क्या आपका पार्टनर बना सकता है आपको 'डिफॉल्टर'? जॉइंट अकाउंट और गारंटी देने से पहले जान लें क्रेडिट स्कोर के ये जरूरी नियम

क्या शादी के बाद पति-पत्नी का क्रेडिट स्कोर जुड़ जाता है? तो जानिए कब आपके पार्टनर का लोन आपके स्कोर को प्रभावित करता है. को-बॉरोअर, गारंटर या क्रेडिट कार्ड से कैसे बनता है लिंक और किन गलतियों से स्कोर पर पड़ सकता है असर.
क्या आपका पार्टनर बना सकता है आपको 'डिफॉल्टर'? जॉइंट अकाउंट और गारंटी देने से पहले जान लें क्रेडिट स्कोर के ये जरूरी नियम

अक्सर शादी के बाद लोगों को लगता है कि पति-पत्नी का क्रेडिट स्कोर आपस में जुड़ जाता है... लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता.असल में यहां हर व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर अलग-अलग कैलकुलेट किया जाता है. आपके क्रेडिट रिपोर्ट में केवल वही लोन और क्रेडिट कार्ड दिखाई देते हैं, जो आपके नाम पर होते हैं.आपके लाइफपार्टनर का लोन उनके क्रेडिट रिपोर्ट में ही दर्ज होता है, आपके में नहीं.तो इसका मतलब यह है कि अगर आपके पार्टनर ने अपने नाम पर लोन लिया है और उसकी EMI समय पर नहीं चुकाई, तो आमतौर पर आपके क्रेडिट स्कोर पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

सवाल: फिर कब जुड़ जाता है आपका क्रेडिट स्कोर?

स्थिति तब बदलती है, जब आपका नाम भी उस लोन से जुड़ जाता है.

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जब आप दोनों मिलकर लोन लेते हैं...असल में यह अक्सर होम लोन के मामले में होता है बैंक कई बार पति-पत्नी को जॉइंट लोन लेने के लिए कहते हैं ताकि दोनों की इनकम को जोड़कर ज्यादा लोन दिया जा सके.

लेकिन अगर आप को-एप्लिकेंट या को-बॉरोअर बनते हैं, तो वह लोन दोनों के क्रेडिट रिपोर्ट में दिखने लगता है.तो ऐसे में EMI की जिम्मेदारी भी दोनों की होती है. तो फिर टाइम पर EMI भरने से दोनों का क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है. अगर EMI लेट होती है, तो दोनों के स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. बता दें कि क्रेडिट ब्यूरो यह नहीं देखता कि EMI किसने भरनी थी. अगर लोन दोनों के नाम पर है, तो जिम्मेदारी भी शेयर होती है.

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अगर आप गारंटर बनते हैं तो...

कई बार एक पार्टनर अपने नाम पर लोन लेता है और दूसरे को गारंटर बना देता है.

यह अक्सर एक फॉर्मेलिटी जैसा लगता है, खासकर परिवार में.

लेकिन गारंटर बनना सिर्फ औपचारिकता नहीं है.

जब आप गारंटर बनते हैं, तो आप बैंक से यह वादा करते हैं कि अगर लोन लेने वाला व्यक्ति EMI नहीं चुका पाया, तो आप वह पैसा चुकाएंगे.

शुरुआत में यह लोन आपके क्रेडिट रिपोर्ट में साफ तौर पर दिखाई नहीं देता.

लेकिन अगर भुगतान में गड़बड़ी होती है और बैंक आपसे वसूली शुरू करता है, तो इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ सकता है.

इसी कारण से सलाह दी जाती है कि गारंटर बनने से पहले सोच-समझकर फैसला लें.


क्रेडिट कार्ड से भी बन सकता है कनेक्शन

क्रेडिट कार्ड के जरिए भी पति-पत्नी के बीच फाइनेंशियल कनेक्शन बन सकता है.

अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर आपके पार्टनर का एड-ऑन कार्ड बना है, तो उनका खर्च आपके कार्ड के कुल बिल में जुड़ता है.

अगर बिल ज्यादा बढ़ जाता है या समय पर भुगतान नहीं होता.

तो इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है, क्योंकि कार्ड आपके नाम पर है.

बैंक यह नहीं देखता कि कार्ड किसने यूज किया, वह केवल अकाउंट होल्डर को देखता है.

फ्यूचर में जॉइंट लोन लेते टाइम क्या होगा?

मान लें कि लोन पूरी तरह आपके पार्टनर के नाम पर है, फिर भी इसका असर फ्यूचर में पड़ सकता है.

जब आप दोनों साथ में नया लोन लेने जाते हैं, तो बैंक पूरे परिवार की फाइनेंशियल स्थिति को देखता है.

अगर आपके पार्टनर के नाम पर पहले से ज्यादा EMI चल रही है, तो बैंक मान लेता है कि घर की इनकम का एक हिस्सा पहले से खर्च हो रहा है

इससे बैंक आपको कम लोन ऑफर कर सकता है, खासकर होम लोन जैसे मामलों में.

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तो फिर आखिर में क्या समझें?

  • शादी होने से आपका और आपके जीवनसाथी का क्रेडिट स्कोर अपने आप नहीं जुड़ता.
  • आपके पार्टनर का लोन तभी आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करेगा
  • जब आप को-बॉरोअर हों
  • आप गारंटर हों या क्रेडिट कार्ड आपके नाम पर हो

एक बार आपका नाम जुड़ गया, तो जिम्मेदारी भी साझा हो जाती है.

  • समय पर भुगतान = दोनों का स्कोर बेहतर
  • भुगतान में देरी = दोनों का स्कोर खराब

काम की बात

लोन या गारंटी से पहले एक बार जरूर सोचें क्योंकि यह सिर्फ रिश्ते का नहीं, बल्कि आपके फाइनेंशियल फ्यूचर का भी मामला है.साथ ही ध्यान रखें कि कहीं आपके पार्टनर की गलती के कारण आपको सिबिल स्कोर खराब ना हो जाए.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)


5 FAQs

1. क्या शादी के बाद क्रेडिट स्कोर जुड़ जाता है?
नहीं, भारत में पति-पत्नी का क्रेडिट स्कोर अलग-अलग ही रहता है

2. पार्टनर का लोन कब आपके स्कोर को प्रभावित करता है?
जब आप को-बॉरोअर, गारंटर या जॉइंट अकाउंट होल्डर होते हैं

3. क्या गारंटर बनने से जोखिम होता है?
हां, अगर उधार लेने वाला EMI नहीं चुकाता, तो असर आपके स्कोर पर भी पड़ सकता है

4. क्या एड-ऑन क्रेडिट कार्ड से असर पड़ता है?
हां, खर्च और भुगतान आपके नाम से जुड़ते हैं, जिससे स्कोर प्रभावित हो सकता है

5. जॉइंट लोन लेने पर क्या होता है?
दोनों की जिम्मेदारी होती है, समय पर भुगतान से स्कोर सुधरता है, देरी से खराब होता है


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