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लोन आवेदन पर गारंटर के तौर पर बिना सोचे-समझे साइन नहीं करना चाहिए (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
वैसे अक्सर हम अपनों की मदद करने के लिए उनके लोन आवेदन पर गारंटर के तौर पर बिना सोचे-समझे साइन कर देते हैं. तो हमें लगता है कि यह सिर्फ एक छोटा सा अहसान या सम्मान की बात है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक साइन आपकी सालों की सेविंग्स, आपकी संपत्ति और आपके सुकून को दांव पर लगा सकता है?
असल में किसी के लोन की गारंटी लेना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक तरह की बड़ी फाइनेंशियल जिम्मेदारी भी है. तो अगर आप भी किसी के पर्सनल लोन के लिए गारंटर बनने की सोच रहे हैं, तो फिर रुकिए, क्योंकि पहले इसके छिपे हुए रिस्क को अच्छी तरह समझ लें.
आपको बता दें कि लोन गारंटर वह व्यक्ति होता है जो बैंक या फाइनेंशियल संस्थान को यह लिखित गारंटी देता है कि अगर लोन लेने वाला व्यक्ति (Primary Borrower) किश्तें नहीं चुका पाता है, तो उस कर्ज को भरने की पूरी कानूनी जिम्मेदारी आपकी होगी. वैसे बैंक आमतौर पर गारंटर की मांग तब करते हैं जब लोन लेने वाले का क्रेडिट स्कोर खराब हो, उसकी कमाई कम हो या बैंक को उसकी साख पर पूरा भरोसा न हो.
अगर आप किसी के लोन की जिम्मेदारी उठा रहे हैं, तो इन 5 बातों को कभी न भूलें-
अगर कर्जदार ने एक भी किश्त (EMI) मिस की या डिफॉल्ट किया, तो इसका सीधा बुरा असर आपके भी क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है. भले ही आपने खुद कोई लोन न लिया हो, लेकिन गारंटर होने के नाते आपकी क्रेडिट हिस्ट्री भी खराब हो जाएगी, जिससे फ्यूचर में आपको खुद के लिए लोन मिलने में आपको परेशानी हो सकती है.
अगर लोन लेने वाला इंसान गायब हो जाए, तो बैंक कानूनी रूप से आपसे पैसा वसूलने का हकदार है. तो फिर ऐसी स्थिति में आपको अपनी जेब से पूरा बकाया और ब्याज चुकाना पड़ सकता है. तो कई लोग इस बात से अनजान होते हैं और बाद में कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंस जाते हैं.
ये समझना हर किसी के लिए जरूरी है कि अगर लोन डिफॉल्ट होता है और आप भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार बैंक आपकी बचत या संपत्ति (घर, गाड़ी, जमीन) को बेचकर भी अपना पैसा वसूल सकता है. आपकी मेहनत की कमाई दूसरों की गलती की वजह से जा सकती है.
जब आप किसी के गारंटर बनते हैं, तो बैंक इसे आपकी एक लायबिलिटी यानी जिम्मेदारी के रूप में देखता है. तो फिर इससे आपकी खुद की लोन लेने की क्षमता घट जाती है. तो फिर कल को अगर आपको अपने घर या बिजनेस के लिए लोन चाहिए होगा, तो बैंक आपके गारंटर होने की वजह से आपका आवेदन रिजेक्ट कर सकता है.
अक्सर पैसा अच्छे-अच्छे रिश्तों में दरार डाल देता है. तो फिर अगर लोन के कारण से कोई भी फाइनेंशियल विवाद शुरू होता है, तो यह न केवल आपके बैंक बैलेंस को बिगाड़ेगा, बल्कि आपके दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ रिश्ते भी हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं.
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आपको बता दें कि किसी का गारंटर बनने से पहले एक बार नहीं, सौ बार सोचें जरूर. असल में कागजों पर दस्तखत करने से पहले लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें. अगर मन में थोड़ा भी संदेह हो, तो किसी प्रोफेशनल की सलाह लेने में न हिचकिचाएं. इसलिए हमेशा याद रखें, किसी की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन यह आपकी अपनी आर्थिक सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या गारंटर बनने के बाद मैं अपना नाम वापस ले सकता हूं?
बैंक तभी नाम हटाएगा जब उधारकर्ता आपकी जगह कोई दूसरा भरोसेमंद गारंटर ले आए या बैंक अपनी सहमति दे दे.
Q2 अगर गारंटर की मौत हो जाए, तो क्या जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
बैंक बकाया पैसे की वसूली के लिए गारंटर की संपत्ति या उसके वारिसों पर दावा कर सकता है.
Q3 'को-एप्लिकेंट' और 'गारंटर' में क्या अंतर है?
को-एप्लिकेंट शुरू से ही लोन भरने का बराबर का साथी होता है, जबकि गारंटर का काम तब शुरू होता है जब उधारकर्ता फेल हो जाए.
Q4 क्या बैंक गारंटर को बताए बिना लोन की शर्तें बदल सकता है?
अक्सर एग्रीमेंट में ऐसे नियम होते हैं जहां बैंक को बदलाव का हक होता है. इसलिए साइन करने से पहले पेपर जरूर पढ़ें.
Q5 अगर मुझे बैंक को पैसा भरना पड़े, तो क्या मैं उधारकर्ता से वो ले सकता हूं?
कानूनी तौर पर आप उधारकर्ता से वो पैसा वसूलने का हक रखते हैं जो आपने उसकी जगह बैंक को चुकाया है.