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Boycott Turkey Row: हाल ही में भारत द्वारा पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और सीमापार आतंकी ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद तुर्किये द्वारा पाकिस्तान का सार्वजनिक समर्थन किए जाने पर देश में नाराज़गी देखी गई. इसी बीच बजट एयरलाइन इंडिगो ने तुर्किये की राष्ट्रीय एयरलाइन Turkish Airlines के साथ अपने कोडशेयरिंग समझौते को लेकर हो रहे विरोध पर सफाई दी है.
IndiGo ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह साझेदारी भारतीय यात्रियों और देश की अर्थव्यवस्था—दोनों के लिए फायदेमंद है. एयरलाइन ने बताया कि भारत और तुर्किये के बीच हुए द्विपक्षीय एयर सर्विस एग्रीमेंट (Air Services Agreement) के तहत दोनों देशों की एयरलाइंस को सप्ताह में 56 फ्लाइट्स तक संचालित करने की अनुमति है.
एयरलाइन ने जोर दिया कि यह व्यवस्था खासतौर पर कोविड महामारी के बाद बढ़े हुए अंतरराष्ट्रीय किरायों के बीच भारतीय यात्रियों को सस्ता और सुगम विकल्प देती है, खासकर छोटे शहरों से दो स्टॉप कनेक्शन के जरिए उड़ान भरने वालों के लिए.
IndiGo ने कहा, "यह साझेदारी सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं है. इससे नौकरी के अवसर बढ़े हैं, व्यापार को बल मिला है और सरकारी टैक्स कलेक्शन में इज़ाफा हुआ है."
एयरलाइन के अनुसार, इस कोडशेयरिंग मॉडल से विमानों की उपयोगिता बनी रहती है और इससे भारत और तुर्किये के बीच अरबों डॉलर का व्यापार भी सुगम होता है. साथ ही इससे मिलने वाला राजस्व कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना में पुनर्निवेश होकर भारत की एविएशन इंडस्ट्री को और मजबूती देता है.
हालांकि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस साझेदारी पर नाराज़गी जाहिर की है और इंडिगो से Turkish Airlines से दूरी बनाने की मांग की है.
पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में तुर्किये ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था. तुर्किये ने पाकिस्तान को अपने ड्रोन भी उपलब्ध कराए थे. इस घटना के बाद भारत के हर वर्ग में तुर्किये के प्रति रोष है और खुलकर विरोध हो रहा है.
हाल में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्किये ने यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को अपनी मध्यस्थता में समाप्त करने की पेशकश की थी. लेकिन, जब भारत-पाकिस्तान के बीच पाकिस्तान की वजह से युद्ध की स्थिति बनी, उस समय तुर्किये ने दोनों पक्षों में शांति की अपील की जगह पाकिस्तान का साथ दिया था.
तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन उपलब्ध कराए थे. इससे तुर्किये का दोहरा चरित्र सामने आया है. फरवरी 2023 में तुर्किये में भयंकर भूकंप आया था. उस समय भारत उन पहले देशों में था, जिसने मदद का हाथ तुर्किये की तरफ बढ़ाया था. इसके बावजूद तुर्किये भारत के विरुद्ध कार्य कर रहा है.