महीने, छह महीने, एक साल और दो साल का एमसीएलआर घोषित करना अनिवार्य होता है.

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