भारत का चालू खाता घाटा हुआ कम, लेकिन विदेशी फंडों की निकासी बढ़ी, जानिए अभी क्या है पूरी तस्वीर

भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर 12.3 अरब डॉलर रह गया है, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है. माल व्यापार घाटा थोड़ा घटा है, जबकि सेवाओं और रेमिटेंस से आय में बढ़त देखने को मिली है. आरबीआई के ताजा डेटा से पता चलता है कि एफडीआई में सुधार हुआ है, लेकिन एफपीआई ने भारी निकासी की है.
भारत का चालू खाता घाटा हुआ कम, लेकिन विदेशी फंडों की निकासी बढ़ी, जानिए अभी क्या है पूरी तस्वीर

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) एक बेहद अहम संकेतक माना जाता है. ताजा रिपोर्ट में आरबीआई (RBI Data) ने बताया है कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर अवधि में देश का चालू खाता घाटा घटकर 12.3 अरब डॉलर या जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर आ गया है. यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 20.8 अरब डॉलर या जीडीपी का 2.2 प्रतिशत था. यानी इस बार घाटे में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है.

इस गिरावट की वजहें कई हैं- माल व्यापार घाटा (Goods Trade Deficit) थोड़ा कम होना, सेवाओं की कमाई (Services Export) बढ़ना और विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की तरफ से भेजे जाने वाले रेमिटेंस (Remittances) में बढ़त शामिल है. हालांकि, कुछ मोर्चों पर चिंता भी बढ़ी है, जैसे कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI Outflow) की भारी निकासी और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में आई गिरावट.

भारत का चालू खाता घाटा कितना घटा?

आरबीआई के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2025 में भारत का चालू खाता घाटा 12.3 अरब डॉलर रहा. यह जीडीपी का मात्र 1.3 प्रतिशत है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.2 प्रतिशत था. यह भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

माल व्यापार घाटा: मामूली कमी, लेकिन अभी भी ऊंचा स्तर

वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में माल व्यापार घाटा 87.4 अरब डॉलर रहा. पिछले साल यह 88.5 अरब डॉलर था. यानी ग्लोबल सप्लाई चेन और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने इस मोर्चे पर हल्का सुधार किया है.

सेवाओं से आय में जबरदस्त उछाल

सेवाओं का शुद्ध प्राप्ति आंकड़ा बढ़कर 50.9 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल यही आंकड़ा 44.5 अरब डॉलर था. सबसे बड़ी भूमिका कंप्यूटर सेवाओं (IT Services Export) और अन्य बिजनेस सेवाओं ने निभाई है.

रेमिटेंस में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

द्वितीयक आय खातों के तहत विदेश से भेजा गया पैसा (Personal Transfers) बढ़कर 38.2 अरब डॉलर हो गया है. पिछले साल इसी अवधि में यह 34.4 अरब डॉलर था. यह NRIs के मजबूत समर्थन को दर्शाता है.

एफडीआई में सुधार, सालभर में बड़ा बदलाव

जुलाई-सितंबर तिमाही में एफडीआई बढ़कर 2.9 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल की इसी अवधि में एफडीआई का आंकड़ा -2.8 अरब डॉलर था, यानी उस समय आउटफ्लो अधिक था.

एफपीआई की भारी निकासी: बड़ा खतरा

इस तिमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 5.7 अरब डॉलर की निकासी की. एक साल पहले यही आंकड़ा 9.9 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश था. यह भारत के स्टॉक मार्केट और बॉन्ड मार्केट के लिए चिंता का संकेत है.

एनआरआई जमा में तेज गिरावट

एनआरआई जमा में शुद्ध प्रवाह 2.5 अरब डॉलर रहा. पिछले साल इस तिमाही में यह 6.2 अरब डॉलर था. यानी इस मोर्चे पर निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर हुआ है.

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट- 10.9 अरब डॉलर की कमी

तिमाही के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में 10.9 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. पिछले साल इसी अवधि में भंडार में 18.6 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी.

अहम आंकड़ों की टेबल

आर्थिक संकेतकजुलाई-सितंबर FY26जुलाई-सितंबर FY25
चालू खाता घाटा12.3 अरब डॉलर20.8 अरब डॉलर
माल व्यापार घाटा87.4 अरब डॉलर88.5 अरब डॉलर
सेवाओं से शुद्ध आय50.9 अरब डॉलर44.5 अरब डॉलर
रेमिटेंस38.2 अरब डॉलर34.4 अरब डॉलर
एफडीआई2.9 अरब डॉलर-2.8 अरब डॉलर
एफपीआई-5.7 अरब डॉलर+9.9 अरब डॉलर
एनआरआई जमा2.5 अरब डॉलर6.2 अरब डॉलर
फॉरेक्स रिजर्व-10.9 अरब डॉलर+18.6 अरब डॉलर

Conclusion

भारत का चालू खाता घाटा कम होना अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है. सेवाओं की कमाई और रेमिटेंस जैसे सेक्टर मजबूत बने हुए हैं. लेकिन एफपीआई निकासी और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी भविष्य में चुनौतियां पैदा कर सकती हैं. आने वाले महीनों में ग्लोबल मार्केट, तेल की कीमतें और फेड की नीतियां भारत के बाहरी बैलेंस को प्रभावित करेंगी.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- चालू खाता घाटा क्या होता है?

यह देश के विदेशी लेनदेन का बैलेंस होता है, जिसमें ट्रेड, सेवाएं और रेमिटेंस शामिल हैं.

2- CAD बढ़ने का क्या असर होता है?

यह विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल सकता है.

3- FDI और FPI में क्या अंतर है?

FDI लंबी अवधि का निवेश है, FPI तेज हॉट मनी फ्लो होता है.

4- रेमिटेंस किसे कहते हैं?

विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की तरफ से भेजी गई रकम.

5- फॉरेक्स रिजर्व क्यों जरूरी है?

यह मुद्रा स्थिर रखने और इंपोर्ट बिल भरने में मदद करता है.

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