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हम में से बहुत से लोग EMI और तमाम तरह के कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं. होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बिल- इन सबकी मासिक किस्तें देते-देते ही हमारी आधी सैलरी खर्च हो जाती है. ऐसा लगता है कि हम एक अंतहीन साइकिल में फंसे हुए हैं, जहां एक EMI खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है. अगर आप भी इस सिचुएशन से परेशान हैं और जल्द से जल्द कर्ज से आज़ादी पाना चाहते हैं, तो 'Avalanche Method' आपके लिए एक 'जादुई तरीका' साबित हो सकता है. ये एक ऐसी स्मार्ट स्ट्रैटेजी है जो आपको साइंटिफिक तरीके से कर्जों को खत्म करने में मदद करती है. आइए, जानते हैं ये मेथड कैसे काम करता है और कैसे इसे अपनाकर आप धीरे-धीरे अपनी सारी देनदारी खत्म कर सकते हैं.
Avalanche Method एक Debt Repayment स्ट्रैटेजी है. इसे Debt Avalanche भी कहा जाता है. इसमें आप अपने सभी कर्जों को उनकी ब्याज दरों के हिसाब से सबसे ज़्यादा से सबसे कम तक अरेंज करते हैं. इसके बाद, आप सभी कर्जों की मिनिमम पेमेंट करते रहते हैं, लेकिन जो भी एक्स्ट्रा पैसा आपके पास आता है, उसे आप उस कर्ज पर लगाते हैं जिसकी ब्याज दर सबसे ज़्यादा है. जब सबसे ज़्यादा ब्याज वाला कर्ज पूरी तरह चुक जाता है, तो आप उस पैसे को (जो अब आप उस कर्ज पर नहीं चुका रहे हैं) अगले सबसे ज़्यादा ब्याज वाले कर्ज पर लगाना शुरू कर देते हैं. ये प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक आपके सभी कर्ज खत्म न हो जाएं.
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ये मेथड फाइनेंशियल रूप से सबसे लॉजिकल तरीका है कर्ज चुकाने का क्योंकि ये आपको सबसे पहले उन कर्जों से छुटकारा दिलाता है जो आपके ऊपर सबसे ज़्यादा ब्याज का बोझ डाल रहे हैं. इससे आप ओवरऑल इंटरेस्ट पेमेंट में काफी बचत करते हैं और आपका कर्ज बहुत तेज़ी से कम होता है.
ये रहे कुछ स्टेप्स जिन्हें फॉलो करके आप इस मेथड को अपनी लाइफ में अप्लाई कर सकते हैं:
अपने सभी कर्जों (जैसे क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, कार लोन, होम लोन) की एक डीटेल्ड लिस्ट बनाएं. इसमें हर कर्ज का अमाउंट, ब्याज दर (इंटरेस्ट रेट) और मिनिमम मंथली पेमेंट नोट करें.
अब, अपनी लिस्ट को ब्याज दरों के हिसाब से हाईएस्ट से लोएस्ट तक सॉर्ट करें. जिस कर्ज की ब्याज दर सबसे ज़्यादा है, वो लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए.
हर महीने, अपने सभी कर्जों की मिनिमम मंथली पेमेंट करते रहें. ये बहुत ज़रूरी है ताकि आप किसी भी कर्ज पर डिफॉल्ट न करें और पेनल्टी से बचें.
अपने बजट को रिव्यू करें और देखें कि आप हर महीने कितना एक्स्ट्रा पैसा बचा सकते हैं. जो भी एक्स्ट्रा पैसा आप बचाते हैं, उसे अपने लिस्ट में सबसे ऊपर वाले कर्ज पर (जिसकी ब्याज दर सबसे ज़्यादा है) उसकी मिनिमम पेमेंट के अलावा एक्स्ट्रा पेमेंट के तौर पर लगाएं.
जब सबसे ज़्यादा ब्याज वाला कर्ज पूरी तरह चुक जाता है, तो उस कर्ज की मिनिमम पेमेंट (जो अब आपको नहीं करनी पड़ेगी) और जो एक्स्ट्रा पैसा आप पहले लगा रहे थे, उन दोनों को मिलाकर अगले सबसे ज़्यादा ब्याज वाले कर्ज पर लगाना शुरू कर दें. ये तब तक करते रहें जब तक आपके सभी कर्ज खत्म न हो जाएं.
मान लीजिए आपके पास तीन कर्ज हैं:
आप हर महीने ₹1,000 एक्स्ट्रा बचा सकते हैं.
अरेंजमेंट: सबसे ज़्यादा ब्याज दर क्रेडिट कार्ड (24%), फिर पर्सनल लोन (15%), और फिर कार लोन (10%).
महीना 1:
आप इस तरह क्रेडिट कार्ड को तेज़ी से चुकाते जाएंगे. मान लीजिए क्रेडिट कार्ड 6 महीने में खत्म हो जाता है.
महीना 7 (जब क्रेडिट कार्ड बिल को चुका दिया गया)
अब आप क्रेडिट कार्ड की ₹2,000 की मिनिमम पेमेंट नहीं कर रहे हैं.
इस तरह, जब पर्सनल लोन भी खत्म हो जाएगा, तो उसकी मिनिमम पेमेंट और एक्स्ट्रा अमाउंट को मिलाकर कार लोन पर लगाया जाएगा.
इस तरीके से, आप ब्याज में बहुत ज़्यादा बचत करेंगे और आपका कर्ज तेज़ी से खत्म होगा.
एडवांच मेथड के अलावा एक और पॉपुलर डेट रिपेमेंट स्ट्रैटेजी है 'Debt Snowball Method'. इसमें आप सबसे छोटे कर्ज को पहले चुकाते हैं, फिर अगले सबसे छोटे कर्ज को. ये मेथड साइकोलॉजिकल रूप से मोटिवेटिंग होता है क्योंकि आपको जल्दी-जल्दी कर्जे खत्म होते दिखते हैं.
अगर आप सेल्फ-डिसिप्लिन हैं और नंबरों पर फोकस करते हैं, तो Avalanche Method आपके लिए बेस्ट है. अगर आपको मोटिवेशन की ज़रूरत है, तो Debt Snowball Method भी अच्छा विकल्प हो सकता है.
हां, ये पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, ऑटो लोन, एजुकेशन लोन आदि पर लागू हो सकता है, बशर्ते आप उनकी ब्याज दर और न्यूनतम भुगतान जानें.
आप हर महीने Extra राशि अस्थिर हो सकती है] उस हिसाब से जितना दे सकते हों उतना डालें. कम-से-कम न्यूनतम ईएमआई ज़रूर चुकाएं और जब Extra राशि मिले, उसे ज्यादा ब्याज वाले कर्ज़ पर लगाएं.
बिल्कुल. आप कुछ महीने Snowball (छोटे कर्ज़ आख़िर) से शुरुआत कर सकते हैं ताकि मनोबल बढ़े और फिर Avalanche पर स्विच कर सकते हैं.
आमतौर पर नहीं. आप सबसे बड़े या उच्च ब्याज वाले कर्ज़ को पहले निपटाएंगे, इसलिए शुरुआती “छोटी जीत” देर से मिल सकती है.
शुरू में थोड़ा संयम चाहिए. यदि आप अनुशासित रहें और योजना के अनुसार पेश जाएं, तो यह चुनौती नहीं बल्कि समाधान बन जाएगा.