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अक्सर लोग लोन लेते वक्त सिर्फ ब्याज दर (Interest Rate) और किस्त की रकम देखते हैं. हालांकि, कुछ ऐसे भी लोन होते हैं, जिनकी ब्याज दरों पर जीएसटी (GST) भी लगता है. इनके बारे में पता तब चलता है जब स्टेटमेंट में ब्याज दर पर जीएसटी लगा दिखता है. ऐसे में अधिकतर लोग इसी कनफ्यूजन में रहते हैं कि आखिर ब्याज दर पर जीएसटी लगता है या नहीं. आइए समझते हैं.
पर्सनल लोन हो या होम लोन, इनके ब्याज पर जीएसटी नहीं लगता. लेकिन जब बात क्रेडिट कार्ड ईएमआई की आती है तो ब्याज पर भी टैक्स देना पड़ता है. इस पर जीएसटी की दर 18 फीसदी होती है. यही फर्क लोगों की जेब पर सीधा असर डालता है.
सरकार ने ज्यादातर लोन कैटेगरी में ब्याज को टैक्स फ्री रखा है, ताकि लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े. लेकिन ईएमआई प्रोसेसिंग फीस और फोरक्लोजर चार्ज जैसी सर्विसेज पर जीएसटी देना ही पड़ता है. यही कारण है कि लोग लोन लेने से पहले अब सिर्फ ब्याज नहीं, बल्कि टैक्स के असर की भी गिनती करने लगे हैं.
पर्सनल लोन और होम लोन सबसे ज्यादा लिए जाने वाले लोन हैं. अच्छी बात ये है कि इन दोनों लोन के ब्याज पर जीएसटी नहीं लगता. इससे लाखों लोगों को राहत मिलती है, क्योंकि लोन की ईएमआई वैसे ही बड़ी होती है. अगर ब्याज पर टैक्स लग जाता तो किस्त और ज्यादा बढ़ जाती.
क्रेडिट कार्ड पर जब आप कोई महंगी चीज खरीदते हैं और उसे ईएमआई में बदलते हैं, तो बैंक उस पर ब्याज लेता है. इस ब्याज पर जीएसटी भी जोड़ दिया जाता है. यानी यहां आपको डबल खर्च उठाना पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ईएमआई एक सुविधा की तरह देखी जाती है, इसलिए इसके ब्याज पर जीएसटी लगता है.
अगर 10,000 रुपये की खरीद पर 12% ब्याज है तो वास्तविक ब्याज 1,200 रुपये बनता है. इस 1,200 रुपये पर 18% जीएसटी यानी 216 रुपये लगने के बाद कुल ईएमआई 1,416 रुपये हो जाती है. यानी क्रेडिट कार्ड ईएमआई हमेशा महंगी पड़ती है, क्योंकि इसमें ब्याज पर टैक्स भी जुड़ जाता है.
कोई भी लोन लेते वक्त बैंकों की तरफ से प्रोसेसिंग फीस ली जाती है. इस फीस पर हमेशा जीएसटी देना पड़ता है. इसी तरह अगर आप बीच में लोन बंद करना चाहते हैं (Foreclosure), तो बैंक कुछ चार्ज लगाता है और उस चार्ज पर भी जीएसटी देना होता है.
अगर लोन पर 10,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस है तो उस पर 18% जीएसटी यानी 1,800 रुपये और जुड़ जाते हैं. इसी तरह अगर 20,000 रुपये का फोरक्लोजर चार्ज है तो उस पर 3,600 रुपये टैक्स लगेगा. यानी असली खर्च समझने के लिए ब्याज और चार्जेज के साथ-साथ टैक्स की भी गिनती करनी चाहिए.
लोगों को लगता है कि लोन पर जीएसटी नहीं लगता. ये बात आंशिक रूप से सही है. ब्याज पर टैक्स नहीं है, लेकिन बाकी चार्जेज और क्रेडिट कार्ड ईएमआई पर लगने वाले ब्याज पर टैक्स अनिवार्य है. इस वजह से कई बार ग्राहक को बैंक से स्टेटमेंट मिलने पर झटका लगता है, क्योंकि उसे उम्मीद से ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है. ग्राहकों को लोन लेते वक्त ये बात क्लियर कर लेनी चाहिए कि किस हिस्से पर जीएसटी लगेगा और कितना. इससे बाद में विवाद नहीं होगा और ग्राहक अपना बजट बेहतर तरीके से प्लान कर सकेगा.
लोन लेना आज की जरूरत है, लेकिन उससे जुड़े हर खर्च को समझना जरूरी है. पर्सनल लोन और होम लोन के ब्याज पर जीएसटी न होना राहत की बात है, लेकिन क्रेडिट कार्ड ईएमआई के ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और फोरक्लोजर चार्ज पर टैक्स का असर आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. इसलिए लोन लेने से पहले इन बातों का पूरा हिसाब लगाना ही समझदारी है.
नहीं, सिर्फ प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज और क्रेडिट कार्ड से ईएमआई बनवाने में ब्याज पर.
नहीं, यह टैक्स से मुक्त है.
नहीं, इस पर कोई जीएसटी नहीं है.
क्योंकि इसमें ब्याज को सर्विस माना जाता है, जिस पर जीएसटी लगता है.
आमतौर पर 18% जीएसटी लगता है.
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