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जब आप बैंक या किसी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो सिर्फ आपकी इनकम या सैलरी नहीं देखी जाती. बैंक यह भी जांचते हैं कि आपकी मासिक आमदनी में से कितना पैसा पहले से ही दूसरे खर्चों या लोन की किस्तों में जा रहा है. इसी को कहा जाता है FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio). बैंक इसी से तय करते हैं कि आपको कितना लोन दिया जा सकता है और आप उसे समय पर चुका पाएंगे या नहीं. यहां समझिए इसके बारे में.
FOIR का मतलब है Fixed Obligation to Income Ratio. ये एक फाइनेंशियल मीट्रिक है, जो बताता है कि आपकी मासिक इनकम का कितना प्रतिशत पहले से ही तय भुगतानों जैसे किराया, मौजूदा लोन की ईएमआई, क्रेडिट कार्ड बकाया, बीमा प्रीमियम आदि में खर्च हो रहा है. जितना कम FOIR होगा, उतना ज्यादा हिस्सा आपकी आय का बचा रहेगा, जिससे नया लोन चुकाना आसान होगा.
आमतौर पर बैंक ऐसे व्यक्तियों को लोन नहीं देते जिनका FOIR 50% से अधिक हो. इसका मतलब है कि आपकी मासिक आय का कम से कम आधा हिस्सा फ्री रहना चाहिए ताकि EMI आसानी से चुकाई जा सके.
ये है फॉर्मूला-
FOIR = कुल तय मासिक भुगतान (Fixed Obligations) ÷ मासिक सकल आय (Gross Monthly Income)
Fixed Obligations में शामिल होते हैं:
अगर किसी व्यक्ति की मासिक इनकम ₹40,000 है और उसके तय खर्च ₹20,000 हैं, तो FOIR = 20,000 ÷ 40,000 = 50%. इसका मतलब है कि उसकी आधी आय पहले से ही अन्य भुगतानों में जा रही है.
कम FOIR का मतलब है कि आपकी आमदनी का बड़ा हिस्सा बचा हुआ है, जिससे आप नया लोन बिना किसी वित्तीय तनाव के चुका सकते हैं. बैंकों के लिए यह संकेत होता है कि आप एक वित्तीय रूप से जिम्मेदार और भरोसेमंद उधारकर्ता (Borrower) हैं. इसलिए, जिन व्यक्तियों का FOIR कम होता है, उन्हें बैंक ज्यादा लोन अमाउंट और कम ब्याज दर पर लोन देने के लिए तैयार रहते हैं.
FOIR दो चीज़ों से प्रभावित होता है - आमदनी में बदलाव और फिक्स्ड खर्चों में बदलाव. मुख्य बिंदु ये हैं:-
अगर आप ज्यादा लोन लेना चाहते हैं या ब्याज दर कम कराना चाहते हैं, तो FOIR कम करना जरूरी है. इसके कुछ असरदार तरीके ये हैं:
FOIR यानी Fixed Obligation to Income Ratio, जो बताता है कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा पहले से तय भुगतानों में जा रहा है.
सामान्यत: बैंक 40% तक FOIR को आदर्श मानते हैं.
अगर FOIR 50% से ऊपर है तो बैंक लोन अप्रूव करने में हिचकिचाते हैं क्योंकि आपकी Repayment Capacity कम मानी जाती है.
पुराने लोन प्रीपे करें, खर्च घटाएं, को-अप्लिकेंट जोड़ें और अतिरिक्त आय दिखाएं- इन तरीकों से FOIR कम हो सकता है.
हां, FOIR सभी तरह के लोन जैसे Personal, Home या Auto Loan की Eligibility जांचने में इस्तेमाल होता है.