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भारी कर्ज की वजह से बंद हो गई ये एयरलाइंस
अमेरिका की मशहूर बजट एयरलाइन 'स्पिरिट एयरलाइंस' (Spirit Airlines) ने शनिवार तड़के एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने ऑपरेशन पूरी तरह बंद कर दिए हैं. कंपनी ने साफ कर दिया है कि वह अब अपने कारोबार को समेटने (Wind-down) की प्रक्रिया शुरू कर रही है. यह खबर उन लाखों यात्रियों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो सस्ती हवाई यात्रा के लिए स्पिरिट पर निर्भर थे.
शनिवार सुबह जारी एक आधिकारिक बयान में एयरलाइन ने कहा, "सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और ग्राहक सेवा (Customer Service) अब उपलब्ध नहीं है." एयरलाइन ने अपनी बुकिंग वेबसाइट को भी हटा दिया है और उसकी जगह रिफंड और अन्य जानकारी के लिए एक गाइडलाइन पेज लगा दिया है.
स्पिरिट एयरलाइंस पिछले काफी समय से वित्तीय संकट से जूझ रही थी. हालांकि कंपनी को उम्मीद थी कि वह इस साल बैंकप्सी (दिवालियापन) की स्थिति से बाहर निकल आएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. एयरलाइन के बंद होने के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं.
तेल की बढ़ती कीमतें: हाल के महीनों में कच्चे तेल के दामों में आए उछाल ने एयरलाइन की कमर तोड़ दी. फ्यूल कॉस्ट बढ़ने से कंपनी का मुनाफा खत्म हो गया और घाटा बढ़ता चला गया.
सरकारी और कर्जदाताओं के साथ बातचीत फेल: एयरलाइन प्रशासन अमेरिकी सरकार और अपने कर्जदाताओं (Lenders) से फंडिंग की गुहार लगा रहा था, लेकिन लंबी बातचीत के बाद भी कोई रास्ता नहीं निकला.
बदलती मांग: कोरोना के बाद हवाई यात्रा के पैटर्न में बदलाव आया है. यात्री अब सिर्फ 'सस्ता' नहीं देख रहे, बल्कि बेहतर सुविधाओं की ओर भी मुड़ रहे हैं, जिससे स्पिरिट का 'अल्ट्रा-लो-कॉस्ट' मॉडल पिछड़ने लगा था.
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन और कर्जदाताओं के बीच ठन गई. सरकार ने स्पिरिट को बचाने के लिए $500 मिलियन (करीब 4200 करोड़ रुपये) के लोन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन शर्त यह थी कि सरकार एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी लेगी.
शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था, "हम एक सख्त डील कर रहे हैं. या तो यह होगा, या नहीं होगा. ऐसा लगता है कि दूसरे कर्जदाता (Bondholders) इसमें अड़ंगा डाल रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी प्राथमिकता कम हो जाएगी. लेकिन हम (सरकार) सबसे पहले आते हैं." अंत में यह बातचीत बेनतीजा रही और स्पिरिट के पास ताला लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.
अगर आपने स्पिरिट एयरलाइंस में टिकट बुक कराई थी, तो आपके लिए कंपनी ने कुछ निर्देश जारी किए हैं-
एयरपोर्ट न जाएं: एयरलाइन ने साफ तौर पर कहा है कि यात्री एयरपोर्ट न पहुंचें क्योंकि वहां अब कोई स्टाफ मदद के लिए मौजूद नहीं होगा.
रिफंड की प्रक्रिया: कंपनी के मुताबिक, जिन्होंने कार्ड से पेमेंट किया है, उनके रिफंड की प्रक्रिया ऑटोमैटिक शुरू कर दी जाएगी. हालांकि, इसमें कितना समय लगेगा, यह अभी साफ नहीं है.
ऑनलाइन सहायता: यात्री रिफंड, सामान (Baggage) के दावों और अन्य जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट पर दिए गए लिंक का उपयोग कर सकते हैं.
कानूनी दावा: जिन लोगों या वेंडरों का बड़ा बकाया है, उन्हें अब कोर्ट की कार्यवाही (Bankruptcy Proceedings) के जरिए ही अपना पैसा वापस पाने की उम्मीद रखनी होगी.
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स्पिरिट एयरलाइंस का बंद होना अमेरिकी विमानन इतिहास की एक बड़ी घटना है. पिछले 34 वर्षों से इस एयरलाइन ने 'नो-फ्रिल्स' (बिना फालतू सुविधाओं के) मॉडल को घर-घर पहुंचाया था. इन्होंने दिखाया था कि कैसे एक मिडिल क्लास आदमी भी बेहद कम पैसों में हवाई सफर कर सकता है.
कंपनी ने अपने विदाई संदेश में भावुक होते हुए कहा, "हमें गर्व है कि पिछले 34 वर्षों में हमारे अल्ट्रा-लो-कॉस्ट मॉडल ने इंडस्ट्री पर गहरा प्रभाव डाला. हमें उम्मीद थी कि हम अपने मेहमानों की सेवा कई और वर्षों तक कर पाएंगे, लेकिन अब यह संभव नहीं है."
स्पिरिट के जाने से अमेरिका में सस्ती उड़ानों का विकल्प कम हो जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अन्य एयरलाइंस जैसे फ्रंटियर या साउथवेस्ट पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले समय में हवाई टिकटों के दाम बढ़ सकते हैं. साथ ही, हजारों कर्मचारियों की नौकरियों पर भी संकट आ गया है, जो इस 'येलो बर्ड' के साथ सालों से जुड़े थे.
कुल मिलाकर, स्पिरिट का गिरना यह याद दिलाता है कि एविएशन सेक्टर कितना जोखिम भरा है. जहां एक तरफ ईंधन की कीमतें और दूसरी तरफ कर्ज का बोझ किसी भी बड़ी कंपनी को रातों-रात अर्श से फर्श पर ला सकता है. फिलहाल, स्पिरिट के यात्रियों के लिए यह 'सस्ती उड़ान' एक महंगा और कड़वा अनुभव साबित हुई है.