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महामारी की वजह से बैंक के साथ ही नॉन-बैंकों का भी GNPA बढ़ा है. (फोटो: पीटीआई)
Bad loans of banks: बैंकों का NPA (Non Performing Asset) यानी फंसा कर्ज, चालू कारोबारी साल के अंत तक 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. इसकी मुख्य वजह रिटेल और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम ( MSME) को दिये गये कर्ज लौटाने में आने वाली समस्या है. मंगलवार को एक स्टडी में यह कहा गया. भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंडल (ASSOCHAM) और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) के एक स्टडी के मुताबिक ‘‘खुदरा और MSME क्षेत्र में कर्ज लौटाने में दिक्कत तथा कुछ संपत्तियों के पुनर्गठन के कारण मार्च 2022 तक एनपीए बढ़कर 8.5-9 प्रतिशत तक जा सकता है.’’
10 लाख करोड़ से ज्यादा हो सकता है GNPA
अध्ययन के अनुसार बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) मार्च 2022 तक 10 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकती है. इसमें कहा गया है कि संपत्ति गुणवत्ता को लेकर मौजूदा दबाव कुछ साल पहले देखे गये दबाव से अलग है. उस समय एनपीए मुख्य रूप से बड़े खातों से कर्ज लौटाने में चूक के कारण बढ़े थे.
अध्ययन के मुताबिक इस बार छोटे खाते, खासतौर से MSME और रिटेल कैटेगरी के अकाउंट में कर्ज वापसी में समस्या की आशंका है. हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि एमएसएमई और छोटे कर्जदारों के लिये घोषित कर्ज पुनर्गठन योजना (debt restructuring plan) से एनपीए में बहुत ज्यादा वृद्धि पर लगाम लगनी चाहिए. साथ ही दबाव वाली संपत्ति में निवेश करने वाले इन्वेस्टर्स के लिये इस प्रकार की परिसंपत्ति (asset) में निवेश के मौके हैं.
नॉन-बैंकों का भी बढ़ा GNPA
रिपोर्ट में कहा गया है कि कारोबारी साल में कोरोना महामारी की वजह से बैंक के साथ ही नॉन-बैंकों का भी GNPA बढ़ा है. वहीं इससे निकलने के भी कई रास्ते हैं. जिनमें सबसे बेहतर IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) है.
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