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आज के टाइम में हर एक जरूरत को पूरा करने के लिए लोग लोन का ही सहारा ले रहे हैं (फाइल फोटो)
आज के इस टाइम में हर एक जरूरत को पूरा करने के लिए लोग लोन का ही सहारा ले रहे हैं. यही कारण है कि हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. जी हां नया घर लेना हो या अचानक आए किसी पर्सनल खर्च को निपटाना हो, हम तुरंत बैंक का सहारा लेते हैं. जैसेही मोबाइल पर 'लोन अप्रूव्ड' का मैसेज आते ही चेहरे पर मुस्कान तो आ जाती है, लेकिन असली खेल शुरू होता है हर महीने की उस 'डेडलाइन' से, जिसे हम EMI कहते हैं.
कई बार पैसों की दिक्कत होने पर लोग सोचते हैं इस महीने की जगह अगले महीने दो किस्तें एक साथ भर देंगे…इससे क्या ही फर्क पड़ेगा.अगर आप भी ऐसी ही सोच रखते हैं, तो रुक जाइए।असल में आपकी यह एक छोटी सी लापरवाही आपकी 'फाइनेंशियल हेल्थ' को खराब कर सकती है.
तो फिर आइए समझते हैं कि एक किस्त न भरने का वो कौन सा गणित है, जो फ्यूचर में आपके हाथ खाली कर सकता है.
शुरुआत में अगर आप केवल 2-4 दिन लेट होते हैं, तो बैंक आपसे केवल कुछ सौ रुपये 'लेट फीस' वसूलता है, लेकिन यहीं तक तो मामला संभल सकता है.फिर जैसे ही पेमेंट में देरी 30 दिन से ऊपर पहुंचती है, असली परेशानी शुरू होती है.
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30 दिन गुजरते ही बैंक आपको रिपोर्ट CIBIL, Experian और Equifax जैसे क्रेडिट ब्यूरो को भेज देता है. जिससे क्रेडिट हिस्ट्री पर बुरा असर होता है.तो इसलिए अब से अगली बार जब आप किसी दूसरे बैंक में होम लोन या बिजनेस लोन के लिए जाएंगे, तो वे आपका पिछला रिकॉर्ड देखें.
बैंक की नजर में देरी के भी अलग-अलग लेवल होते हैं.
30 से 59 दिन: इसे बैंक 'हल्की लापरवाही' मानकर आपको बार-बार कॉल और मैसेज भेजता है
60 से 89 दिन: यहां बैंक को लगने लगता है कि आपकी फाइनेंशियल स्थिति बहुत खराब है और आप पैसा दबाने की फिराक में है.
90 दिन के बाद: अगर आप 90 दिनों तक किस्त नहीं भरते, तो बैंक आपके अकाउंट को NPA घोषित कर देता है.तो इसका सीधा मतलब ये है कि बैंक की नजर में आप पैसा समय से ना चुकाने वाले होते हैं. इसके बाद बैंक कानूनी कार्रवाई और रिकवरी का प्रोसेस शुरू कर देता है.
आजकल के टाइम में अनगिनत ऐसे लोग हैं जो मोबाइल ऐप्स से छोटे-छोटे लोन लेते हैं.असल में ये फिनटेक कंपनियां और भी ज्यादा रिस्की होती हैं.जी हां इनका सिस्टम रियल-टाइम पर काम करता है.तो EMI मिस होते ही आपका क्रेडिट स्कोर धड़ाम से गिरता है और आपकी क्रेडिट लिमिट रातों-रात कम कर दी जाती है.
तो अगर वाकई में पैसों की तंगी है और लग रहा है कि इस महीने EMI मिस हो जाएगी, तो चुपचाप मत बैठिए-
बैंक से बात करें: बैंक से डरो मत, उनसे बात करे, उन्हें अपनी मजबूरी बताओ, कई बार बैंक आपको कुछ दिनों की 'पेमेंट हॉलिडे' दे देते हैं या आपकी किस्त की तारीख बदल देते हैं.
लोन रीस्ट्रक्चरिंग: अगर समस्या लंबी है, तो बैंक से लोन की अवधि बढ़वा लें ताकि हर महीने की EMI कम हो जाए
प्रायोरिटी सेट करें: शॉपिंग या बाहर घूमने के खर्चों को काटें, लेकिन EMI को पहली प्राथमिकता दें
एक बात आप हमेशा याद रखिये, सिबिल स्कोर बनाना एक लंबी परीक्षा मानी जा सकती है, लेकिन उसे बिगाड़ने के लिए सिर्फ एक 'मिस हुई EMI' ही काफी है. तो अगर आप चाहते हैं कि फ्यूचर में बैंक आपके लिए रेड कार्पेट बिछाए, तो अपनी किस्तों के साथ कभी मजाक न करें. क्योंकि बैंक पैसा तो देता है, लेकिन क्रेडिट आपको खुद कमाना पड़ता है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 बैंक की तकनीकी खराबी से EMI बाउंस हो जाए तो क्या करें?
बैंक को तुरंत सबूत के साथ मेल करें, गलती बैंक की होने पर आपका सिबिल खराब नहीं होगा
Q2 क्या क्रेडिट कार्ड का सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' भरने से सिबिल बच जाता है?
सिबिल स्कोर नहीं गिरेगा,लेकिन ध्यान रहे, बाकी बचे हुए पैसों पर बैंक आपसे बहुत मोटा ब्याज वसूलेगा
Q3 दोस्त के लोन में 'गारंटर' हूं, वो किस्त न भरे तो क्या मेरा सिबिल गिरेगा?
अगर वो EMI मिस करेगा, तो गारंटर होने के नाते आपका सिबिल भी बराबर खराब होगा
Q4 एक बार सिबिल खराब होने पर उसे दोबारा ठीक करने में कितना वक्त लगता है?
अगर आप लगातार 6 से 12 महीने तक अपनी सारी पेमेंट समय पर करते हैं, तो स्कोर दोबारा सुधरने लगेगा
Q5 क्या लोन 'सेटलमेंट' करने से भविष्य में दिक्कत आती है?
सेटलमेंट का मतलब है कि आपने पूरा पैसा नहीं चुकाया, इससे सिबिल पर दाग लगता है और दोबारा लोन मिलना मुश्किल हो जाता है