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"क्रेडिट कार्ड मत लेना, फालतू में कर्ज चढ़ जाएगा". ये सलाह आपने अपने दोस्तों, परिवार वालों या किसी करीबी से जरूर सुनी होगी. कई लोगों के मन में क्रेडिट कार्ड को लेकर एक डर बैठा हुआ है कि ये सिर्फ फिजूलखर्ची को बढ़ावा देता है और इंसान को कर्ज के जाल में फंसा देता है. ये बात कुछ हद तक सही है, लेकिन सिर्फ उन लोगों के लिए जो इसका इस्तेमाल बिना सोचे-समझे करते हैं.
अगर आप एक अनुशासित यूजर हैं, तो यही क्रेडिट कार्ड आपके लिए एक बहुत काम का फाइनेंशियल टूल बन सकता है जो न सिर्फ आपकी मुश्किल समय में मदद करेगा, बल्कि आपको ढेर सारे फायदे भी दिलाएगा. जानते हैं क्रेडिट कार्ड के वो 7 फायदे जो आपका ही फायदा कराएंगे.
क्रेडिट स्कोर का सबसे बड़ा फायदा ये है कि अगर आप इसे ठीक से इस्तेमाल करें तो आपका क्रेडिट स्कोर भी बेहतर करता है. एक अच्छा क्रेडिट स्कोर आपको आसानी से और कम ब्याज दर पर लोन दिला सकता है. लेकिन इसके लिए आपको क्रेडिट कार्ड का समय पर बिल चुकाना होगा.
लगभग हर क्रेडिट कार्ड आपके खर्चों पर रिवॉर्ड पॉइंट्स, एयर माइल्स या डायरेक्ट कैशबैक देता है. उदाहरण से समझें- अगर आपका कार्ड हर 100 रुपए खर्च करने पर 1 रिवॉर्ड पॉइंट देता है और 1 रिवॉर्ड पॉइंट की कीमत 25 पैसे है, तो 50,000 रुपए के खर्च पर आपको 500 रिवॉर्ड पॉइंट्स यानी 125 रुपए का फायदा हुआ. कई प्रीमियम कार्ड्स पर ये फायदे कहीं ज्यादा होते हैं. इन पॉइंट्स को आप शॉपिंग वाउचर, फ्लाइट टिकट या प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
क्रेडिट कार्ड आपको एक इंटरेस्ट-फ्री पीरियड (ब्याज-मुक्त अवधि) देता है. इसका मतलब है कि आप आज कुछ खरीदते हैं और उसका भुगतान 45 से 50 दिन बाद तक बिना किसी ब्याज के कर सकते हैं. ये शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए बेहतरीन है. महीने के आखिर में जब सैलरी आने में कुछ दिन बाकी हों और कोई जरूरी खर्च आ जाए, तो क्रेडिट कार्ड आपका सबसे अच्छा दोस्त साबित हो सकता है.
जिंदगी में अचानक आने वाले खर्चे बताकर नहीं आते. कोई मेडिकल इमरजेंसी या अचानक कोई बड़ी जरूरत आने पर जब आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे न हों, तो क्रेडिट कार्ड एक लाइफसेवर की तरह काम करता है. ये आपको तुरंत भुगतान करने की सुविधा देता है, जिसे आप बाद में चुका सकते हैं या EMI में बदलवा सकते हैं. ये एक तरह से आपका प्री-अप्रूव्ड इमरजेंसी लोन है.
आपको 60,000 रुपए का एक नया फोन या 80,000 रुपए का फ्रिज खरीदना है, लेकिन एक साथ इतना पैसा देना मुश्किल है. क्रेडिट कार्ड इस मुश्किल को आसान बना देता है. आप अपने बड़े खर्चों को आसानी से 3, 6, 9 या 12 महीनों की किस्तों (EMI) में बदल सकते हैं. आजकल कई प्रोडक्ट्स पर 'नो-कॉस्ट EMI' का ऑफर भी मिलता है, जिसमें आपको कोई अतिरिक्त ब्याज भी नहीं देना पड़ता.
जेब में हजारों रुपए कैश लेकर घूमना जोखिम भरा हो सकता है. क्रेडिट कार्ड इस जोखिम को खत्म कर देता है. अगर आपका कार्ड खो भी जाता है या चोरी हो जाता है, तो आप एक फोन कॉल पर उसे तुरंत ब्लॉक करवा सकते हैं. आजकल के चिप और पिन वाले कार्ड्स इतने सुरक्षित हैं कि बिना आपके पिन के कोई बड़ा ट्रांजैक्शन नहीं कर सकता. इसके अलावा, ये आपको अपने खर्चों का एक डिजिटल रिकॉर्ड भी देता है, जिससे आपको बजट बनाने में मदद मिलती है.
क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के एक्सक्लूसिव फायदे देती हैं. इनमें शामिल हैं:
सबसे जरूरी नियम है कि हमेशा अपने बिल का पूरा भुगतान (Total Amount Due) आखिरी तारीख से पहले करें. सिर्फ मिनिमम अमाउंट चुकाने की गलती कभी न करें, क्योंकि बाकी बची रकम पर बहुत भारी ब्याज लगता है.
कोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड से कैश कभी न निकालें. इसे 'कैश एडवांस' कहते हैं और इस पर पहले दिन से ही बहुत ज्यादा ब्याज लगना शुरू हो जाता है और एकमुश्त फीस भी लगती है. ये सिर्फ बहुत बड़ी इमरजेंसी के लिए है.
नो-कॉस्ट EMI का मतलब है कि आपको सिर्फ प्रोडक्ट की कीमत किस्तों में चुकानी है, कोई ब्याज नहीं देना है. हालांकि, कुछ बैंक प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं, इसलिए नियम और शर्तें हमेशा ध्यान से पढ़ें.
अगर आप ड्यू डेट तक बिल नहीं चुकाते हैं, तो बैंक आप पर लेट पेमेंट फीस लगाता है और बकाया राशि पर भारी ब्याज वसूलता है. साथ ही, इससे आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब होता है.
अपने खर्चों की आदत को देखें. अगर आप बहुत ज्यादा ट्रैवल करते हैं तो एयर माइल्स वाला कार्ड लें. अगर आप शॉपिंग ज्यादा करते हैं तो रिवॉर्ड्स या कैशबैक वाला कार्ड बेहतर है. अपनी जरूरत के हिसाब से कार्ड चुनें.