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भारतीय अर्थव्यवस्था में क्रेडिट का फ्लो किसी भी विकास के लिए जरूरी होता है. लेकिन जब पारंपरिक लोन सेगमेंट धीमी गति से बढ़ रहे हों, तब किसी एक सेगमेंट का इतनी तेज़ी से बढ़ना वाकई ध्यान खींचता है. गोल्ड लोन एक ऐसा ही सेगमेंट है, जिसने हाल ही में ज़बरदस्त उछाल दर्ज की है, जो बैंकों और NBFCs दोनों के लिए एक बड़ा मौका बन गया है.
लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक गोल्ड लोन्स में 124% की सालाना (YoY) ग्रोथ देखी गई है. ये आंकड़ा विशेष रूप से प्रभावशाली है जब हम इसकी तुलना अन्य प्रमुख लोन श्रेणियों से करते हैं:
पिछले साल भी, गोल्ड लोन की रफ्तार बाकी लोन सेगमेंट से आगे रही थी, जो इस ट्रेंड की कन्टीन्यूटी को दिखाता है. ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय उपभोक्ता और छोटे व्यवसाय अब अपनी नकदी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए गोल्ड लोन्स की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं.
गोल्ड लोन की इस वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
पिछले कुछ सालों में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है. जब सोने की कीमत बढ़ती है, तो कोलैटरल (गिरवी रखा गया सोना) का मूल्य भी बढ़ जाता है. इससे उधारकर्ताओं को अपने मौजूदा सोने पर ज़्यादा लोन राशि मिल पाती है, जिससे ये एक आकर्षक विकल्प बन जाता है.
गोल्ड लोन की ज़्यादातर ग्रोथ सेमी-अर्बन और अर्बन क्षेत्रों के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं से आ रही है.
हाल ही में जारी किए गए गोल्ड लोन गाइडलाइंस ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इस सेगमेंट में काम करने के लिए ज़्यादा स्पष्टता प्रदान की है. इससे उन्हें अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को बढ़ाने और ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ गोल्ड लोन प्रोडक्ट्स को आगे बढ़ाने का मौका मिला है.
भारत में सोना एक आसानी से उपलब्ध कोलैटरल है. लगभग हर भारतीय परिवार के पास कुछ मात्रा में सोना होता ही है. ये इसकी स्वीकार्यता को बढ़ाता है. साथ ही, गोल्ड लोन पारंपरिक रूप से कम NPAs वाला सेगमेंट रहा है क्योंकि गिरवी रखे गए सोने की कीमत लोन राशि के लिए सुरक्षा प्रदान करती है. ये बैंकों और NBFCs दोनों को इस सेगमेंट में ज्यादा सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करता है.
किसी भी लोन सेगमेंट की स्थिरता के लिए नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) का स्तर महत्वपूर्ण होता है. गोल्ड लोन्स के मामले में, बैंकों और NBFCs की स्थिति अलग-अलग रही है.
शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक्स (Scheduled Commercial Banks) के लिए गोल्ड लोन NPAs का प्रतिशत स्थिर रहा है. मार्च 2023 में ये 0.20% था, जो मार्च 2025 में मामूली बढ़कर 0.22% हो गया. ये दर्शाता है कि बैंक गोल्ड लोन बांटने में सावधानी बरत रहे हैं और उनके लिए ये सेगमेंट अपेक्षाकृत सुरक्षित बना हुआ है.
हालांकि, अपर और मिड-लेयर NBFCs में गोल्ड लोन NPAs का दबाव बढ़ा है. मार्च 2023 में इनका NPA 1.21% था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 2.14% हो गया. ये वृद्धि NBFCs के लिए एक चिंता का विषय हो सकती है और उन्हें अपनी Risk Management Strategies पर फिर से विचार करने की जरूरत है.
A1: जून 2025 तक गोल्ड लोन्स में 124% की सालाना (YoY) ग्रोथ देखी गई है.
A2: गोल्ड लोन में 124% की ग्रोथ देखी गई है, जबकि क्रेडिट कार्ड लोन में केवल 7% और अन्य पर्सनल लोन में 9% की ग्रोथ रही है. ये दिखाता है कि गोल्ड लोन बाकी सभी से आगे है.
A3: शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक्स के लिए गोल्ड लोन NPAs स्थिर रहे हैं, जो मार्च 2025 तक 0.22% थे.
A4: गोल्ड लोन की मांग बढ़ने के मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें (जिससे कोलैटरल वैल्यू बढ़ी), सेमी-अर्बन और अर्बन MSMEs/व्यक्तिगत उधारकर्ताओं से आती मांग, और नए गोल्ड लोन गाइडलाइंस से मिली स्पष्टता हैं.