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हवाई जहाज का सफर हमेशा से रफ्तार और सहूलियत का प्रतीक रहा है, लेकिन साल 2025 में भारतीय एविएशन सेक्टर की अपनी रफ्तार कुछ डगमगाती दिख रही है. रेटिंग एजेंसी ICRA ने सोमवार को एक ऐसी रिपोर्ट जारी की है जिसने एयरलाइन कंपनियों की नींद उड़ा दी है.
ICRA का कहना है कि घरेलू एयरलाइन इंडस्ट्री इस साल करीब 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये के घाटे में डूब सकती है. यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि कुछ समय पहले तक माना जा रहा था कि यह घाटा 9,500 से 10,500 करोड़ रुपये के आसपास सिमट जाएगा. अचानक घाटे का यह अनुमान लगभग दोगुना होना बताता है कि आसमानी सफर के पीछे की कहानी इस वक्त काफी चुनौतीपूर्ण है.
हवाई सफर करने वालों की संख्या में वैसी बढ़ोतरी नहीं दिख रही जैसी उम्मीद की गई थी. ICRA ने घरेलू पैसेंजर ट्रैफिक की ग्रोथ का अनुमान 4-6 फीसदी से घटाकर अब सिर्फ 0-3 फीसदी कर दिया है. इसके पीछे कई दुखद और तकनीकी कारण रहे हैं. जून के महीने में हुआ एयर इंडिया बोइंग 787-8 का विमान हादसा एक बड़ी त्रासदी थी, जिसने यात्रियों के मन में डर पैदा कर दिया. हादसे के तुरंत बाद के समय में लोगों ने हवाई सफर से दूरी बनाना बेहतर समझा.
इसके अलावा, इसी महीने दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की करीब 4,500 उड़ानों का रद्द होना भी एक बड़ा झटका रहा. भले ही यह पूरे साल की उड़ानों का एक छोटा हिस्सा (0.4%) हो, लेकिन इसने यात्रियों के भरोसे और उनके ट्रैवल प्लान को बुरी तरह प्रभावित किया है.
सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, बल्कि विदेशों में होने वाले हवाई सफर पर भी सुस्ती के बादल मंडरा रहे हैं. ICRA ने अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ के अनुमान को भी 13-15 फीसदी से घटाकर 7-9 फीसदी कर दिया है. सीमा पर बढ़ते तनाव और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (Tariffs) की वजह से बिजनेस ट्रैवल में कमी आई है. जब व्यापारिक यात्राएं कम होती हैं, तो एयरलाइंस के प्रीमियम रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ता है.
एयरलाइन कंपनियों के लिए मुसीबत सिर्फ कम यात्री ही नहीं हैं, बल्कि डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया भी है. चूंकि विमानों का लीज रेंट, स्पेयर पार्ट्स और ईंधन से जुड़े कई खर्चे डॉलर में होते हैं, इसलिए रुपये की वैल्यू गिरने से कंपनियों को भारी फॉरेन एक्सचेंज लॉस (Forex Loss) हो रहा है. यही वजह है कि ICRA को अपने घाटे के अनुमान में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ी है.
हालांकि, अगर सिर्फ नवंबर 2025 के आंकड़ों को देखें, तो थोड़ी राहत जरूर दिखती है. नवंबर में करीब 1.54 करोड़ लोगों ने घरेलू उड़ानों में सफर किया, जो पिछले साल के मुकाबले 8.4 फीसदी ज्यादा है. वहीं, अक्टूबर के मुकाबले भी इसमें 10.1 फीसदी की बढ़त रही. अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच कुल 10.96 करोड़ यात्रियों ने सफर किया है. अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी 8.3 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन आने वाले महीनों की अनिश्चितता ने ओवरऑल रेटिंग को कमजोर कर दिया है.
भारतीय एविएशन सेक्टर इस वक्त एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है. एक तरफ तकनीकी गड़बड़ियां और हादसे यात्रियों का भरोसा तोड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और रुपये की गिरावट कंपनियों की जेब पर भारी पड़ रही है. ICRA की रिपोर्ट यह साफ करती है कि आने वाले समय में एयरलाइंस को अपनी ऑपरेशनल क्षमता सुधारने और यात्रियों का भरोसा फिर से जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो 18,000 करोड़ रुपये का यह घाटा इंडस्ट्री की सेहत को लंबे समय तक खराब रख सकता है.
Q: ICRA (ICRA) ने इस साल एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए कितना घाटा बताया है?
A: ICRA के ताजा अनुमान के मुताबिक, घरेलू एयरलाइन इंडस्ट्री को वित्त वर्ष 2026 में 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये का नेट लॉस हो सकता है.
Q: पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ के अनुमान में क्या बदलाव किया गया है?
A: ICRA ने घरेलू पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ का अनुमान 4-6% से घटाकर 0-3% कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक ग्रोथ का अनुमान 13-15% से घटाकर 7-9% कर दिया है.
Q: यात्रियों की संख्या में कमी आने की मुख्य वजहें क्या हैं?
A: जून में एयर इंडिया के विमान हादसे के बाद यात्रियों में झिझक, इंडिगो की हजारों उड़ानों का रद्द होना और अमेरिकी टैरिफ के कारण बिजनेस ट्रैवल में आई कमी इसकी मुख्य वजहें हैं.
Q: इंडिगो की कितनी उड़ानें रद्द हुई थीं और इसका क्या असर हुआ?
A: दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की करीब 4,500 उड़ानें रद्द हुईं. हालांकि यह कुल उड़ानों का मात्र 0.4% था, लेकिन इसने यात्रियों के सेंटीमेंट और भरोसे को काफी नुकसान पहुंचाया है.
Q: रुपये की गिरावट का एयरलाइंस पर क्या असर पड़ रहा है?
A: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से एयरलाइंस को भारी फॉरेन एक्सचेंज लॉस हो रहा है, क्योंकि उनके कई बड़े खर्चे डॉलर में चुकाने पड़ते हैं.