एक ही रूट पर ₹8000 और ₹18000 का एयर टिकट, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, सरकार से कहा- 'यात्रियों को दें राहत'

सुप्रीम कोर्ट ने देश में हवाई टिकटों की अनियंत्रित और आसमान छूती कीमतों पर चिंता व्यक्त की है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के किरायों में भारी अंतर (जैसे ₹8,000 बनाम ₹18,000) का उदाहरण देते हुए सरकार से नियमों में सुधार करने को कहा है.
एक ही रूट पर ₹8000 और ₹18000 का एयर टिकट, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, सरकार से कहा- 'यात्रियों को दें राहत'

सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस कंपनियों द्वारा मनमाने ढंग से टिकट के दाम बढ़ाने और एक ही रूट पर भारी अंतर वसूलने पर जताई कड़ी नाराजगी. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

देश में हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हवाई टिकटों (Air Tickets) के लगातार बढ़ते दामों और त्योहारों या छुट्टियों के सीजन में एयरलाइंस की तरफ से मनमाना किराया वसूले जाने पर गहरी चिंता जताई है.

शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि विमान किरायों में एक तर्कसंगत संतुलन होना चाहिए, ताकि आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ न पड़े. न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करने और यात्रियों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

अदालत में क्या हुआ?

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणियां कीं. याचिका में आरोप लगाया गया था कि एयरलाइंस कंपनियां छुट्टियों और त्योहारों के दौरान यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूलती हैं.

किराए का चौंकाने वाला अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक ही रूट पर कई एयरलाइंस के किरायों में मौजूद भारी असमानता पर सवाल उठाया. अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा, "यह बेहद चिंताजनक है कि एक ही डेस्टिनेशन (Destination) के लिए एक एयरलाइन जहां ₹8,000 चार्ज कर रही है, वहीं दूसरी एयरलाइन उसी रूट और समय के लिए ₹18,000 वसूल रही है. इस पर नियंत्रण होना जरूरी है."

सरकार का पक्ष और नया कानून

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है. उन्होंने जानकारी दी कि:

  • नया भारतीय वायुयान अधिनियम (Indian Aircraft Act) जनवरी 2025 से देश में लागू किया जा चुका है.
  • इस नए कानून के तहत विमान किरायों को नियंत्रित और संतुलित करने के लिए नए नियमों का मसौदा (Drafting) तैयार किया जा रहा है.
  • सरकार का उद्देश्य एयरलाइंस की परिचालन लागत और यात्रियों के हितों के बीच एक सही संतुलन बनाना है.

Conclusion

अक्सर 'डायनेमिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) के नाम पर एयरलाइंस कंपनियाँ ऐन वक्त पर टिकट बुक करने वाले या त्योहारों में घर जाने वाले यात्रियों से भारी रकम वसूलती हैं. सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख देश के लाखों हवाई यात्रियों के लिए एक उम्मीद की किरण है. यदि नए विमानन नियमों के तहत किरायों की एक ऊपरी सीमा (Cap) तय कर दी जाती है, तो इससे न केवल हवाई सफर अधिक सुलभ होगा बल्कि एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 फ्लाइट टिकटों में 'डायनेमिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) क्या होती है?

यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें सीटों की मांग बढ़ने पर टिकट के दाम अपने आप बढ़ने लगते हैं; यही कारण है कि त्योहारों या अंतिम समय में टिकट महंगे मिलते हैं.

Q2 अगर मेरी फ्लाइट एयरलाइन की गलती से कैंसिल हो जाए, तो मेरे क्या अधिकार हैं?

ऐसी स्थिति में एयरलाइन को या तो आपको अगली उपलब्ध फ्लाइट में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के सीट देनी होगी या फिर टिकट का पूरा पैसा वापस (Full Refund) करना होगा.

Q3 कनेक्टिंग फ्लाइट (Connecting Flight) छूटने पर क्या एयरलाइन जिम्मेदारी लेती है?

अगर दोनों फ्लाइट्स एक ही पीएनआर (PNR) पर बुक हैं और पहली फ्लाइट की देरी के कारण दूसरी छूटी है, तो एयरलाइन आपको अगली फ्लाइट में मुफ्त सीट और जरूरत पड़ने पर होटल देगी.

Q4 केबिन बैगेज (Hand Baggage) और चेक-इन बैगेज में क्या अंतर होता है?

केबिन बैगेज वह छोटा बैग है जिसे आप अपने साथ विमान के अंदर ले जाते हैं, जबकि चेक-इन बैगेज बड़ा सामान होता है जिसे काउंटर पर जमा कर दिया जाता है.

Q5 फ्लाइट के भीतर 'नो-फ्लाई लिस्ट' (No-Fly List) क्या होती है?

विमान के अंदर चालक दल (Crew) या अन्य यात्रियों के साथ बदसलूकी या हिंसक व्यवहार करने वाले यात्रियों को इस लिस्ट में डाल दिया जाता है, जिससे उनके हवाई सफर करने पर प्रतिबंध लग जाता है.

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