“Credit Card बुरा नहीं है” लेकिन एक गलती और धीरे-धीरे प्रेशर कूकर बन जाती है लाइफ, Sanjay Kathuria ने समझाया खेल

क्रेडिट कार्ड का 'Swipe' जितना आसान है, उसका ब्याज उतना ही भारी... संजय कथूरिया ने बताया कि कैसे 'Minimum Due' के चक्कर में लोग कर्ज के जाल में फंस जाते हैं. कार्ड को 'Extra Income' समझने की गलती न करें. तो अपनी फाइनेंशियल हेल्थ बचाने के लिए क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल के ये 4 गोल्डन रूल्स जरूर जानें.
“Credit Card बुरा नहीं है” लेकिन एक गलती और धीरे-धीरे प्रेशर कूकर बन जाती है लाइफ, Sanjay Kathuria ने समझाया खेल

 Credit Card आज सिर्फ पेमेंट का तरीका नहीं रहा, कई लोगों के लिए यह लाइफस्टाइल है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt) 

Swipe करते वक्त जो खुशी मिलती है... वही बाद में सबसे बड़ा तनाव बन सकती है. Credit Card आज सिर्फ पेमेंट का तरीका नहीं रहा. कई लोगों के लिए यह लाइफस्टाइल है. Shopping करनी हो, फ्लाइट बुक करनी हो, रेस्त्रां बिल देना हो या cashback कमाना हो- हर जगह Credit Card सबसे आगे दिखता है.

लेकिन असली कहानी Bill generate होने के बाद शुरू होती है.

क्योंकि बहुत से लोग Credit Card को “extra income” समझ बैठते हैं. यहीं से शुरू होता है वो चक्र, जिसमें salary आने से पहले EMI, minimum due और outstanding amount आपका इंतजार कर रहे होते हैं.

ज़ी बिज़नेस के Podcast शो ‘Bucks Talk’ में Finance Content Creator Sanjay Kathuria ने Credit Card की उसी दुनिया का सच आसान भाषा में समझाया. उन्होंने बताया कि Credit Card खराब चीज नहीं है, लेकिन अगर spending पर control नहीं है तो यही छोटा सा कार्ड आपकी फाइनेंशियल लाइफ को धीरे-धीरे pressure cooker बना सकता है.

“Credit Card आपको अमीर नहीं बनाता… बस future की salary आज खर्च करवा देता है”

Podcast में Sanjay Kathuria ने एक बेहद दिलचस्प comparison दिया.

उन्होंने कहा- अगर कोई आपसे ₹26,100 लेकर कहे कि 20 साल बाद ₹2 करोड़ देगा, तो deal शानदार लगेगी. क्योंकि कम्पाउंडिंग का जादू हर कोई समझता है.

लेकिन Credit Card उसी compounding को आपके खिलाफ इस्तेमाल करता है.

भारत में इस समय करोड़ों लोग Credit Card इस्तेमाल कर रहे हैं और औसतन हर card holder पर हजारों रुपये का outstanding है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लोगों को monthly interest छोटा लगता है, लेकिन वही सालभर में 40% से ज्यादा तक पहुंच सकता है.

यानी:

Credit Card का असली खेल swipe में नहीं, interest में छिपा होता है.

सबसे खतरनाक शब्द: “Minimum Due”

Credit Card statement में एक लाइन बहुत innocent दिखती है:

Minimum Due

यही वो trap है जिसमें सबसे ज्यादा लोग फंसते हैं.

कई लोगों को लगता है:

  • Minimum Due भर दिया
  • मतलब payment हो गया
  • अब कोई दिक्कत नहीं

लेकिन असल में:

बैंक आपका loan जिंदा रखता है… और interest बढ़ता रहता है.

Sanjay Kathuria ने बताया कि कई युवा नौकरी शुरू करते ही Credit Card लेते हैं. शुरुआत में:

  • shopping
  • gadgets
  • खाने-पीने
  • travel

पर खर्च बढ़ता है. फिर पूरा bill भरने की बजाय minimum due भरना शुरू हो जाता है. धीरे-धीरे outstanding amount snowball की तरह बढ़ने लगता है.

और सबसे खतरनाक बात?

कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे कब debt cycle में चले गए. “Credit Card कंपनियां झूठ नहीं बोलतीं… लेकिन पूरी सच्चाई भी नहीं बतातीं”. Podcast की यह लाइन शायद सबसे ज्यादा relatable लगी.

असल में:

  • charges लिखे होते हैं
  • interest लिखा होता है
  • penalties mention होती हैं

लेकिन:

  • लोग fine print नहीं पढ़ते
  • compound interest नहीं समझते
  • reward points देखकर excite हो जाते हैं

यानी Credit Card की दुनिया psychology पर भी चलती है.

आपको लगता है:

“अभी swipe कर लेते हैं… बाद में देखेंगे.”

और यही “बाद में” कई बार financial stress बन जाता है.

तो क्या Credit Card रखना ही गलत है?

बिल्कुल नहीं.

Sanjay Kathuria ने साफ कहा- अगर आप disciplined spender हैं, तो Credit Card शानदार financial tool है.

क्यों?

क्योंकि इससे:

  • cashback मिलता है
  • reward points मिलते हैं
  • ट्रैवल बेनेफिट्स मिलते हैं
  • इमरजेंसी में liquidity मिलती है
  • क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत होती है

लेकिन फर्क सिर्फ एक चीज से पड़ता है: क्या आप कार्ड चला रहे हैं… या कार्ड आपको चला रहा है?

Credit Card इस्तेमाल के सबसे जरूरी Rules

Rule 1: Credit Limit पूरी आपकी नहीं होती

अगर बैंक ने ₹2 लाख की लिमिट दी है, तो इसका मतलब यह नहीं कि ₹2 लाख खर्च करने हैं.

Sanjay Kathuria के मुताबिक, कोशिश करें कि utilization 30% के आसपास रहे. यानी ₹1 लाख limit है तो ₹30 हजार के अंदर खर्च बेहतर माना जाता है.

Rule 2: “पूरा bill भरना” ही असली game changer है

Credit Card safely इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा secret यही है. Minimum Due नहीं… Full Payment. जिस दिन आपने पूरा बिल भरना बंद किया, उसी दिन से interest का meter तेज चलना शुरू हो जाता है.

Rule 3: EMI हर बार समझदारी नहीं होती

आजकल हर shopping के नीचे लिखा होता है: “Easy EMI Available”. यहीं लोग फंस जाते हैं.

कई बार:

processing fee
GST
hidden charges

मिलाकर EMI उतनी “easy” नहीं रहती जितनी दिखती है.

Rule 4: Zero Cost EMI भी हमेशा zero नहीं होती

उन्होंने कहा कि जरूरत हो तभी इस्तेमाल करें. क्योंकि कई बार डिस्काउंट हट जाता है. प्रोसेसिंग फीस जुड़ जाती है, कैशबैक नहीं मिलता और effective cost बढ़ जाती है.

कितने Credit Card रखने चाहिए?

यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है. लेकिन Sanjay Kathuria का जवाब interesting था: “Cards कितने हैं, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि खर्च कितना है.”

यानी: 1 card हो या 4, फर्क spending habit से पड़ता है.

उन्होंने सलाह दी, कुल Credit Card खर्च आपकी monthly income के 25-30% से ऊपर नहीं जाना चाहिए.

Buy Now Pay Later पर सबसे बड़ी सलाह

आजकल:

Buy Now Pay Later
Pay Later Apps
Instant EMI

बहुत तेजी से बढ़े हैं.

लेकिन Sanjay Kathuria ने साफ कहा- “अगर cash में खरीद सकते हैं, तो पहले cash को प्राथमिकता दें.” क्योंकि आसान EMI कई बार future income को पहले ही खर्च करवा देती है.

असली सवाल: Credit Card सुविधा है या जाल?

जवाब बहुत सीधा है. अगर खर्च कंट्रोल में है, पेमेंट टाइम पर है, पूरा बिल भरते हैं तो Credit Card शानदार टूल है. लेकिन अगर, impulse शॉपिंग की आदत है, मिनिमम ड्यू और लगातार EMI शुरू हो जाए, तो यही कार्ड धीरे-धीरे financial pressure बन सकता है.

आखिर में काम की बात

Credit Card का असली खतरा प्लास्टिक कार्ड में नहीं, बल्कि उस माइंडसेट में है जिसमें लोग उसे “extra पैसा” समझने लगते हैं. Sanjay Kathuria की सबसे बड़ी बात शायद यही थी. “Credit Card को सुविधा की तरह इस्तेमाल करें, इनकम की तरह नहीं.” क्योंकि Swipe करना आसान है, लेकिन interest से निकलना हमेशा आसान नहीं होता.

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