सिर्फ रीपेमेंट हिस्‍ट्री नहीं है वजह! ये 5 फैक्‍टर्स भी अच्‍छे-भले Cibil Score को पहुंचा सकते हैं लाल निशान पर

एक अच्छा सिबिल स्कोर सिर्फ समय पर भुगतान करने से नहीं बनता. इसके लिए आपको दूसरे फैक्‍टर्स जैसे CUR, कम समय में बार-बार लोन के लिए आवेदन करना आदि कुछ बातों पर भी ध्‍यान देना होता है. यहां जानिए ऐसे फैक्‍टर्स जो आपके अच्‍छे भले सिबिल को खराब करने का दम रखते हैं.
सिर्फ रीपेमेंट हिस्‍ट्री नहीं है वजह! ये 5 फैक्‍टर्स भी अच्‍छे-भले Cibil Score को पहुंचा सकते हैं लाल निशान पर

जब भी सिबिल या क्रेडिट स्कोर की बात होती है, तो ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि समय पर लोन की ईएमआई (EMI) और क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने से ये अच्छा बना रहता है. ये बात सही है, लेकिन अधूरी है. आपकी Repayment History सिबिल स्कोर को तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर तो है, लेकिन इकलौता नहीं. इसके अलावा भी कई ऐसे फैक्टर्स हैं, जिन पर अगर ध्यान न दिया जाए तो वो आपके अच्छे भले सिबिल स्कोर को लाल निशान पर ला सकते हैं.

कई बार लोग इन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं और जब लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तो कम सिबिल स्कोर की वजह से उनका एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाता है. इसलिए, ये जरूरी है कि आप उन सभी फैक्टर्स के बारे में जानें जो आपके क्रेडिट हेल्थ पर असर डालते हैं. आइए, समझते हैं वो 5 अहम फैक्टर्स जो आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री के अलावा आपके सिबिल स्कोर को बिगाड़ सकते हैं.

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1. ऊंचा क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR)

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) का मतलब है कि आपको मिली हुई कुल क्रेडिट लिमिट में से आप कितना इस्तेमाल कर रहे हैं. इसे प्रतिशत में मापा जाता है और ये आपके सिबिल स्कोर पर 30% तक का असर डाल सकता है.

कैलकुलेशन का फॉर्मूला

(आपके सभी क्रेडिट कार्ड्स पर कुल बकाया रकम / आपके सभी क्रेडिट कार्ड्स की कुल लिमिट) X 100

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं. एक की लिमिट 1 लाख रुपए है और दूसरे की 50,000 रुपए. इस तरह आपकी कुल क्रेडिट लिमिट 1,50,000 रुपए हुई. अगर महीने के अंत में पहले कार्ड पर 40,000 रुपए और दूसरे पर 20,000 रुपए का बिल बनता है, तो आपका कुल बकाया 60,000 रुपए हुआ.

आपका CUR होगा: (60,000 / 1,50,000) X 100 = 40%

फाइनेंशियल एक्‍सपर्ट सलाह देते हैं कि आपको अपना CUR हमेशा 30% से नीचे रखना चाहिए. 30% से ज्यादा का CUR ये संकेत देता है कि आप क्रेडिट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं और शायद आपको वित्तीय प्रबंधन में मुश्किल आ रही है. इससे बैंक आपको एक जोखिम भरा ग्राहक मान सकते हैं, जिसका सीधा असर आपके स्कोर पर पड़ता है.

2. बहुत ज्यादा हार्ड-इन्क्वायरी

जब भी आप किसी लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक या वित्तीय संस्थान आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते हैं. इसे 'हार्ड-इन्क्वायरी' कहते हैं. हर हार्ड-इन्क्वायरी आपके क्रेडिट स्कोर को कुछ पॉइंट्स कम कर सकती है. एक-दो इन्क्वायरी से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कम समय में बहुत सारे लोन या कार्ड के लिए अप्लाई करना आपके लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है.

अगर आप कम समय में बार-बार क्रेडिट के लिए आवेदन करते हैं, तो ये आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो जाता है. इससे कर्जदाताओं को लगता है कि आप किसी भी हालत में कर्ज लेना चाहते हैं, जो एक फाइनेंशियल अन्‍स्‍टेबिलिटी का संकेत है. आमतौर पर, दो साल की अवधि में छह या उससे ज्यादा हार्ड-इन्क्वायरी आपके नए क्रेडिट आवेदनों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं. वहीं, होम लोन या कार लोन के मामले में, अगर आप 14 से 45 दिनों के भीतर कई बैंकों से पूछताछ करते हैं, तो इसे आमतौर पर एक ही इन्क्वायरी माना जाता है.

Cibil

3. खराब क्रेडिट मिक्स

क्रेडिट मिक्स का मतलब है कि आपके पास कितने तरह के लोन हैं. क्रेडिट दो तरह का होता है - सिक्योर्ड (जैसे होम लोन, कार लोन) और अनसिक्योर्ड (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड). एक अच्छा क्रेडिट मिक्स आपके स्कोर पर पॉजिटिव असर डालता है. ये आपके सिबिल स्कोर का लगभग 10% हिस्सा तय करता है. अगर आपके पोर्टफोलियो में सिर्फ अनसिक्योर्ड लोन, जैसे कई पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड हैं, तो इसे एक खराब क्रेडिट मिक्स माना जाता है. ये दिखाता है कि आपकी कर्ज पर निर्भरता ज्यादा है. वहीं, सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन का एक संतुलित मिश्रण ये बताता है कि आप अलग-अलग तरह की वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम हैं.

4. क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां

कई बार ऐसा होता है कि आपकी कोई गलती न होने पर भी आपका सिबिल स्कोर कम हो जाता है. इसकी वजह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में मौजूद गलतियां हो सकती हैं. इन गलतियों में आपके पर्सनल डीटेल्‍स में गलती, गलत या डुप्लीकेट अकाउंट का दिखना, या किसी ऐसे लोन का जिक्र होना जो आप चुका चुके हैं, शामिल हो सकता है.

5. किसी और के लोन में गारंटर बनना

जब आप किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन में को-साइनर या गारंटर बनते हैं, तो आप कानूनी रूप से उस कर्ज के लिए जिम्मेदार हो जाते हैं. अगर मुख्य कर्जदार समय पर EMI नहीं चुकाता है, तो इसका सीधा असर आपके सिबिल स्कोर पर भी पड़ता है.वो लोन आपके भी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई देता है और आपकी कुल कर्ज की देनदारी को बढ़ा देता है.

अगर आवेदक डिफॉल्ट करता है, तो न केवल आपका स्कोर खराब होगा, बल्कि बैंक आपसे उस बकाया राशि की वसूली भी कर सकता है.इसलिए, किसी के लोन में गारंटर बनने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें और सुनिश्चित करें कि मुख्य आवेदक लोन चुकाने में सक्षम है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. मेरा क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो 30% से ज्यादा है, क्या ये बुरा है?

हां, 30% से ज्यादा का CUR आपके सिबिल स्कोर के लिए ठीक नहीं है. ये दर्शाता है कि आप क्रेडिट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. कोशिश करें कि इसे हमेशा 30% से नीचे रखें.

2. मैं एक साल में कितने लोन के लिए अप्लाई कर सकता हूं?

इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं है, लेकिन कम समय में कई बार लोन के लिए अप्लाई करने से बचना चाहिए. हर आवेदन पर एक हार्ड-इन्क्वायरी होती है जो आपके स्कोर को कम करती है. जरूरत पड़ने पर ही आवेदन करें.

3. क्या सिर्फ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने से मेरा क्रेडिट मिक्स खराब होता है?

हां, अगर आपके पास सिर्फ क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन हैं, तो आपका क्रेडिट मिक्स संतुलित नहीं माना जाएगा. एक सिक्योर्ड लोन (जैसे बाइक लोन या छोटा गोल्ड लोन) जोड़ने से इसमें सुधार हो सकता है.

4. मैं अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में गलती कैसे सुधार सकता हूं?

आप CIBIL की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन डिस्प्यूट फॉर्म भर सकते हैं. आपको गलती का सबूत देना होगा, जिसके बाद CIBIL संबंधित बैंक से संपर्क करके इसे ठीक करेगा.

5. अगर मैं किसी के लोन में गारंटर हूं और वो पेमेंट नहीं करता तो क्या होगा?

अगर आवेदक भुगतान नहीं करता है, तो बैंक आपसे EMI चुकाने के लिए कहेगा. भुगतान न करने पर, ये डिफॉल्ट आपके सिबिल स्कोर को भी उतना ही खराब करेगा जितना मुख्य आवेदक का.

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