धमाकेदार उछाल! बैंकों में पैसा बरसने वाला है, कर्ज में 12% की तूफानी बढ़ोतरी तय

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बैंक ऋण 11-12% तक बढ़ने की उम्मीद है. रिटेल क्रेडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड और एनबीएफसी लेंडिंग इस ग्रोथ को मजबूत बनाएंगे.
धमाकेदार उछाल! बैंकों में पैसा बरसने वाला है, कर्ज में 12% की तूफानी बढ़ोतरी तय

भारत में बैंक ऋण (Bank Credit) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी छमाही यानी अक्टूबर से मार्च के बीच बैंक लोन में 11-12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. यह वृद्धि पिछले वित्त वर्ष और पिछले दस साल के औसत से भी अधिक होगी. इस अनुमान को क्रिसिल रेटिंग्स ने जारी किया है.

क्यों बढ़ेगा बैंक लोन?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेजी की मुख्य वजह सरकार और नियामकों की ओर से दी गई नीतिगत मदद, साथ ही लोगों की खपत में बढ़ोतरी होगी. जब बाजार में मांग बढ़ती है, तो स्वाभाविक रूप से लोग ज्यादा कर्ज लेते हैं. इसमें खासकर रिटेल क्रेडिट यानी आम लोगों को दिया जाने वाला लोन सबसे बड़ा योगदान देगाय

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रिटेल क्रेडिट की भूमिका

क्रिसिल का कहना है कि इस वित्त वर्ष रिटेल क्रेडिट लगभग 13 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जबकि पिछले साल यह 11.7 प्रतिशत था.इसका मतलब है कि लोग ज्यादा होम लोन, पर्सनल लोन, गोल्ड लोन और अन्य तरह के लोन लेंगे.

होम लोन: ब्याज दरों में गिरावट से हाउसिंग सेक्टर को फायदा मिलेगा और ज्यादा लोग घर खरीदने के लिए लोन लेंगे.
गोल्ड लोन: हिस्सेदारी कम होने के बावजूद, इसमें भी तेजी बनी रहेगी.
असुरक्षित ऋण (Unsecured Loans): पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड खर्च बढ़ने से इस श्रेणी में भी तेज उछाल देखने को मिल सकता है.

उपभोग और नीतिगत मदद

क्रिसिल रेटिंग्स के मुख्य अधिकारी कृष्णन सीतारमन ने कहा कि जीएसटी सुधार, ब्याज दरों में कमी, महंगाई पर काबू और बजट में टैक्स कटौती जैसी चीजें मिलकर उपभोग को बढ़ावा देंगी. इससे लोगों की खरीद क्षमता बढ़ेगी और बैंक लोन की मांग भी.

NBFC और MSME सेक्टर

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी छमाही में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को दिए जाने वाले लोन में भी तेजी आएगी. वहीं, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को दिए जाने वाले लोन लगभग 14 प्रतिशत पर स्थिर रह सकते हैं. डिजिटलीकरण और औपचारिक व्यवस्था की वजह से बैंकों ने इस सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत की है। हालांकि, निर्यात से जुड़े छोटे उद्योगों को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि ऋण

सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे खर्च से सीमेंट, स्टील और एल्युमीनियम जैसे उद्योगों को लोन की जरूरत बढ़ेगी. इसी तरह, अच्छी बारिश और फसल की उम्मीदों के चलते कृषि ऋण में भी करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है.

बॉन्ड मार्केट पर असर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब रेपो रेट कटौती का पूरा असर बैंकिंग सेक्टर पर दिखेगा, तो निवेशक बॉन्ड से हटकर बैंक लोन की ओर ज्यादा झुक सकते हैं। इससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता और मजबूत होगी.

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में आर्थिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं. रिटेल क्रेडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनबीएफसी और कृषि क्षेत्र मिलकर बैंक लोन की वृद्धि को आगे बढ़ाएंगे। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो चालू वित्त वर्ष के अंत तक बैंकिंग सेक्टर मजबूत स्थिति में होगा और अर्थव्यवस्था को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा.

FAQs

Q1. चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बैंक ऋण की वृद्धि कितनी अनुमानित है?
लगभग 11-12% तक.

Q2. इस ग्रोथ का नेतृत्व कौन करेगा?
रिटेल क्रेडिट सेक्टर.

Q3. होम लोन की वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
कम ब्याज दरें और बढ़ती मांग.

Q4. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कौन से उद्योग बैंक लोन को बढ़ावा देंगे?
सीमेंट, स्टील और एल्युमीनियम.

Q5. कृषि ऋण में इस साल कितनी वृद्धि का अनुमान है?
लगभग 10%.

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