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देश के 12 में से 11 सरकारी बैंकों ने लोगों के सेविंग्स बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस कम होने पर सिर्फ पेनाल्टी लगाकर करीब 9 हजार करोड़ रुपये की कमाई कर लिया है. वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी है. चूंकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 2020 से ही अपने कस्टमर्स से लो मिनिमम बैलेंस होने पर चार्ज लेना बंद कर दिया है. इसलिए ये आंकड़ा SBI को छोड़कर बाकि सभी सरकारी बैंकों का है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, FY21 से लेकर FY25 के बीच इन सरकारी बैंकों ने कस्टमर्स से कुल 8,932.98 करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में वसूले.

आपको बता दें कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि न रखने पर दंडात्मक शुल्क लगाने और बैंकों में ग्राहक सेवा के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं. इसे देखते हुए कुछ सरकारी मंथली मिनिमम बैलेंस मेंटेंन न करने पर ग्राहकों से जुर्माना वसूलते हैं, जबकि कुछ अन्य तिमाही आधार पर मिनिमम बैलेंस मेंटेंन न करने पर ये चार्ज लगाते हैं. हालांकि, प्रधानमंत्री जन धन खाता, मूल बचत बैंक जमा खाते (BSBDA) और सैलरी अकाउंट जैसे खातों पर ये चार्ज नहीं लगाए जाते हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, "वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने बैंकों को न्यूनतम औसत वैलेंस (एमएबी) न बनाए रखने पर दंडात्मक शुल्कों को युक्तिसंगत बनाने के मुद्दे पर विचार करने की सलाह दी है, जिसमें अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों को राहत प्रदान करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है."
हालांकि, 11 में सात सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को इसमें राहत दे दी है. भारतीय स्टेट बैंक ने मार्च 2020 में औसत मासिक न्यूनतम शेष राशि शुल्क लेना बंद कर दिया था. केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही से ऐसा ही किया.