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पर्सनल लोन (Personal Loan) तो कभी ना कभी हर कोई लेता है. जब लोगों को किसी तरह का बोनस या एकमुश्त रकम मिलती है तो वह सोचते हैं कि लोन का कुछ हिस्सा चुकता कर दिया जाए. अब सवाल ये उठता है कि क्या ऐसा करना चाहिए? कहीं इससे सिबिल (Cibil Score) खराब तो नहीं हो जाएगा, क्योंकि लोन की अवधि यानी क्रेडिट पीरियड घट जाएगा.
अगर आप लोन का कुछ हिस्सा चुकाने की सोच रहे हैं, तो यह एक एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है. इससे आप पर लगने वाले ब्याज का बोझ कम हो जाता है. वहीं इससे आपके सिबिल पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, ना कि नकारात्मक. तो क्या हर बार पार्ट-पेमेंट करना सही होता है? क्या इससे आपका क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर बनता है? आइए समझते हैं.
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जब आप हर महीने तय EMI से ज्यादा रकम भरते हैं या बीच-बीच में एकमुश्त कुछ रकम भर देते हैं, लेकिन पूरे लोन की रकम नहीं चुकाते, तो उसे पार्ट-पेमेंट कहा जाता है. ये EMI से ऊपर की एक अतिरिक्त रकम होती है जो आपके लोन के मूलधन को घटा देती है, जिसकी वजह से आप पर लगने वाला ब्याज कम हो जाता है.
पार्ट-पेमेंट सीधे क्रेडिट स्कोर को नहीं बढ़ाता, लेकिन यह धीरे-धीरे आपकी क्रेडिट हेल्थ को मजबूत करता है. समय पर EMI भरने और लोन अमाउंट घटने से आपकी फाइनेंशियल छवि बेहतर होती है. ऐसा करने से क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को यह मैसेज जाता है कि आप अपने लोन को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और आसानी से चुका सकते हैं. इससे क्रेडिट रिपोर्ट में पॉजिटिव हिस्ट्री बनती है.
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जब आप कुछ हिस्सा चुकाते हैं, तो बचे हुए लोन की रकम घट जाती है. इससे आपकी क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो कम होता है, जो स्कोर को बढ़ाने में मदद करता है. इससे यह भी दिखता है कि आप जिम्मेदार तरीके से कर्ज संभाल रहे हैं.
अगर आप EMI से ऊपर कुछ अतिरिक्त भुगतान करते रहते हैं, तो लोन जल्दी खत्म हो जाता है. इससे भविष्य में आपका कैश फ्लो बेहतर होता है और दूसरी जरूरतों के लिए पैसे बचते हैं.
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जब आपको सालाना बोनस मिले या कोई अतिरिक्त इनकम हो, तो उस रकम से पार्ट-पेमेंट करना अच्छा विकल्प हो सकता है. इससे ना सिर्फ ब्याज बचता है, बल्कि समय से पहले लोन खत्म करने में भी मदद मिलती है. बता दें, पार्ट पेमेंट से आपका मूल घट जाता है, जिससे आपको ब्याज का फायदा मिलता है.
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वैसे तो पार्ट-पेमेंट फायदेमंद है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कुछ लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी लगती है. तो पार्ट पेमेंट से पहले अपने बैंक से इसके नियम भी समझ लें. साथ ही, अगर आप समय से EMI नहीं भरते और सिर्फ पार्ट-पेमेंट करते हैं, तो इससे क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये दिखाता है कि आप अपनी ईएमआई को लेकर रेगुलर नहीं हैं और डिफॉल्ट करते हैं.