DFS सचिव ने बैंकों के साथ की हाई-लेवल मीटिंग, बोले- 'तारीख पर तारीख' कल्चर से बाहर निकलें, कर्ज वसूली का 'एक्शन प्लान' तैयार!

वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में बैंकों द्वारा फंसे हुए कर्ज (NPA) की वसूली और समाधान प्रक्रिया में हुई प्रगति की सराहना की गई. 20 बड़े खातों के सफल समाधान के बाद, अब बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे समयबद्ध समाधान और अधिकतम वसूली के लिए 'कोलाबोरेटिव अप्रोच' अपनाएं.
DFS सचिव ने बैंकों के साथ की हाई-लेवल मीटिंग, बोले- 'तारीख पर तारीख' कल्चर से बाहर निकलें, कर्ज वसूली का 'एक्शन प्लान' तैयार!

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में फंसे हुए कर्ज (NPA) की वसूली को लेकर सरकार अब और भी सख्त और सक्रिय हो गई है. वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के साथ एक अहम बैठक की, जिसका मुख्य केंद्र IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) की प्रक्रिया को तेज करना था. आइए, इस बैठक के मुख्य बिंदुओं और बैंकों को दिए गए कड़े निर्देशों को समझते हैं.

बड़ी सफलता: 20 उच्च मूल्य खातों का समाधान

बैठक की शुरुआत सकारात्मक खबर के साथ हुई. सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों से 20 हाई-वैल्यू (बड़े कर्ज) वाले खातों का सफल समाधान NCLT (National Company Law Tribunal) के माध्यम से कर लिया गया है.

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सराहना: इस साल स्वीकृत (Admitted) और समाधान किए गए मामलों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया.

रणनीति: 20 प्रमुख खाते जो एडमिशन के लिए लंबित हैं और 10 खाते जो समाधान (Resolution) के लिए अटके हैं, उनकी बारीकी से समीक्षा की गई.

बैंकों के लिए सहयोग वाला नजरिया

सचिव ने बैंकों को सलाह दी कि वह आपस में मिल-जुलकर काम करें. इससे ये फायदे होंगे.

वैल्यू मैक्सिमाइजेशन: अटकी हुई संपत्तियों का ज्यादा से ज्यादा मूल्य (Value) प्राप्त किया जा सके.

बेहतर वसूली: रिकवरी के आंकड़ों को और बेहतर बनाया जा सके.

समय की बचत: समाधान की प्रक्रिया एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी हो.

'तारीख पर तारीख' वाले कल्चर पर लगाम

अदालती प्रक्रियाओं में होने वाली देरी अक्सर वसूली की राह में रोड़ा बनती है. इसे लेकर बैठक में सख्त निर्देश दिए गए:

स्थगन (Adjournments) में कमी: बैंकों से कहा गया है कि वे कोर्ट में बार-बार तारीख लेने की प्रवृत्ति को कम करें.

दाखिल करने में तेजी: CIRP (कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया) के लिए आवेदन देने में होने वाली देरी को न्यूनतम किया जाए.

CEOs को मिली बड़ी जिम्मेदारी

अब बड़े मामलों की फाइलें केवल निचले अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेंगी.

नियमित निगरानी: सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के CEOs को सलाह दी गई है कि वे लंबित प्रमुख मामलों की नियमित रूप से खुद निगरानी (Monitoring) करें.

अक्षमताओं को दूर करना: प्रक्रिया में जो भी कमियां या सुस्ती है, उसे तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बैंक का पैसा जल्द से जल्द वापस आ सके.

Conclusion

DFS सचिव की इस समीक्षा बैठक का संदेश साफ है- बैंकों को अपनी वसूली प्रक्रिया में अधिक पेशेवर और आक्रामक होना होगा. लंबित मामलों का शीघ्र समाधान न केवल बैंकों की बैलेंस शीट को मजबूत करेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में धन के प्रवाह को भी सुगम बनाएगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- IBC का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त कंपनियों का समयबद्ध समाधान करना और बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज की अधिकतम वसूली सुनिश्चित करना है.

2- बैठक में '20 खातों' का क्या जिक्र हुआ?

20 ऐसे बड़े कर्ज वाले खातों का सफल निपटारा किया गया है जो काफी समय से कानूनी प्रक्रिया में फंसे हुए थे.

3- बैंकों को 'Adjournments' कम करने के लिए क्यों कहा गया?

अदालत में बार-बार तारीख लेने से समाधान की प्रक्रिया लंबी हो जाती है और संपत्ति की कीमत घटने लगती है, जिससे रिकवरी कम होती है.

4- CIRP आवेदन क्या है?

यह वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी डिफॉल्टर कंपनी के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की जाती है.

5- क्या इस मीटिंग से आम जमाकर्ताओं को फायदा होगा?

हां, बैंकों की वसूली बेहतर होने से उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होती है, जिसका सीधा लाभ ब्याज दरों और सुरक्षा के रूप में जमाकर्ताओं को मिलता है.

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