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आज के टाइम में अगर आप किसी भी बैंक से लोन या क्रेडिट कार्ड लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले देखा जाता है आपका CIBIL स्कोर.असल में यह स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री, लोन चुकाने की क्षमता और रिपेमेंट डिसिप्लिन को पेश करने का काम करता है. असल में अच्छा स्कोर न सिर्फ बैंक से लोन पाने में मदद करता है, बल्कि इससे ब्याज दर भी कम मिलती है। वहीं, अगर स्कोर गिर जाता है तो लोन अप्रूव होना मुश्किल हो सकता है.
कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि अगर किसी वजह से आपका चेक बाउंस हो गया , तो फिर क्या इससे आपके CIBIL स्कोर पर असर पड़ेगा?दरअसल, बैंक हर चेक बाउंस की जानकारी सीधे क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को नहीं भेजते. ऐसे में, केवल चेक बाउंस होने मात्र से आपका स्कोर खराब नहीं होता है. लेकिन अगर उस बाउंस हुए चेक से जुड़ा पेमेंट—जैसे EMI, लोन या क्रेडिट कार्ड बिल-टाइमपर क्लियर नहीं हुआ, तो बैंक इसे मिस्ड पेमेंट या डिफॉल्ट के रूप में रिपोर्ट करता है, यही स्थिति आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती है.
तो मान लीजिए अगर आपने किसी बैंक लोन की EMI के लिए पोस्ट-डेटेड चेक दिया और वह बाउंस हो गया.तो अगर आपने तुरंत दूसरा भुगतान नहीं किया, तो बैंक इसे मिस्ड EMI मानेगा.तो ऐसे मामलों में आपका CIBIL स्कोर 20 से 50 अंकों तक गिर सकता है.लेकिन अगर यह गलती बार-बार होती है, तो स्कोर तेजी से गिरता है और अगली बार लोन अप्रूवल की संभावना बहुत कम हो जाती है.
1. खाते में बैलेंस की कमी– यह सबसे आम कारण है.
2. सिग्नेचर में अंतर– अगर चेक पर किया गया सिग्नेचर बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता.
3. गलत या भविष्य की तारीख– पोस्ट-डेटेड चेक को पहले जमा करने पर बाउंस हो सकता है.
4. ओवरराइटिंग या गड़बड़ी – राशि में शब्द और अंकों में अंतर होने पर बैंक चेक अस्वीकार कर देता है.
5. बंद खाता या लिमिट पार होना – ओवरड्राफ्ट लिमिट से ज्यादा रकम का चेक भी क्लियर नहीं होता.
6. चेक डैमेज या साफ राइटिंग ना हो – फिजिकल डैमेज की स्थिति में बैंक क्लियर नहीं करता.
बार-बार चेक बाउंस होने पर बैंक पेनल्टी लगा सकता है या गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. इससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर बुरा असर पड़ सकता है.
1. बकाया रकम चुकाएं– मिस्ड EMI या कार्ड बिल को तुरंत क्लियर करें.
2. गारंटर जिम्मेदारी समझें– अगर आप किसी के गारंटर हैं और वह भुगतान नहीं कर रहा है, तो तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं.
3. क्रेडिट रिपोर्ट नियमित जांचें– किसी भी गलती या एरर को टाइम रहते सुधारें.
4. नई क्रेडिट लिमिट का सही उपयोग करें – लिमिट का 30% से ज्यादा खर्च ना करें.
5. पुराने लोन का क्लोजर रिपोर्ट करवाएं– ताकि स्कोर पर पॉजिटिव इफेक्ट दिखे.
चेक बाउंस होना अपने आप में CIBIL स्कोर को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अगर उसके कारण EMI या लोन रिपेमेंट में देरी होती है, तो स्कोर पर असर पड़ता है.तो इसलिए अपने बैंकिंग व्यवहार में सावधानी और अनुशासन बेहद जरूरी है.हमेशा समय पर भुगतान करें और फाइनेंशियल लेनदेन में क्लिलर बनाए रखें. ऐसा करने से आपका CIBIL स्कोर मजबूत रहेगा और फ्यूचर में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
5 FAQs
1. क्या चेक बाउंस होने से CIBIL स्कोर खराब होता है?
सिर्फ चेक बाउंस होने से स्कोर खराब नहीं होता, लेकिन अगर EMI या क्रेडिट कार्ड भुगतान समय पर नहीं किया गया तो स्कोर पर असर पड़ता है.
2. चेक बाउंस का बैंक रिपोर्टिंग पर क्या असर पड़ता है?
बैंक आम तौर पर हर चेक बाउंस की जानकारी CIBIL को नहीं भेजते, लेकिन यदि इससे EMI मिस होती है तो बैंक उसे डिफॉल्ट मानकर रिपोर्ट कर सकते हैं.
3. CIBIL स्कोर कितना गिर सकता है अगर EMI मिस हो जाए?
एक बार EMI मिस होने पर आपका स्कोर 20 से 50 अंकों तक गिर सकता है, जबकि बार-बार ऐसा होने से गिरावट और बढ़ सकती है.
4. चेक बाउंस होने के मुख्य कारण क्या हैं?
खाते में बैलेंस की कमी, गलत सिग्नेचर, ओवरराइटिंग, भविष्य की तारीख वाला चेक या बंद खाते से जारी चेक.
5. CIBIL स्कोर गिरने से बचने के उपाय क्या हैं?
समय पर EMI चुकाएं, खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें, पोस्ट-डेटेड चेक का सही उपयोग करें और अपनी क्रेडिट रिपोर्ट नियमित जांचते रहें.
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