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बीते साल 23 नवंबर 2025 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर एक बड़ा विमानन हादसा होते-होते टल गया था. इससे हर कोई उस समय हैरान रह गया है. असल में काबुल से दिल्ली आ रही Ariana Afghan Airlines की फ्लाइट AFG311 ने निर्धारित रनवे के बजाय गलत रनवे पर लैंडिंग कर दी थी. अह इस मामले में Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं.
23 नवंबर 2025 को काबुल से दिल्ली आ रही Ariana Afghan Airlines की फ्लाइट AFG311 दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी, लेकिन लैंडिंग के दौरान एक गंभीर चूक सामने आई. एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने विमान को रनवे 29L पर उतरने की स्पष्ट अनुमति दी थी, जिसे पायलट ने सही तरीके से सुना और दोहराया भी. इसके बावजूद कम रोशनी और खराब बिजविलिटी के कारण, साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का सिग्नल रनवे से करीब 4 मील पहले ही खो जाने से पायलट दिशाभ्रम का शिकार हो गए. नतीजतन विमान गलती से रनवे 29R पर उतर गया, जो उस समय केवल टेकऑफ के लिए इस्तेमाल हो रहा था. इस रनवे पर लैंडिंग लाइट्स और ILS बंद थे। खतरा इसलिए और बढ़ गया क्योंकि उसी समय Air India का एक विमान उसी रनवे से उड़ान भर रहा था. सौभाग्य से बड़ा हादसा टल गया. पायलटों ने बताया कि समानांतर रनवे केवल 360 मीटर दूर होने से विजुअल लैंडिंग में कन्फ्यूजन हुआ। मामले की जांच कर रही Aircraft Accident Investigation Bureau ने इसे गंभीर चूक बताया है और जांच अभी जारी है.
इस रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट AFG311 को दिल्ली एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से रनवे 29L पर लैंडिंग की साफ अनुमति दी गई थी.असल में पायलट ने ATC की इस क्लियरेंस को सही तरीके से सुना और उसे दोहराया भी था, यानी कम्युनिकेशन में किसी तरह की गलतफहमी नहीं थी.
इसके बावजूद लैंडिंग के दौरान गंभीर चूक हुई है. जांच में सामने आया कि खराब दृश्यता (poor visibility) के कारण और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का सिग्नल रनवे से लगभग 4 मील पहले ही खो जाने से पायलट दिशाभ्रम का शिकार हो गए थे. इसके चलते विमान गलती से रनवे 29R पर उतर गया, जो उस समय केवल टेकऑफ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.
रनवे 29R की स्थिति और भी चिंताजनक थी.असल में इस रनवे पर लैंडिंग के लिए जरूरी लाइट्स और ILS सिस्टम पूरी तरह बंद थे. यानी तकनीकी रूप से वहां किसी भी विमान की लैंडिंग की अनुमति नहीं थी. इसके बाद भी विमान का वहां उतर जाना सुरक्षा मानकों की बड़ी अनदेखी मानी जा रही है.
खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसी समय Air India का एक विमान उसी रनवे 29R से टेकऑफ कर रहा था. कुछ सेकंड का भी अंतर होता, तो यह घटना एक बड़े विमान हादसे में बदल सकती थी. हालांकि सौभाग्य से कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ.
पायलटों के बयान के मुताबिक, दोनों समानांतर रनवे (29L और 29R) के बीच केवल 360 मीटर की दूरी थी, जिसकी वजह से विजुअल अप्रोच के दौरान वे दोनों रनवे में फर्क नहीं कर पाए, कम रोशनी और सीमित दृश्यता ने कन्फ्यूजन को और बढ़ा दिया.
AAIB ने इस घटना के बाद एक अहम सिफारिश की है. जांच एजेंसी ने सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स के ATC टावरों में वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाने की सलाह दी है.साफ किया गया है कि इसका उपयोग केवल जांच के लिए होगा, न कि किसी पायलट या स्टाफ को सजा देने के लिए.
खबर से जुड़े FAQs
1. दिल्ली एयरपोर्ट पर कौन-सी फ्लाइट गलत रनवे पर उतरी थी?
Ariana Afghan Airlines की फ्लाइट AFG311, जो काबुल से दिल्ली आ रही थी.
2. ATC ने किस रनवे पर लैंडिंग की अनुमति दी थी?
एटीसी ने रनवे 29L पर लैंडिंग की क्लियरेंस दी थी, जिसे पायलट ने सही दोहराया भी था.
3. फिर गलती कैसे हुई?
खराब दृश्यता और ILS सिग्नल 4 मील पहले खो जाने से पायलट भटक गए और रनवे 29R पर उतर गए.
4. इस घटना में कितना बड़ा खतरा था?
उसी समय एयर इंडिया का विमान रनवे 29R से टेकऑफ कर रहा था, जिससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया.
5. AAIB ने क्या सिफारिश की है?
Aircraft Accident Investigation Bureau ने ATC टावरों में वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाने की सिफारिश की है, ताकि भविष्य में जांच बेहतर हो सके.