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मुंबई के उपनगरीय जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट को एक वरिष्ठ नागरिक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. मामला 2020 का है, जब यात्री को गलत टिकट जारी किया गया था, जिससे उन्हें मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
घाटकोपर निवासी यह यात्री 5 दिसंबर, 2020 को मुंबई से दरभंगा और 7 दिसंबर को वापसी के लिए स्पाइसजेट की टिकट बुक कर चुके थे. दरभंगा की यात्रा तो सफल रही, लेकिन खराब मौसम के चलते वापसी की फ्लाइट रद्द कर दी गई. यात्री ने एयरलाइन से वैकल्पिक व्यवस्था का अनुरोध किया, क्योंकि उन्हें 8 दिसंबर को पीएचडी की ऑनलाइन परीक्षा देनी थी.
स्पाइसजेट ने उन्हें पटना से कोलकाता और फिर कोलकाता से मुंबई की फ्लाइट का टिकट दिया. लेकिन जब वे पटना पहुंचे, तो एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि उन्हें जो टिकट दिया गया है, वह गलत है. कोलकाता से मुंबई की उड़ान उस समय निकल चुकी थी, जब वे कोलकाता पहुंचे ही नहीं थे.
इस लापरवाही के कारण उन्हें अगली सुबह अपने पैसे से नई फ्लाइट लेनी पड़ी और परीक्षा भी छूट गई. यात्री ने एयरलाइन पर सेवा में कमी और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की. उन्होंने टिकट राशि की वापसी के अलावा मानसिक पीड़ा के लिए दो लाख रुपये और मुकदमे की लागत की मांग की.
स्पाइसजेट ने अपने बचाव में कहा कि फ्लाइट रद्द होना उनके नियंत्रण से बाहर की बात थी और उन्होंने मुफ्त में वैकल्पिक टिकट भी दिया. उन्होंने यह भी दावा किया कि यात्री को टिकट की पूरी राशि एजेंसी के जरिये लौटा दी गई थी.
हालांकि, आयोग ने कहा कि फ्लाइट रद्द होना भले ही मजबूरी रही हो, लेकिन गलत टिकट जारी करना एयरलाइन की सीधी लापरवाही और सेवा में कमी है. आयोग ने माना कि इस गलती के कारण यात्री को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि मानसिक तनाव और परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसर से भी हाथ धोना पड़ा.
इसलिए 17 जून को आयोग ने आदेश दिया कि स्पाइसजेट यात्री को 25,000 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 5,000 रुपये मुकदमे की लागत के रूप में भुगतान करे. बता दें कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूती से स्थापित करता है और यह संदेश देता है कि सेवा में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. खासकर तब, जब उसका असर किसी व्यक्ति की शिक्षा या जीवन के अन्य अहम पहलुओं पर पड़ता है.