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भारत में क्रेडिट कार्ड का यूज अब तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बहुत से उपयोगकर्ताओं को यह नहीं पता है कि केवल "मिनिमम ड्यू अमाउंट" (न्यूनतम देय राशि) का पेमेंट करने से उनका क्रेडिट स्कोर निगेटिव रूप से प्रभावित हो सकता है. आपकी यह आदत लंबे समय में वित्तीय समस्याएं खड़ी कर सकती है.
पहले ये जानना जरूरी है कि मिनिमम ड्यू भुगतान है क्या. तो बता दें कि क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता बैंक उपयोगकर्ताओं को हर मंथ बकाया राशि का एक छोटा हिस्सा (आमतौर पर 5% या फिर एक निर्धारित न्यूनतम रकम) चुकाने का ऑप्शन देते हैं. हालांकि, बाकी बकाया राशि पर ब्याज लगता रहता है, जो 3%-4% प्रति माह (लगभग 36%-48% सालाना) तक हो सकता है.
अगर आप लगातार मिनिमम ड्यू का भुगतान करते रहते हैं, तो आपका बकाया बैलेंस बढ़ता रहता है.तो फिर इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (कुल क्रेडिट लिमिट का कितना हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं) बढ़ जाता है, जो क्रेडिट स्कोर के 30% हिस्से को प्रभावित कर सकता है.असल में आदर्श CUR 30% से कम माना जाता है.
नियमित रूप से पूरी बकाया राशि ना चुकाने से बैंक आपको "रिवॉल्विंग क्रेडिट यूजर" मान सकता है, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर थोड़ा गिर सकता है.
लगातार मिनिमम ड्यू पेमेंट करने से ब्याज की मात्रा बढ़ जाती है और कुल कर्ज जमा होता रहता है.तो अगर आपकी क्रेडिट लिमिट पूरी तरह भर जाती है, तो यह भी आपके स्कोर को गिरा सकता है.
आप पूरी बकाया राशि चुकाएं (हर महीने) ताकि ब्याज न लगे और CUR नियंत्रित रहे.इसके अलावा अगर पूरी राशि नहीं चुका सकते, तो मिनिमम ड्यू से अधिक भुगतान करें. साथ ही EMI कन्वर्जन का विकल्प ले सकते हैं, जहां ब्याज दर कम होती है.
एक बात हमेशा याद रखें कि क्रेडिट कार्ड का सही उपयोग करें और मिनिमम ड्यू पर निर्भरता कम करें. क्योंकि इससे न केवल आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर रहेगा, बल्कि आप वित्तीय समस्याओं से भी बचे रहेंगे.(नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)