नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उड़ान के लिए तैयार, आखिरी बाधा भी पार, DGCA ने दिया एयरोड्रोम लाइसेंस

जेवर एयरपोर्ट ने पूरी तरह से संचालित होने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा लिया है. नागरिक उड्डयन मंत्री के.राम.मोहन नायडू ने DGCA द्वारा जारी एयोड्रोम लाइसेंस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सौंप दिया है.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उड़ान के लिए तैयार, आखिरी बाधा भी पार, DGCA ने दिया एयरोड्रोम लाइसेंस

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट ने पूरी तरह से चालू होने की दिशा में एक और कदम बढ़ा लिया है. नागरिक उड्डयन मंत्री के.राम मोहन नायडू ने डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा जारी एयरड्रोम लाइसेंस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सौंप दिया है. आपको बता दें कि एयरडोम लाइसेंस DGCA द्वारा जारी किया जाने किया जाने वाला आखिरी और सबसे जरूरी आधिकारिक क्लीयरेंस है, जिसके बाद ही किसी भी एयरपोर्ट से कमर्शियल प्लाइट्स का संचालन संभव हो पाता है.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सौंपा लाइसेंस

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, " राम मोहन नायडू ने DGCA द्वारा जारी एयरोड्रोम लाइसेंस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को सौंप दिया है."

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जल्द पूरी होगी बाकी की प्रक्रिया

  • मंत्रालय ने आगे लिखा कि एयरपोर्ट उड़ानें शुरू करने के और भी करीब पहुंच गया है.
  • के.राम.मोहन नायडू ने एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ बाकी बचे काम और प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करने पर भी चर्चा की है.
  • जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे अहम एविएशन प्रोजेक्ट्स में से एक है. एरिया के हिसाब से यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है.
  • जेवर एयरपोर्ट के एक अहम एविएशन हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें मेंटेंनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) और एयर कार्गो की सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी.

क्या होता है एयरोड्रोम लाइसेंस

एयरोड्रोम लाइसेंस DGCA द्वारा एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 (नियम 78) के तहत जारी किया जाता है. इस लाइसेंस मिलने का सीधा मतलब है कि एयरपोर्ट अब तकनीकी और कानूनी दोनों तरीके से यात्रियों और फ्लाइट्स के आवगमन के लिए पूरी तरह से तैयार है.

सुरक्षा व्यवस्था की गारंटी देता है एयरोड्रोम लाइसेंस

  • एयरोड्रोम लाइसेंस इस बात की गारंटी देता है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर फ्लाइट्स के संचालन के लिए पूरी तरह से मानकों पर आधारित है.
  • लाइसेंस के बाद एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) और एयर कार्गो सुविधाओं का संचालन सुचारू तौर से किया जा सकेगा.
  • यह लाइसेंस यात्रियों को यह विश्वास दिलाता है कि जिस एयरपोर्ट से वह यात्रा कर रहे हैं, वह हर तरह के सुरक्षा मानकों को पूरा करता है.

मिला था सिक्युरिटी वेटिंग क्लीयरेंस

एयरोड्रोम से पहले जेवर एयरपोर्ट को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी की ओर से सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस मिला था. सिक्योरिटी वेटिंग अप्रूवल का मतलब है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था उड़ान संचालन के लिए सुरक्षित मानी गई है. इसके बाद ही फ्लाइट शुरू होने की अंतिम प्रक्रिया आगे बढ़ती है. योगी सरकार का लक्ष्य जल्द से जल्द नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शुभारंभ कर उसे ऑपरेशनल करने का है. इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

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