होली के पहले इस सरकारी बैंक ने दी बड़ी खुशखबरी! अपने घर का सपना हो सकता है पूरा, Home Loan पर ब्याज दरें होंगी कम

Canara Bank MCLR: केनरा बैंक ने बताया कि ओवरनाइट MCLR में 5 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. जबकि, 2 साल वाले MCLR में 10 बेसिस प्वाइंट और 3 साल वाले MCLR में 15 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. 
होली के पहले इस सरकारी बैंक ने दी बड़ी खुशखबरी! अपने घर का सपना हो सकता है पूरा, Home Loan पर ब्याज दरें होंगी कम

Canara Bank MCLR: होली के त्योहार के पहले सरकारी बैंक Canara Bank ने अपने कस्टमर्स को बड़ी खुशखबरी दे दी है. बैंक ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि MCLR में 15 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती कर दी गई है. MCLR की नई दरें आज देर रात यानि की 12 मार्च से लागू हो जाएंगे. इसका सीधा फायदा आपके होम लोन और कार लोन की EMI पर पड़ने वाला है. आइए देखते हैं कि किस अवधि में बैंक ने कितनी राहत दी है.

Canara Bank Latest MCLR

एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने बताया कि ओवरनाइट MCLR में 5 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. वहीं. एक महीने, 3 महीने, 6 महीने और 1 साल के MCLR में कोई कटौती नहीं की गई है. जबकि, 2 साल वाले MCLR में 10 बेसिस प्वाइंट और 3 साल वाले MCLR में 15 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है.

Add Zee Business as a Preferred Source

MCLR

क्या होता है MCLR?

MCLR भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से तय किया गया रेट है जो कॉमर्शियल बैंकों की तरफ से लोन की ब्याज दर तय करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. भारत में नोटबंदी के बाद से इसे लागू किया गया है. इससे ग्राहकों के लिए लोन लेना आसान हो गया है. MCLR वह न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है. दरअसल जब आप किसी बैंक से कर्ज लेते हैं तो बैंक की तरफ से लिए जाने वाले ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है. अब इसी आधार दर की जगह पर बैंक MCLR का इस्तेमाल कर रहे हैं.

MCLR बढ़ने पर क्‍यों महंगा होता है लोन?

MCLR न्‍यूनतम दर है, ऐसे में ये साफ है कि बैंक इसके रेट के नीचे ग्राहकों को लोन नहीं दे सकते यानी MCLR जितना बढ़ेगा, लोन पर ब्याज भी उतना ही ऊपर जाएगा. ऐसे में मार्जिनल कॉस्ट से जुड़े लोन जैसे- होम लोन, व्हीकल लोन आदि पर ब्याज दरें बढ़ जाएंगी. हालांकि ऐसा नहीं है कि MCLR बढ़ते ही अगले महीने से आपकी ईएमआई भी बढ़ जाएगी. यहां पर गौर करने वाली बात ये है कि MCLR रेट बढ़ने पर आपके लोन पर ब्याज दरें तुरंत नहीं बढ़ती हैं. लोन लेने वालों की EMI रीसेट डेट पर ही आगे बढ़ती है.

क्‍या है MCLR का मकसद?

बैंकों के लेंडिंग रेट्स की नीतिगत दरों के ट्रांसमिशन में सुधार लाने और सभी बैंकों की ब्‍याज दरों की निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के मकसद से MCLR को लागू किया गया. MCLR लागू होने के बाद से होम लोन जैसे लोन सस्‍ते हुए हैं. MCLR की गणना धनराशि की सीमांत लागत (Marginal Cost of Funds), आवधिक प्रीमियम (Period Premium), संचालन खर्च (Operating Expenses) और नकदी भंडार अनुपात (Cash Reserves Ratio) को बनाए रखने की लागत के आधार पर की जाती है. बाद में इस गणना के आधार पर लोन दिया जाता है. यह आधार दर से सस्ता होता है. बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, तीन महीने, छह महीने, एक साल और दो साल का एमसीएलआर घोषित करना अनिवार्य होता है.

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6