डिनर क्लब से UPI तक, क्रेडिट कार्ड ने कैसे बदली भारत की तस्वीर? 45 साल के सफर में कैसे बना खरीदारी का 'बादशाह'!

भारत में क्रेडिट कार्ड का सफर 1980 के ‘डिनर्स क्लब’ से शुरू होकर आज 2025 में UPI तक पहुंच चुका है. जानिए कैसे पिछले 45 सालों में कार्ड सिस्टम ने पेमेंट की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया.
डिनर क्लब से UPI तक, क्रेडिट कार्ड ने कैसे बदली भारत की तस्वीर? 45 साल के सफर में कैसे बना खरीदारी का 'बादशाह'!

जेब में क्रेडिट कार्ड होने पर अक्सर लोगों को खर्चों की चिंता ना के बराबर हो जाती है, क्योंकि इसमें पेमेंट एक फिक्स डेट को करना होता है. भारत में एक लंबे समय से यूजर्स क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं और बीते 45 सालों में इसकी तस्वीर भी काफी हद तक बदल चुकी है.जी हां 1980 में पहली बाद क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए पेश किया गया था.

कौन सा था पहला क्रेडिट कार्ट

1980 में जब देश में पहला क्रेडिट कार्ड ‘डिनर्स क्लब’ के नाम से आया था, तब इसे अमीर वर्ग की सुविधा माना जाता था. लेकिन आज 2025 के आते आते इसकी स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब करीब 11 करोड़ एक्टिव क्रेडिट कार्ड धारक हैं और यह हर तबके के लोगों की जरूरत बन चुका है. जी हां टेक्नोलॉजी ने इस सिस्टम को अब पूरी तरह बदल दिया है- अब कार्ड्स UPI से लिंक होकर पेमेंट को और आसान बना रहे हैं. आने वाले समय में वर्चुअल और AI-सक्षम क्रेडिट कार्ड्स पेमेंट की दुनिया में और क्रांति ला सकते हैं. तो चलिए जानेंगे 1980 से अब तक क्रेडिट कार्ड कितना बदल चुका है.

1980 का भारत: पहला क्रेडिट कार्ड

आपको बता दें कि 1980 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पहला क्रेडिट कार्ड जारी किया था.इस समय क्रेडिट कार्ड पहले सिर्फ बड़े शहरों में था. फिर 1990 तक 2 लाख कार्ड्स, लेकिन सिक्योरिटी कम, फ्रॉड ज्यादा.

1990 का दशक: नेटवर्क का विस्तार

फिर 1990 में इसका रूप बदला और वीजा और मास्टरकार्ड भारत आए.जबकि 1994 में पहला ऑनलाइन पेमेंट ग्राहकों के लिए पेश किया गया था. इसके अलावा 1997 में पहली बार CVV कोड को जोड़ा गया था ,अब कार्ड्स रेस्तरां से शॉपिंग तक लोगों के लिए जरूरी बन चुके हैं.

2000 का दशक: चिप और कॉन्टैक्टलेस

2000 में मैग्नेटिक स्ट्रिप स्टैंडर्ड बनी थी.इसके बाद 2008 में मोबाइल वॉलेट शुरू था. 2010 की बात करें तो इसमें EMV चिप आई, जो सिक्योर मानी जाती थी. इसके बाद 2015 में कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का ऑप्शन लोगों को दिया था. फिर आया एक नया दौर, जी हां भारत में 2016 में UPI से क्रेडिट कार्ड लिंक हुआ.

2010-2020: डिजिटल क्रांति


2010-2020 के बीच डिजिटल क्रांति की एंट्री हुई थी. एनपीसीआई द्वारा 2012 में रुपे की शुरूआत से स्वदेशी कार्ड नेटवर्क की शुरुआत हुई, जिससे 2018 तक टियर-2 और टियर-3 शहरों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई. इसने वीज़ा और मास्टरकार्ड के प्रभुत्व को चुनौती दी.

जी हां 2010-2020 2015 में Apple Pay जैसी वॉलेट्स. भारत में 2016 में RuPay कार्ड्स आए और 2020 में COVID से डिजिटल पेमेंट 50% बढ़ा.इंटरनेट क्रांति के साथ, क्रेडिट कार्ड सिर्फ दुकानों में खरीदारी के साधन नहीं रहे, बल्कि ऑनलाइन खरीदारी के जरूरी टूल बन गए. डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ कार्ड ट्रांजेक्शन की संख्या भी तेजी से बढ़ी.

कुछ अहम लॉन्च ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई थी.फिर 2002 में भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने कार्ड से टिकट बुकिंग को आसान बनाया और इसके बाद 2005 में MakeMyTrip और 2007 में Flipkart ने कार्ड पेमेंट्स को रोजमर्रा की सुविधा बना दिया था.


2020-2025: UPI और AI

हालांकि 2025 में UPI से क्रेडिट कार्ड लिंक, EMI ऑप्शन दिया. अब साफ है कि क्रेडिट कार्ड 1980 से UPI तक विकसित हुए और इसके साथ ही सिक्योर और आसान भी बने हैं.(नोट खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)

5 FAQs

1. भारत में पहला क्रेडिट कार्ड कब और किसने जारी किया था?
1980 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पहला क्रेडिट कार्ड ‘डिनर्स क्लब’ के नाम से जारी किया था.

2. 1990 के दशक में क्रेडिट कार्ड सिस्टम में क्या बड़ा बदलाव आया?
1990 के दशक में वीजा और मास्टरकार्ड भारत आए, जिससे नेटवर्क का विस्तार हुआ और ऑनलाइन पेमेंट्स की शुरुआत हुई.

3. EMV चिप और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट कब शुरू हुए?
2010 में EMV चिप कार्ड लॉन्च हुए और 2015 में कॉन्टैक्टलेस पेमेंट की सुविधा शुरू हुई.

4. भारत में UPI से क्रेडिट कार्ड कब लिंक हुआ?
भारत में 2016 में UPI से क्रेडिट कार्ड लिंक होना शुरू हुआ, जिससे पेमेंट प्रोसेस और आसान हो गया.

5. 2025 में क्रेडिट कार्ड टेक्नोलॉजी में नया क्या बदलाव देखने को मिल रहा है?
अब वर्चुअल और AI-सक्षम कार्ड्स लॉन्च हो रहे हैं, जो सुरक्षा, ट्रैकिंग और पर्सनलाइज्ड ऑफर्स को और बेहतर बना रहे हैं.

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