रिटर्न का असली 'बाजीगर' कौन? बैंक FD या कॉरपोरेट FD? जानें निवेश करने से पहले वो बातें जो आपको कोई नहीं बताएगा

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश से पहले बैंक FD और कॉरपोरेट FD के बीच फर्क समझना जरूरी है.असल में दोनों में रिटर्न, रिस्क और सुरक्षा अलग होती है.तो जानें किसमें निवेश देना है ज्यादा फायदा और किन बातों का रखना है ध्यान,पढ़ें पूरी जानकारी निवेश से पहले.
रिटर्न का असली 'बाजीगर' कौन? बैंक FD या कॉरपोरेट FD? जानें निवेश करने से पहले वो बातें जो आपको कोई नहीं बताएगा

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना हमेशा से लोगों को एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश ऑप्शन लगता है. हालांकि, जब भी अच्छे रिटर्न की बात आती है, तो अक्सर निवेशक बैंक FD और कॉर्पोरेट FD (या कंपनी FD) के बीच में कंफ्यूज हो जाते हैं. उनको समझ नहीं आता है कि दोनों में से किसमें निवेश करना फायदे से भरपूर होगा.तो आइए हम आज दोनों के अपने फायदे और नुकसान से लेकर हर एक बात को जानते हैं.

क्या है बैंक FD और कॉर्पोरेट FD?

1. बैंक FD (Bank Fixed Deposit): अगर आप सेफ और स्थिर रिटर्न वाला निवेश चाहते हैं, तो बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बेस्ट हो सकता है. यहां एकमुश्त राशि को 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए जमा करते हैं और उस पर पहले से तय ब्याज दर मिलती है.FD को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित किया जाता है और DICGC के तहत ₹5 लाख तक की जमा बीमित रहती है.बैंक FD की ब्याज दरें लगभग 6-7% के आसपास हैं.

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2. कॉर्पोरेट FD (Corporate Fixed Deposit / Company FD): कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट एक ऐसा निवेश ऑप्शन है जिसे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) या अन्य निजी कंपनियां जारी करती हैं. ये लोगों से धन जुटाने के लिए एफडी का इस्तेमाल करती हैं.आमतौर पर इनकी अवधि 6 महीने से लेकर 5 साल तक हो सकती है. हालांकि कॉर्पोरेट एफडी सीधे DICGC बीमा कवर में नहीं आतीं, इसलिए इनकी सुरक्षा कंपनी की वित्तीय स्थिति और क्रेडिट रेटिंग पर निर्भर करती है.ये बैंक एफडी से 1-3% तक अधिक ब्याज देती हैं.

किसे क्या चुनना चाहिए?

-बैंक FD उन निवेशकों के लिए आदर्श मानी जाती हैं और रिस्क कम लेने वाले इसमें इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं.जिन निवेशकों के लिए पूंजी की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और जो DICGC बीमा कवर चाहते हैं वो बैंक एफडी में निवेश करते हैं.

-कॉर्पोरेट FD उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं, जो थोड़ा अधिक जोखिम लेने को तैयार हैं.जो निवेशक रिस्क के साथ हाई ब्याज दरों की तलाश में हैं वो अपना पैसा लगा सकते हैं.वो निवेशक जिनके पास विविध पोर्टफोलियो है और वे FD में भी विविधता लाना चाहते हैं.

यानी कि बैंक FD और कॉर्पोरेट FD दोनों ही आपके पोर्टफोलियो का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी रिस्क लेने की क्षमता आदि के आधार पर चुनें. अगर सेफ्टी चाहते बैं तो बैंक FD बेहतर हैं. लेकिन अगर आप कुछ रिस्क उठाकर हाई रिटर्न चाहते हैं और कंपनियों की गहन जांच कर सकते हैं, तो अच्छी रेटिंग वाली कॉर्पोरेट FD पर विचार किया जा सकता है.(नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)

Q1: बैंक FD और कॉरपोरेट FD में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

A1: बैंक FD सुरक्षित होती है और DICGC से ₹5 लाख तक बीमित होती है, जबकि कॉरपोरेट FD में रिटर्न ज्यादा मिल सकता है पर जोखिम भी अधिक होता है.

Q2: क्या कॉरपोरेट FD में गारंटीड रिटर्न मिलता है?

A2: नहीं, ये कंपनी की क्रेडिट रेटिंग और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है, AAA रेटिंग वाली FD ही सुरक्षित मानी जाती है.

Q3: टैक्स के मामले में दोनों FD में क्या फर्क है?

A3: दोनों से मिलने वाला ब्याज टैक्स योग्य होता है, टैक्स-सेविंग बेनिफिट केवल 5 साल की बैंक FD में मिलता है.

Q4: सीनियर सिटिज़न्स के लिए कौन सी FD बेहतर है?

A4: बैंक FD, क्योंकि ये सुरक्षित है और उन्हें 0.50% से 0.75% तक ज्यादा ब्याज मिलता है.

Q5: ज्यादा रिटर्न चाहिए तो कौन सी FD चुनें?

A5: अगर आप जोखिम उठा सकते हैं, तो अच्छी क्रेडिट रेटिंग वाली कॉरपोरेट FD बेहतर हो सकती है.

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