महंगे हवाई टिकट की निगरानी के लिए DGCA ने जब मांगा ये डेटा, एयरलाइन कंपनियों ने कर दिया देने से इंकार, जानें क्यों

Airfare Data: देश में एविएशन रेगुलेटर DGCA ने एयरलाइंस से उनके हवाई किराए का डेटा शेयर करने के लिए कहा था. हालांकि, एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसे प्रमुख कंपनियों ने इस अनुरोध को मानने से इंकार कर दिया है. 
महंगे हवाई टिकट की निगरानी के लिए DGCA ने जब मांगा ये डेटा, एयरलाइन कंपनियों ने कर दिया देने से इंकार, जानें क्यों

Airfare Data: फ्लाइट से सफर करने वाले पैसेंजर्स की अक्सर शिकायत होती है कि छुट्टियों और त्योहारों के दौरान उन्हें फ्लाइट टिकट खरीदने के लिए कई गुना तक ज्यादा पैसे देने बोते हैं. अभी हाल ही में बीते महाकुंभ 2025 के दौरान भी प्रयागराज जाने वाले उड़ानों के टिकट कई गुना तक बढ़ गए थे. ऐसे में त्योहारों के दौरान पैसेंजर्स को इस तरह की शिकायतें क्यों आती है इसे समझने के लिए देश में एविएशन रेगुलेटर DGCA ने एयरलाइंस से उनके हवाई किराए का डेटा शेयर करने के लिए कहा था. हालांकि, एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसे प्रमुख कंपनियों ने इस अनुरोध को मानने से इंकार कर दिया है.

DGCA ने बताया कि रेगुलेटर इस मामले की जांच कर रहा है और इस मुद्दे पर एयरलाइंस के अधिकारियों से बातचीत जारी है.

DGCA ने क्यों मांगा डेटा?

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DGCA का कहना है कि वह हवाई टिकटों की कीमतों में होने वाले बदलावों को समझना चाहता है. यात्रियों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं कि पीक सीजन में हवाई किराए में अचानक भारी बढ़ोतरी हो जाती है. हाल ही में, महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज जाने वाली फ्लाइट्स के टिकट बहुत महंगे हो गए, जिससे कई यात्रियों ने शिकायतें दर्ज कराईं. इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए, DGCA ने डिजिटल डेटा विश्लेषण के लिए Tata Consultancy Services (TCS) को हवाई किराए की प्रवृत्ति (ट्रेंड) की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है.

एयरलाइन कंपनियों ने क्यों शेयर नहीं किया डेटा?

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA), जो एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करता है, ने DGCA को पत्र लिखकर डेटा साझा करने पर गंभीर आपत्ति जताई है.

FIA का कहना है कि हवाई किराए की विस्तृत जानकारी साझा करने से एयरलाइंस की व्यापारिक गोपनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) पर असर पड़ सकता है. एयरलाइंस को डर है कि अगर यह डेटा बाहरी एजेंसियों, सलाहकारों (Consultants) या अन्य तृतीय पक्षों (Third Parties) के हाथों में चला गया, तो इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है और इससे कंपनियों को व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इसके अलावा, FIA ने तर्क दिया कि भारत में एयरलाइंस पहले से ही "The Aircraft Rules, 1937" के नियमों का पालन करती हैं और हवाई किराए का ढांचा इस तरह से तैयार किया गया है कि इससे यात्रियों को भी सुविधा मिले और एयरलाइंस को भी टिकाऊ (Sustainable) तरीके से संचालित करने का मौका मिले.

आगे क्या करेगी सरकार?

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने हाल ही में इस मामले में हस्तक्षेप किया है. खासकर, 2025 में होने वाले महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज जाने वाली फ्लाइट्स के किराए में भारी बढ़ोतरी को लेकर सरकार चिंतित है. सरकार का मानना है कि एयरलाइंस को अपने किराए को पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि यात्रियों को अनावश्यक रूप से अधिक पैसे न देने पड़ें. DGCA अब इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और आगे उचित कदम उठाने पर विचार कर रहा है.

DGCA और एयरलाइंस के बीच बातचीत जारी है. अगर एयरलाइंस डेटा साझा करने को तैयार नहीं होती हैं, तो सरकार इस पर नए नियम लागू कर सकती है ताकि यात्रियों को उचित किराए पर हवाई यात्रा की सुविधा मिल सके.

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