हवाई सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! दिल्ली में ATF पर घट सकता है VAT, सरकार टैक्स कटौती पर कर रही विचार: सूत्र

दिल्ली सरकार विमानन ईंधन (ATF) पर लगने वाले 25% वैट (VAT) को घटाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिस पर इसी हफ्ते अंतिम निर्णय होने की संभावना है. महाराष्ट्र द्वारा पहले ही दी गई राहत के बाद दिल्ली सरकार का यह कदम विमानन कंपनियों की परिचालन लागत को कम करेगा.
हवाई सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! दिल्ली में ATF पर घट सकता है VAT, सरकार टैक्स कटौती पर कर रही विचार: सूत्र

 दिल्ली सरकार अब हवाई ईंधन (ATF) पर लगने वाले 25% वैट (VAT) को घटाने की तैयारी में है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

दिल्ली में रहने वाले हवाई यात्रियों और विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) के लिए एक बड़ी राहत की खबर आ रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली सरकार हवाई ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) पर लगने वाले वैट (Value Added Tax - VAT) को कम करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है.

इस महत्वपूर्ण टैक्स कटौती पर इसी हफ्ते अंतिम फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है, तो महाराष्ट्र के बाद दिल्ली देश का दूसरा ऐसा प्रमुख राज्य बन जाएगा जो विमानन कंपनियों और यात्रियों को इस मोर्चे पर बड़ी राहत देगा.

क्यों जरूरी है यह टैक्स कटौती?

विमानन ईंधन (ATF) पर टैक्स कम करने का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक और घरेलू स्तर पर विमानन क्षेत्र भारी दबाव का सामना कर रहा है.

अभी कितना लगता है टैक्स?

मौजूदा वक्त में दिल्ली में हवाई ईंधन (ATF) पर 25% वैट (VAT) लगता है. एयरलाइंस कंपनियों की कुल परिचालन लागत (Operational Cost) का लगभग 40% हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. ऐसे में 25% की ऊंची दर कंपनियों के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रूप से यात्रियों की जेब पर भी भारी पड़ती है.

महाराष्ट्र की तर्ज पर दिल्ली का कदम

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भी हवाई ईंधन पर टैक्स कम करके विमानन क्षेत्र को बूस्ट दिया था. अब दिल्ली सरकार भी उसी राह पर चलने की तैयारी में है. सूत्रों का कहना है कि सरकार इस वैट को घटाकर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाना चाहती है ताकि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) से उड़ान भरने वाली एयरलाइंस को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके.

कच्चे तेल के झटके के बीच राहत की उम्मीद

ईरान युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $105 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. इसके कारण थोक ईंधन और पावर सेक्टर की महंगाई दर भी भारत में तेजी से बढ़ी है. ऐसे संकट के समय में अगर राज्य सरकार अपने स्तर पर वैट (VAT) घटाती है, तो विमानन कंपनियों को अपने किरायों को नियंत्रित रखने में बड़ी मदद मिलेगी. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विमान किरायों में संतुलन बनाने की दी गई नसीहत के बाद इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है.

Conclusion

दिल्ली सरकार का ATF पर वैट घटाने का विचार एक स्वागत योग्य कदम है. विमानन ईंधन पर टैक्स कम होने से न केवल एयरलाइंस कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधरेगी, बल्कि आने वाले समय में आम यात्रियों को भी हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों से राहत मिल सकती है. इस फैसले के लागू होने के बाद राजधानी से हवाई संपर्क (Connectivity) और पर्यटन को भी एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 एटीएफ (ATF) क्या होता है और इसका उपयोग कहां किया जाता है?

एटीएफ का पूरा नाम 'एविएशन टरबाइन फ्यूल' है, यह एक विशेष प्रकार का शुद्ध ईंधन होता है जिसका उपयोग हवाई जहाजों में किया जाता है.

Q2 वैट (VAT) क्या है और यह जीएसटी से कैसे अलग है?

वैट राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला मूल्य वर्धित कर है; वर्तमान में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ जैसे पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर रखा गया है, इसलिए इन पर राज्य सरकारें अपना वैट वसूलती हैं.

Q3 क्या एटीएफ पर वैट कम होने से फ्लाइट टिकट तुरंत सस्ते हो जाएंगे?

टैक्स कम होने से एयरलाइंस की लागत घटती है, जिससे लंबी अवधि में या मांग संतुलित होने पर कंपनियों द्वारा टिकटों के दाम घटाए जाने की पूरी संभावना रहती है.

Q4 फ्लाइट टिकट में 'बेस फेयर' (Base Fare) और 'फ्यूल सरचार्ज' क्या होता है?

बेस फेयर एयरलाइन की वास्तविक सीट की कीमत होती है, जबकि फ्यूल सरचार्ज ईंधन की बढ़ती-घटती कीमतों के आधार पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क होता है.

Q5 'कोडशेयर एग्रीमेंट' (Codeshare Agreement) क्या होता है?

यह दो एयरलाइंस के बीच का एक समझौता है, जिसके तहत एक एयरलाइन दूसरी एयरलाइन की फ्लाइट में सीटें बेच सकती है, जिससे यात्रियों को अधिक रूटों के विकल्प मिलते हैं.

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