&format=webp&quality=medium)
हम में से ज्यादातर लोग Emergency Fund सेविंग अकाउंट में रखते हैं, ताकि बीमारी, जॉब लॉस या किसी फाइनेंशियल इमरजेंसी में जल्दी इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लाखों रुपए सेविंग अकाउंट में रखकर आप अपना नुकसान करवा रहे हैं? अगर आप इस पैसे को किसी FD में लगाते हैं तो आपको 6 से 7 प्रतिशत का ब्याज मिलता, लेकिन सेविंग्स अकाउंट में सिर्फ 2.5 से 4% तक का ब्याज ही मिलेगा. इस समस्या का समाधान एक काम करने से हो सकता है. वो है Auto Sweep Facility. यहां जानिए इस बारे में-
ऑटो-स्वीप एक स्मार्ट बैंकिंग फीचर है, जिसमें आपका सेविंग्स अकाउंट फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ जाता है. इस सुविधा को शुरू करते समय आप एक तय राशि (Threshold Limit) सेट करते हैं, जैसे 30,000 रुपए. इसके बाद जैसे ही आपके सेविंग्स अकाउंट में बैलेंस इस लिमिट से अधिक हो जाता है, अतिरिक्त रकम अपने आप FD में बदल जाती है और उस पर आपको साधारण सेविंग्स अकाउंट की तुलना में ज्यादा ब्याज मिलता है.
वहीं, जब आपको पैसों की जरूरत होगी और आप अपने अकाउंट से पैसे निकालेंगे, जिससे बैलेंस तय लिमिट से कम हो जाएगा, तो FD से उतनी ही रकम अपने आप टूटकर आपके सेविंग्स अकाउंट में वापस आ जाएगी. इस तरह, आपको पैसों की कमी भी नहीं होगी और आपकी अतिरिक्त रकम पर ज़्यादा ब्याज भी मिलता रहेगा.
मान लीजिए बैंक Auto Sweep की लिमिट ₹50,000 तय करता है.
| स्थिति | सेविंग अकाउंट ब्याज़ | Auto Sweep ब्याज़ |
|---|---|---|
| Saving Account में ₹3,00,000 | 3% = ₹9,000 | N/A |
| Auto Sweep अकाउंट में | First ₹50,000 at 3% = ₹1,500 | ₹2,50,000 FD at 7% = ₹17,500 |
| Total Return | ₹9,000 | ₹19,000 |
फर्क = ₹10,000+ ज्यादा ब्याज़ सालाना!
| फायदा | विवरण |
|---|---|
| ज्यादा ब्याज़ | Saving Account से लगभग दोगुना रिटर्न |
| फुल लिक्विडिटी | ATM, UPI, Net Banking से कभी भी पैसा निकाल सकते हैं |
| ऑटोमेटेड | मैन्युअली FD बनाने की जरूरत नहीं |
| Tax Efficient | FD पर टैक्स लागू, लेकिन पैसा छोटे-छोटे हिस्सों में टूटता है जिससे ब्याज़ कैलकुलेशन बेहतर होता है |
नहीं, जरूरत पड़ते ही FD अपने-आप टूट जाती है.
ज्यादातर बैंकों में नहीं, लेकिन बैंक के नियम चेक करना जरूरी है.
हां, FD में पैसा लॉक होता है, Auto Sweep में पैसा Anytime Usable होता है.
हां, आप जब चाहें बैंक जाकर या नेट बैंकिंग के जरिए इस सुविधा को डीएक्टिवेट (बंद) करवा सकते हैं.