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हाल ही में अजित पवार का चार्टर प्लेन क्रैश हो गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई. 23 फरवरी की रात को ही एक एयर एंबुलेंस क्रैश हुई, जिसमें 7 लोगो की मौत हो गई. अक्सर ऐसे हादसे होने के चलते डीजीसीए (DGCA) ने 24 फरवरी 2026 को सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (NSOPs) के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की. इस बैठक में सुरक्षा को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने वाली) नीति अपनाने का फैसला किया है.
पिछले एक दशक के आंकड़ों की समीक्षा से पता चला है कि मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का पालन न करना और ट्रेनिंग में कमी ही विमान हादसों के मुख्य कारण रहे हैं. इसी को देखते हुए अब कई क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं.
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अब से ऑपरेटर किसी भी व्यावसायिक दबाव या वीआईपी मूवमेंट (VIP Movement) के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकेंगे:
पायलट का फैसला अंतिम: अगर पायलट-इन-कमांड सुरक्षा कारणों से उड़ान को मोड़ने, देरी करने या रद्द करने का फैसला करता है, तो ऑपरेटर को उसे मानना ही होगा.
कोई परिणाम नहीं: पायलट के ऐसे सुरक्षा संबंधी फैसलों के लिए ऑपरेटर उन पर कोई व्यावसायिक कार्रवाई नहीं कर सकेंगे.
ग्राहकों को पूरी जानकारी देने के लिए डीजीसीए ने 'अनिवार्य प्रकटीकरण नीति' शुरू की है:
सार्वजनिक जानकारी: सभी NSOP ऑपरेटरों को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, उसका मेंटेनेंस इतिहास और पायलट का अनुभव स्पष्ट रूप से दिखाना होगा.
सेफ्टी रैंकिंग: अब सभी ऑपरेटरों की एक 'सेफ्टी रैंकिंग' तैयार की जाएगी, जिसे डीजीसीए की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा.
मैनेजमेंट की जिम्मेदारी: अगर सुरक्षा में कोई बड़ी चूक होती है, तो इसके लिए केवल पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकेगा, सीनियर मैनेजमेंट और अकाउंटेबल मैनेजरों पर भी व्यक्तिगत कार्रवाई होगी.
डीजीसीए ने निगरानी के तरीकों को और कड़ा कर दिया है:
गहन ऑडिट: रैंडम आधार पर कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) का ऑडिट होगा और गलत डेटा भरने वालों को पकड़ने के लिए ADS-B डेटा और फ्यूल रिकॉर्ड की जांच की जाएगी.
लाइसेंस निलंबन: जो पायलट फ्लाइट ड्यूटी टाइम (FDTL) का उल्लंघन करेंगे या सुरक्षा सीमाओं से नीचे जाकर विमान उतारने की कोशिश करेंगे, उनका लाइसेंस 5 साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है.
पुराने विमानों पर नजर: पुराने विमानों और ओनरशिप बदलने वाले विमानों की मॉनिटरिंग बढ़ा दी गई है.
ज्यादातर हादसे खराब मौसम के दौरान गलत फैसले लेने से होते हैं:
वेदर अपडेट सिस्टम: सभी ऑपरेटरों के लिए 'रियल-टाइम वेदर अपडेट सिस्टम' लगाना अनिवार्य कर दिया गया है.
निर्णय क्षमता की ट्रेनिंग: पायलटों की ट्रेनिंग में अब इस बात पर जोर दिया जाएगा कि वह अनियंत्रित वातावरण में सही फैसले कैसे लें.
स्पेशल सेफ्टी ऑडिट: मार्च 2026 की शुरुआत में फेज-1 ऑडिट पूरा होने के बाद सभी NSOPs का गहन ऑडिट शुरू किया जाएगा.
डीजीसीए के ये नए निर्देश स्पष्ट संदेश देते हैं कि हवाई सफर में यात्रियों की जान किसी भी कमर्शियल डील से ज्यादा कीमती है. वेबसाइट पर विमान की जानकारी सार्वजनिक होने से अब ग्राहक भी जागरूक हो सकेंगे और सही चुनाव कर पाएंगे. सुरक्षा रैंकिंग और सख्त ऑडिट से चार्टर विमान सेवाओं में अनुशासन बढ़ेगा और भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने में मदद मिलेगी.
1- DGCA ने नए नियम किनके लिए जारी किए हैं?
ये नियम सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (NSOP), जैसे चार्टर विमान और निजी जेट ऑपरेटरों के लिए हैं.
2- क्या अब मुझे विमान की उम्र का पता चल सकेगा?
हां, अब हर ऑपरेटर को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र और उसकी मेंटेनेंस हिस्ट्री सार्वजनिक करनी होगी.
3- अगर ऑपरेटर पायलट पर उड़ान भरने का दबाव डाले तो क्या होगा?
पायलट का सुरक्षा संबंधी फैसला अंतिम होगा और ऑपरेटर उसके खिलाफ कोई व्यावसायिक कार्रवाई नहीं कर पाएगा.
4- नियमों के उल्लंघन पर पायलटों को क्या सजा मिल सकती है?
नियमों के गंभीर उल्लंघन पर पायलटों का लाइसेंस 5 साल तक के लिए सस्पेंड हो सकता है.
5- सेफ्टी ऑडिट कब से शुरू हो रहा है?
मार्च 2026 की शुरुआत में स्पेशल सेफ्टी ऑडिट का फेज-1 शुरू किया जाएगा.
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