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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में बढ़ती क्रेडिट की मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा लोन दें. ये कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों व छोटे व्यवसायों को सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
गुरुवार को बेल्लारी में कर्नाटक ग्रामीण बैंक (KAGB) के व्यावसायिक प्रदर्शन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, वित्त मंत्री ने लोन वृद्धि, एनपीए (Non-Performing Assets), Financial Inclusion के तहत प्रदर्शन और सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन सहित कई प्रमुख संकेतकों का मूल्यांकन किया.
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में कृषि गतिविधियों की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए जरूरी कदम उठाएं. विशेष रूप से, KAGB और प्रायोजक बैंक केनरा बैंक को MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और उससे जुड़े क्षेत्रों को लोन वितरण बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के विभागों के साथ मिलकर काम करने को कहा गया.
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी दरों में कमी से खपत में वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए अवसर खुले हैं. उन्होंने ग्रामीण बैंकों से आग्रह किया कि वे अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस अवसर का लाभ उठाएं. इसका मतलब है कि ग्रामीण बैंक अब छोटे कस्बों और गांवों में अधिक लोगों तक पहुंच सकते हैं और उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकते हैं.
केंद्रीय मंत्री ने KAGB और प्रायोजक बैंक को सलाह दी कि वे पंचायत स्तर पर संबंधित समितियों के साथ मिलकर PM-विश्वकर्मा और PMFME (प्रधान मंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज) जैसी सरकारी प्रायोजित योजनाओं के तहत मिले आवेदनों की जांच प्रक्रिया में सुधार करें. ये सुनिश्चित करेगा कि पात्र लोगों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके.
केंद्रीय वित्त मंत्री ने KAGB से आग्रह किया कि वह कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाए और जहां भी बैंकिंग आउटलेट्स की उपलब्धता अपर्याप्त है, वहां नई शाखाएं खोलकर अपनी पहुंच बढ़ाए. उन्होंने KAGB को परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, नई तकनीक अपनाने और ग्राहक सेवा वितरण को मजबूत करके परिचालन दक्षता बढ़ाने की भी सलाह दी. ये बैंक को और अधिक प्रभावी और ग्राहक-केंद्रित बनाएगा.
वित्त मंत्रालय के सचिव, एम. नागराजू ने बताया कि विलय के बाद प्रणालियों और प्रक्रियाओं का एकीकरण पूरा हो गया है. उन्होंने ग्रामीण बैंक की दीर्घकालिक स्थिरता और व्यवहार्यता के लिए KAGB की मध्यम अवधि की व्यावसायिक योजना और प्रायोजक बैंक द्वारा उसकी समीक्षा पर जोर दिया.
नागराजू ने क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण और MSME की संभावनाओं का भी जिक्र किया और KAGB से आग्रह किया कि वह कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में किसानों द्वारा मूल्य सृजन के लिए नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) के साथ साझेदारी करे. ये किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगा.