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11 फरवरी को इस पर वित्तीय संस्थानों, तकनीकी एजेंसियों और नियामक संस्थाओं ने चर्चा कर दिशा तय की. (फोटो: AI जेनरेटेड)
आज तक भारत की पहचान सिर्फ विशाल अर्थव्यवस्था होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी होना रहा है. लेकिन अब एक नई लड़ाई खड़ी की जा रही है, वो है लगभग हर भारतीय को बैंकिंग, पेंशन, बीमा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने की पहल. इसी मकसद से DFS, Ministry of Finance की अगुवाई में Financial Inclusion 2.0 का रोडमैप तैयार किया जा रहा है. 11 फरवरी को इस पर वित्तीय संस्थानों, तकनीकी एजेंसियों और नियामक संस्थाओं ने चर्चा कर दिशा तय की.
Financial Inclusion 2.0 एक विस्तृत वित्तीय समावेशन (financial inclusion) योजना है जो हर नागरिक को बैंकिंग सेवाओं के साथ ही पेंशन, बीमा और डिजिटल भुगतान तक पहुंच देने का लक्ष्य रखती है.
इस बैठक में शामिल हुए:
यानी दूर-दराज के इलाकों से लेकर डिजिटल पेमेंट तक, हर क्षेत्र की आवाज़ शामिल हुई.

1. Banking Access for All
2. विलीजन इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना
3. फॉर्मल क्रेडिट की उपलब्धता
4. बीमा और पेंशन कवरेज
5. डिजिटल फाइनेंशियल साक्षरता


आज के डिजिटल भारत में:
इस नई पहल से न सिर्फ इन सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, बल्कि भरोसेमंद फाइनेंशियल नेटवर्क तैयार होगा, जिसमें धोखाधड़ी और वित्तीय जोखिम कम होंगे.
Financial Inclusion 2.0 भारत को सिर्फ टेक-सक्षम बनाने का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि हर नागरिक को फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ने वाला एक सामाजिक-आर्थिक बदलाव है- रिपोर्ट जल्द आएगी, लेकिन दिशा साफ़ है.
Q1. Financial Inclusion 2.0 क्या है?
A. एक व्यापक योजना है जिससे हर नागरिक बैंकिंग, पेंशन और वित्तीय सेवाएं प्राप्त कर सके.
Q2. इसमें कौन-सी एजेंसियां शामिल हैं?
A. RBI, SEBI, IRDAI, PFRDA, NPCI और कई मंत्रालय.
Q3. इस पहल का लक्ष्य कब तक पूरा होगा?
A. बड़ी कवरेज योजनाएं 2047 तक के लक्ष्य के साथ हैं.
Q4. क्या डिजिटल धोखाधड़ी पर भी काम होगा?
A. हां, financial and digital literacy पर जोर दिया गया.
Q5. बैंक शाखा हर जगह कब तक आएगी?
A. अब रोडमैप तैयार किया जा रहा है- इसके जल्दी क्रियान्वयन की उम्मीद है.