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ज्यादातर लोग अपनी मेहनत की कमाई को सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में सुरक्षित रखते हैं. लेकिन मोटा पैसा सेविंग्स अकाउंट में रखने का बहुत बड़ा फायदा नहीं होता क्योंकि इस पर ज्यादा ब्याज नहीं मिलता है. ज्यादातर सेविंग्स अमाउंट में ब्याज सिर्फ 2.5% से 4% के बीच होता है? इससे बेहतर है कि इस अमाउंट को कहीं निवेश कर दिया जाए. लेकिन निवेश करने पर आप उस अकाउंट से बीच में पैसे नहीं निकाल सकते क्योंकि लॉक-इन पीरियड का चक्कर होता है. ऐसे में बेहतर है कि आप बैंक में जाकर ऑटो-स्वीप फैसिलिटी (Auto Sweep Facility) को चालू करवा लें. ये एक ऐसी शानदार सुविधा है जो आपके सामान्य बचत खाते को एक स्मार्ट, ज़्यादा कमाई वाले खाते में बदल देती है. जानिए इसके फायदे
ऑटो-स्वीप एक ऐसी बैंकिंग सुविधा है जो आपके सेविंग्स अकाउंट को आपके फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अकाउंट से लिंक कर देती है. इस सुविधा को एक्टिवेट करते समय आप एक लिमिट (Threshold Limit) तय करते हैं, मान लीजिए 30,000 रुपए. अब जैसे ही आपके सेविंग्स अकाउंट में रकम इस लिमिट से ज़्यादा होगी, अतिरिक्त पैसा अपने आप एक FD में ट्रांसफर हो जाएगा. इस FD पर आपको सेविंग्स अकाउंट से कहीं ज़्यादा, FD वाला ब्याज मिलेगा. वहीं, जब आपको पैसों की जरूरत होगी और आप अपने अकाउंट से पैसे निकालेंगे, जिससे बैलेंस तय लिमिट से कम हो जाएगा, तो FD से उतनी ही रकम अपने आप टूटकर आपके सेविंग्स अकाउंट में वापस आ जाएगी. इस तरह, आपको पैसों की कमी भी नहीं होगी और आपकी अतिरिक्त रकम पर ज़्यादा ब्याज भी मिलता रहेगा.
सबसे बड़ा फायदा यही है. जहां सेविंग्स अकाउंट पर 2.5% से 4% ब्याज मिलता है, वहीं ऑटो-स्वीप फैसिलिटी से लिंक FD पर आपको 6% से 7.5% तक का ब्याज मिल सकता है. ये ब्याज सेविंग्स अकाउंट की तुलना में करीब-करीब डबल है. इससे आपकी बचत तेजी से बढ़ती है.
सामान्य FD को समय से पहले तोड़ने पर पेनल्टी लगती है. लेकिन ऑटो-स्वीप में ऐसा नहीं है. यह सुविधा आपको FD के ब्याज के साथ-साथ सेविंग्स अकाउंट जैसी लिक्विडिटी भी देती है. आप जब चाहें ATM, चेक या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से पैसे निकाल सकते हैं. पैसा अपने आप लिंक की हुई FD से आपके खाते में आ जाएगा.
एक बार इस सुविधा को एक्टिवेट करने के बाद आपको कुछ नहीं करना होता. बैंक का सिस्टम अपने आप अतिरिक्त पैसों को FD में डालता है और जरूरत पड़ने पर वापस ले आता है. आपको बार-बार FD बनवाने या तोड़ने के झंझट से मुक्ति मिल जाती है.
आपको सेविंग्स अकाउंट और FD के फायदे एक ही खाते में मिल जाते हैं. आपको अलग से कोई FD अकाउंट खोलने या उसे मैनेज करने की जरूरत नहीं पड़ती.
बैंक अपने कस्टमर्स को यह सर्विस प्रोवाइड कराने के लिए अलग-अलग माध्यम देते हैं. हम यहां SBI के ग्राहकों के लिए यह फैसिलिटी चालू कराने का तरीका बता रहे हैं. एसबीआई ग्राहक इसे इंटरनेट बैंकिंग और YONO ऐप के जरिए चालू कर सकते हैं. जानिए इसका प्रोसेस-
- इंटरनेट बैंकिंग पर साइन इन करके मेनू से फिक्स्ड डिपॉजिट ऑप्शन पर जाएं.
- ड्रॉप डाउन मेनू से 'More' ऑप्शन पर क्लिक करने से ऑटो स्वीप फैसिलिटी पेज खुलेगा. यहां इसके लिंक पर क्लिक करें.
- इसके बाद यह फीचर जिस अकाउंट में चाहिए, उसे चुनें और अपना अमाउंट फिक्स करें. यहां आपको डिपॉजिट का टाइम फ्रेम भी चुनना होगा.
- इसके बाद OK पर क्लिक करके इसे सबमिट कर दें. आपको यहां पर OTP डालना होगा या फिर ट्रांजैक्शन पिन/पासवर्ड डालना होगा. आपका बैंक अगले कुछ वर्किंग डेज़ में यह सर्विस इनेबल कर देगा.
- मोबाइल ऐप पर जाएं और मेनू से e-fixed deposit का ऑप्शन खोलें.
- यहां मेनू से मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट का ऑप्शन चुनें और जिस अकाउंट में फीचर इनेबल कराना हो, उसे सेलेक्ट करें.
- सबमिट करें. इसके बाद आपसे OTP या फिर ट्रांजैक्शन पिन/पासवर्ड डालने को कहा जाएगा. बैंक की ओर से प्रोसेस पूरा होने पर आपके अकाउंट में यह फीचर इनेबल हो जाएगा.
आमतौर पर बैंक इस सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेते हैं. ये आपके अकाउंट के साथ मिलने वाली एक वैल्यू-एडेड सर्विस है.
ये हर बैंक में अलग-अलग हो सकती है. आमतौर पर यह 10,000 रुपए से लेकर 1,00,000 रुपए के बीच होती है. आप अपनी सुविधा के अनुसार इसे चुन सकते हैं.
हां, अगर एक वित्तीय वर्ष में FD से होने वाली आपकी ब्याज आय 40,000 रुपए (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1,00,000 रुपए) से ज़्यादा है, तो बैंक नियमों के अनुसार TDS काटेगा.
हां, आप जब चाहें बैंक जाकर या नेट बैंकिंग के जरिए इस सुविधा को डीएक्टिवेट (बंद) करवा सकते हैं.
जब पैसा FD से वापस आपके सेविंग्स अकाउंट में आता है, तो जितने दिन पैसा FD में रहा, उस अवधि के लिए लागू ब्याज दर के हिसाब से आपको ब्याज मिलता है. इसमें आमतौर पर कोई पेनल्टी नहीं लगती है.