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अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. इसे पूरा करने के लिए लोग बैंक से अक्सर Home Loan लेते हैं. होम लोन की अवधि आमतौर पर ज्यादा लंबी होती है. ऐसे में हर महीने EMI देना एक बोझ जैसा बन जाता है. इसके अलावा जितनी लंबी अवधि होगी आपको बैंक को उतना ज्यादा ब्याज चुकाना होता है. ऐसे में आपको लोन काफी महंगा पड़ जाता है. लेकिन अगर आप थोड़ी स्मार्ट प्लानिंग करें तो न सिर्फ अपनी EMI का बोझ कम कर सकते हैं, बल्कि लाखों रुपए का ब्याज भी बचा सकते हैं. यहां जानिए वो असरदार तरीके आपके होम लोन की कमर तोड़कर रख देंगे और ब्याज में जाने वाले लाखों रुपए बचाएंगे.
अगर आपने कुछ साल पहले होम लोन लिया था और तब ब्याज दर ज्यादा थी, तो ये आपके लिए सबसे कारगर तरीका हो सकता है. आज के समय में बैंक प्रतिस्पर्धा के कारण कम ब्याज दरों पर लोन ऑफर कर रहे हैं.
लोन रीफाइनेंसिंग का मतलब है, अपने मौजूदा महंगे लोन को किसी दूसरे बैंक में कम ब्याज दर पर ट्रांसफर करना. इसमें नया बैंक आपके पुराने लोन को चुका देता है और आप नए बैंक को कम ब्याज दर पर नई EMI देना शुरू कर देते हैं. मान लीजिए आपका मौजूदा लोन 8.5% पर है और कोई दूसरा बैंक 7.5% पर लोन दे रहा है, तो 1% का ये अंतर भी लंबी अवधि में आपके लाखों रुपए बचा सकता है. लेकिन लोन ट्रांसफर करने से पहले नए बैंक की प्रोसेसिंग फीस और बाकी चार्जेज वगैरह जरूर जान लें.

होम लोन की EMI का एक बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है. प्री-पेमेंट इस ब्याज के जाल को तोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है. प्री-पेमेंट यानी EMI के अलावा अतिरिक्त भुगतान करना. ये पैसा सीधे आपके मूलधन (Principal Amount) से कम होता है.
जब भी आपको साल में बोनस, इंसेंटिव, बचत या किसी अन्य स्रोत से एकमुश्त रकम मिले, तो उसे फिजूलखर्ची में उड़ाने की बजाय अपने होम लोन के प्री-पेमेंट में इस्तेमाल करें. प्री-पेमेंट से प्रिंसिपल अमाउंट कम होता है और मूलधन कम होने से उस पर लगने वाला ब्याज अपने आप कम हो जाता है, जिससे या तो आपकी EMI घट जाती है या लोन की अवधि कम हो जाती है. वैसे ऐसे मामलों में एक्सपर्ट्स लोन की अवधि कम करने को बेहतर विकल्प मानते हैं क्योंकि अवधि कम करके आप लाखों रुपए ब्याज के बचा लेते हैं.

कई बार हमें लगता है कि बैंक अपने नियमों से टस से मस नहीं होते, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आपका रिकॉर्ड अच्छा है, तो बैंक आपकी बात जरूर सुनता है.
अगर आप कई साल से समय पर अपनी होम लोन EMI चुका रहे हैं और आपका क्रेडिट स्कोर भी अच्छा है, तो आप बैंक के एक भरोसेमंद ग्राहक हैं. आप सीधे अपने बैंक मैनेजर से मिलकर मौजूदा ब्याज दर को कम करने का अनुरोध कर सकते हैं. आप उन्हें दूसरे बैंकों द्वारा दिए जा रहे कम ब्याज दर वाले ऑफर्स का हवाला भी दे सकते हैं. बैंक अपने अच्छे ग्राहकों को खोना नहीं चाहते, इसलिए वे आपकी ब्याज दर में कुछ कमी कर सकते हैं.
अगर आप लोन लेने की योजना बना रहे हैं या हाल ही में लिया है, तो ये तरीके आपके लिए बहुत फायदेमंद हैं. अगर आप पहली बार घर खरीद रहे हैं, तो प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी तमाम सरकारी योजनाओं की जानकारी जरूर लें. इन योजनाओं के तहत सरकार ब्याज पर सब्सिडी देती है, जिससे आपका बोझ काफी कम हो जाता है. इसके अलावा लोन लेते समय कोशिश करें कि आप अपनी तरफ से ज्यादा से ज्यादा डाउन पेमेंट करें. आप जितना ज्यादा डाउन पेमेंट करेंगे, उतना ही कम लोन लेना पड़ेगा. कम लोन का मतलब है, कम मूलधन और शुरुआत से ही एक Manageable EMI.
| तरीका (Method) | सबसे बड़ा फायदा | किसके लिए बेस्ट? | सावधानी |
| लोन रीफाइनेंस | ब्याज दर घटती है, जिससे लाखों की बचत होती है. | जिनका लोन पुरानी और महंगी ब्याज दर पर चल रहा है. | नए बैंक की प्रोसेसिंग फीस और छिपी हुई शर्तों को ध्यान से जांचें. |
| प्री-पेमेंट | मूलधन घटता है, जिससे लोन जल्दी खत्म होता है. | जिन्हें बोनस, इंसेंटिव या कोई एकमुश्त रकम मिली हो. | पता करें कि बैंक प्री-पेमेंट पर कोई पेनल्टी या चार्ज तो नहीं ले रहा है. |
| अवधि बढ़ाना | मासिक EMI का बोझ तुरंत कम हो जाता है. | जिनकी आय अस्थायी रूप से कम हो गई है या आर्थिक तंगी है. | यह एक महंगा सौदा है, क्योंकि कुल ब्याज का बोझ काफी बढ़ जाता है. |
| बैंक से बातचीत | बिना बैंक बदले ब्याज दर कम होने की संभावना. | अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले पुराने और वफादार ग्राहक. | यह पूरी तरह से बैंक के विवेक पर निर्भर करता है, सफलता की गारंटी नहीं है |
अगर आपकी मौजूदा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और हर महीने की EMI देना बहुत मुश्किल हो रहा है, तो लोन डिफॉल्ट करने से अच्छा है कि आप अपने लोन की अवधि बढ़ा लें. ये एक अस्थायी राहत का विकल्प हो सकता है. हालांकि इससे आपको ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ेगा.
आप अपने बैंक से बात करके लोन चुकाने की अवधि (Tenure) को बढ़वा सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर आपका लोन 15 साल का है, तो आप उसे 20 साल का करवा सकते हैं. इससे आपकी मासिक EMI तो कम हो जाएगी और आपको हर महीने थोड़ी राहत मिलेगी. लेकिन ध्यान रहे कि ये एक शॉर्ट-टर्म समाधान है, लॉन्ग-टर्म नहीं. भविष्य में आपके पास जब भी थोड़ा पैसा आए, आप प्रीपेमेंट करके अपने लोन की अवधि को कम जरूर करवा लें, ताकि अपना नुकसान होने से बचा सकें.
आरबीआई के नियमों के अनुसार, फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर कोई भी बैंक प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं ले सकता है. हालांकि, फिक्स्ड रेट वाले लोन पर कुछ शर्तें हो सकती हैं.
जब आप नए लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक एक हार्ड इन्क्वायरी करता है, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर अस्थायी रूप से थोड़ा कम हो सकता है. लेकिन जब आप समय पर नई EMI चुकाते हैं, तो यह फिर से सुधर जाता है.
ये आपकी जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है. अगर आप निवेश करके अपने होम लोन की ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न कमा सकते हैं, तो निवेश एक अच्छा विकल्प है. लेकिन अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो प्री-पेमेंट करके कर्ज मुक्त होना सबसे बेहतर है.
आमतौर पर, आप साल में कितनी भी बार प्री-पेमेंट कर सकते हैं. इसकी कोई सीमा नहीं होती है. आप छोटी-छोटी रकम भी जमा कर सकते हैं.