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SpiceJet Seaplane: देश में एक बार फिर से सी-प्लेन (Seaplane) यानी पानी पर उतरने और वहां से उड़ान भरने वाले हवाई जहाज की रोमांचक सेवा शुरू होने जा रही है. इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे अच्छी खबर स्पाइसजेट (SpiceJet) के लिए आ रही है, जो इस सेक्टर में फिर से उड़ान भरने को तैयार है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि अक्टूबर तक देश में कम से कम दो रूट्स पर सी-प्लेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा.
क्या है पूरी खबर और कब से शुरू होगी सर्विस?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर तक दो ऑपरेटरों को सी-प्लेन मिलने की पूरी संभावना है, जिनमें स्पाइसजेट का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने हाल ही में पूर्वी क्षेत्र के नागरिक उड्डयन मंत्रियों के एक सम्मेलन में यह बड़ा ऐलान किया.
उन्होंने कहा, "देश में पहले भी सी-प्लेन का संचालन हुआ था, लेकिन वह सिर्फ एक रूट तक ही सीमित था. अब सरकार ने सी-प्लेन चलाने के लिए दिशानिर्देशों को बहुत सरल बना दिया है. हमें उम्मीद है कि अक्टूबर तक हमारे पास देश में दो सी-प्लेन होंगे जो अपनी सेवाएं दे रहे होंगे."
पहले फेज में कहां-कहां उड़ेंगे ये अनोखे हवाई जहाज?
सरकार का लक्ष्य सिर्फ एक-दो जगह नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने में मौजूद खूबसूरत जल स्रोतों को हवाई मार्ग से जोड़ना है. पहले चरण (Phase 1) में इन तीन राज्यों पर फोकस किया जा रहा है:
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: सोचिए, एक द्वीप से दूसरे द्वीप तक जाने के लिए अब आपको फेरी का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सी-प्लेन आपको सीधे एक द्वीप के पानी से उठाकर दूसरे द्वीप के पानी में उतार देगा. यह अंडमान के टूरिज्म के लिए एक 'गेम-चेंजर' साबित होगा.
केरल: 'गॉड्स ओन कंट्री' कहे जाने वाले केरल के खूबसूरत बैकवॉटर्स (Backwaters) सी-प्लेन के लिए एकदम सही जगह हैं. पर्यटक अब हवा से इन शांत पानी के नजारों का लुत्फ उठाते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे.
आंध्र प्रदेश: अपनी लंबी तटरेखा और सुंदर झीलों के साथ, आंध्र प्रदेश में भी सी-प्लेन पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं.
इसके अलावा, मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस सेवा का विस्तार ओडिशा की चिल्का झील और पूरे पूर्वी तट पर भी किया जा सकता है.
पहले चरण की सफलता के बाद, सरकार ने दूसरे चरण (Phase 2) के लिए भी अपनी कमर कस ली है. दूसरे चरण में इन राज्यों को शामिल करने का लक्ष्य है:
पश्चिम बंगाल: सुंदरबन के मैंग्रोव जंगलों को हवाई मार्ग से जोड़ने की कल्पना ही रोमांचक है.
गुजरात: आपको याद होगा, कुछ साल पहले गुजरात में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के लिए सी-प्लेन सेवा शुरू की गई थी. अब इसे और विस्तार दिया जा सकता है.
महाराष्ट्र: मुंबई की विशाल तटरेखा और आसपास की झीलें भी सी-प्लेन संचालन के लिए बेहतरीन लोकेशन हैं.
आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि क्या सी-प्लेन किसी भी तालाब या नदी में उतर सकता है? केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब इसके लिए नियम बहुत आसान कर दिए गए हैं.
पानी की गहराई: किसी भी जल स्रोत में जहां पानी की गहराई 5 फीट से ज्यादा हो.
लैंडिंग की जगह: और उतरने के लिए कम से कम 200 मीटर की खुली जगह हो.
ऐसी किसी भी जगह पर 'वॉटरड्रोम' (Waterdrome) यानी पानी पर बना एयरपोर्ट स्थापित किया जा सकता है. सरकार ने वॉटरड्रोम बनाने, पायलटों को ट्रेनिंग देने और सी-प्लेन संचालन से जुड़े सभी नियमों को सरल बना दिया है ताकि ज्यादा से ज्यादा प्राइवेट कंपनियां इस सेक्टर में आने के लिए प्रोत्साहित हों.
यह सिर्फ एक रोमांचक यात्रा का साधन नहीं है, बल्कि इसके कई बड़े फायदे हैं:
टूरिज्म को मिलेगा रॉकेट जैसा बूस्ट: भारत में कई खूबसूरत झीलें, नदियां और द्वीप ऐसे हैं, जहां एयरपोर्ट बनाना संभव नहीं है. सी-प्लेन इन अनछुई जगहों को सीधे हवाई मार्ग से जोड़ देगा, जिससे वहां पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा.
लास्ट-मील कनेक्टिविटी: यह दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने का एक बेहतरीन जरिया बनेगा.
पायलटों की बंपर मांग: भारत में एविएशन सेक्टर बहुत तेजी से बढ़ रहा है.
मंत्री नायडू ने बताया, "इस समय देश में 1,700 नए विमानों का ऑर्डर दिया गया है. हर एक विमान के लिए 20 से 30 पायलटों की जरूरत होती है. मतलब, हमें हर साल अकेले भारत की मांग पूरी करने के लिए 3,000 नए पायलट तैयार करने होंगे."
इसी मांग को देखते हुए, मंत्रालय अक्टूबर से देश में काम कर रहे सभी फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTOs) के लिए एक रैंकिंग प्रणाली भी शुरू करने जा रहा है, ताकि ट्रेनिंग की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो सके.
निष्कर्ष (Conclusion)
कुल मिलाकर, भारत के आसमान (और अब पानी पर भी) में एक नई क्रांति होने जा रही है. सी-प्लेन सेवा का फिर से शुरू होना न केवल यात्रियों के लिए एक नया और रोमांचक अनुभव होगा, बल्कि यह देश के पर्यटन और कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा. तो अगली बार जब आप किसी छुट्टी की योजना बनाएं, तो क्या पता आपकी फ्लाइट किसी एयरपोर्ट पर नहीं, बल्कि किसी शांत झील के पानी में लैंड करे.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: सी-प्लेन क्या होता है?
जवाब: सी-प्लेन एक ऐसा हवाई जहाज होता है जिसे जमीन पर रनवे की बजाय पानी की सतह पर उतरने और वहां से उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
सवाल 2: यह सेवा भारत में कब से शुरू हो रही है?
जवाब: केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक कम से कम दो रूट्स पर यह सेवा शुरू होने की पूरी संभावना है.
सवाल 3: क्या सी-प्लेन का सफर महंगा होगा?
जवाब: शुरुआती तौर पर, यह सामान्य उड़ानों से थोड़ा महंगा हो सकता है क्योंकि यह एक विशेष प्रकार की सेवा है. हालांकि, जैसे-जैसे इसका विस्तार होगा, कीमतों में कमी आने की उम्मीद है.
सवाल 4: क्या पानी पर उतरना सुरक्षित है?
जवाब: जी हाँ, यह पूरी तरह से सुरक्षित है. सी-प्लेन को विशेष रूप से पानी पर संचालन के लिए बनाया गया है और इसके लिए पायलटों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. सरकार ने सुरक्षा नियमों को सरल लेकिन सख्त बनाया है.
सवाल 5: मैं सी-प्लेन का टिकट कहां से बुक कर पाऊंगा?
जवाब: जब यह सेवा शुरू हो जाएगी, तो आप संबंधित एयरलाइन (जैसे स्पाइसजेट) की आधिकारिक वेबसाइट या अन्य ट्रैवल पोर्टल्स से इसकी टिकट बुक कर पाएंगे.
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