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कार खरीदना कोई निवेश नहीं है, बल्कि यह एक खर्चा है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
Car Buying Tips by Sanjay Kathuria: क्या आपकी सैलरी ₹1 लाख है और आप 50 लाख की मर्सिडीज का सपना देख रहे हैं? असल में अक्सर लोग सैलरी आते ही सबसे पहले कार खरीदने की प्लानिंग करने लगते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि कार लेना आपकी जेब के लिए 'एसेट' (संपत्ति) है या 'एक्सपेंस' (खर्चा)? ज़ी बिज़नेस के पॉडकास्ट शो ‘Bucks Talk’ में फाइनेंस कंटेंट क्रिएटर संजय कथूरिया ने कार और सैलरी के इसी उलझे हुए गणित को बहुत ही आसान भाषा में समझाया है.
संजय कथूरिया का कहना है कि कार खरीदना कोई निवेश नहीं है, बल्कि यह एक खर्चा है. लोग अक्सर सिर्फ ईएमआई को देखते हैं, लेकिन असली खेल 'टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप' (Total Cost of Ownership - TCO) का है. ईएमआई और टीसीओ में बहुत फर्क होता है.
इसे एक उदाहरण से समझते हैं कि चलिएमान लीजिए आपने 10 लाख रुपये की एक कार ली. तो आपने 2 लाख रुपये डाउन पेमेंट किया और फिर 8 लाख रुपये का लोन लिया. ऐसे में 5 साल के लिए इसकी महीने की किस्त (EMI) करीब 16,000 रुपये आएगी. लेकिन क्या खर्चा यहीं रुक जाता है? बिल्कुल नहीं.
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संजय कथूरिया ने बताया कि 16,000 रुपये की ईएमआई के अलावा भी कई छुपे हुए खर्चे हैं:
तो इतना साफ है कि कुल मिलाकर, 10 लाख की गाड़ी आपको हर महीने लगभग 25,000 रुपये की पड़ती है. तो अब अगर आप महीने में केवल 100 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं, तो फिर आपको एक किलोमीटर का सफर 250 रुपये का पड़ेगा. वहीं, अगर आप 1,000 किलोमीटर चलाते हैं, तो यह खर्च 25 रुपये प्रति किलोमीटर आता है. इसकी तुलना में ओला-उबर जैसी कैब आपको 14 से 16 रुपये प्रति किलोमीटर में ड्राइवर के साथ मिल जाती हैं.
संजय कथूरिया के मुताबिक, अगर आपकी महीने की कमाई 1 से 1.5 लाख रुपये से कम है, तो आपको शुरू में गाड़ी लेने से बचना चाहिए. गाड़ी तभी लें जब आपका यूज बहुत ज्यादा हो (महीने में 700-800 किलोमीटर) या आपके काम की ऐसी जरूरत हो. अगर आप सिर्फ घर से ऑफिस और ऑफिस से घर जाते हैं, और मेट्रो या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प मौजूद है, तो गाड़ी आपके लिए फिलहाल उपयोगी नहीं है.
कार खरीदने का सबसे सही नियम यह है कि आपकी गाड़ी की 'टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप' (TCO) आपकी कुल सैलरी के करीब 15 से 20% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. जब आप इस आंकड़े को अफोर्ड कर सकें, तभी शोरूम की ओर कदम बढ़ाएं. अपनी इनकम पर कार का बेवजह बोझ न डालें.
संजय कथूरिया खुद पुरानी गाड़ियों के फेवर में रहते हैं. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि जब तक उन्होंने जॉब नहीं छोड़ी, उनके पास बहुत छोटी कार 'क्विड' (Kwid) थी. बाद में जब उनके पास ठीक-ठाक पैसे हुए, तब भी उन्होंने नई के बजाय 'यूज्ड फॉर्च्यूनर' ली.
उनका तर्क है कि 3-4 साल में गाड़ी का कुछ बिगड़ता नहीं है, लेकिन उसकी वैल्यू आधी रह जाती है. ऐसे में अगर आपका बजट 10 लाख है, तो आप नई गाड़ी के बजाय करीब 15-16 लाख वाली शानदार गाड़ी सेकंड हैंड मार्केट से 10 लाख में उठा सकते हैं. बस ध्यान यह रखें कि उस गाड़ी का सर्विस सेंटर पास हो और मेंटेनेंस कॉस्ट बहुत ज्यादा न हो.
आपके काम की बात
आपको बता दें कि आजकल के टाइम में फैमिली ट्रिप्स के लिए गाड़ी खरीदना जरूरी नहीं है, क्योंकि रेंट पर इनोवा, फॉर्च्यूनर और यहां तक कि मर्सिडीज भी आसानी से मिल जाती है. इसलिए दिखावे के चक्कर में न पड़ें, कार तभी खरीदें जब आप उसे सही मायने में अफोर्ड कर सकें.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या 5 लाख की कार के लिए पैन कार्ड जरूरी है?
सरकार के नियम के मुताबिक 5 लाख से ऊपर की गाड़ी पर पैन कार्ड देना अनिवार्य है, आजकल तो बेस मॉडल भी ऑन-रोड इसी कीमत पर मिलते हैं
Q2 कम रनिंग है तो क्या अपनी कार लेना समझदारी है?
अगर आप महीने में सिर्फ 100-200 किमी चलते हैं, तो अपनी गाड़ी पालने से अच्छा ओला-उबर लेना बहुत सस्ता पड़ता है
Q3 पुरानी (Used) कार लेना रिस्की तो नहीं?
अगर आप 3-4 साल पुरानी कार लेते हैं तो वो आधी कीमत में मिल जाती है.बस खरीदने से पहले उसका सर्विस रिकॉर्ड और मेंटेनेंस कॉस्ट जरूर चेक कर लें
Q4 कार खरीदने का सही बजट कैसे तय करें?
आपकी कार की किस्त (EMI), पेट्रोल और मेंटेनेंस का कुल खर्च आपकी महीने की सैलरी के 15 से 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए