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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय हवाई सेवाओं को संकट में डाल दिया है (फाइल फोटो)
अगर आप भी आने वाले दिनों में कहीं घूमने या काम के सिलसिले में हवाई सफर का प्लान बना रहे हैं, तो फिर यह खबर आपके बहुत काम आने वाली है. असल में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जंग के हालातों ने अब सीधे आपके सफर और जेब पर हमला बोल दिया है. ईरान-अमेरिका के युद्ध का असर अब भारत के आसमान में दिखने वाला है. असल में देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस, एयर इंडिया और इंडिगो ने अपनी घरेलू उड़ानों में बड़ी कटौती करने का प्लान बना लिया है.
दोनों एयरलाइन्स 1 जून 2026 से कटौती की तैयारी कर रही हैं.वैसे यह फैसला अगले 90 दिनों यानी पूरे 3 महीनों तक लागू रहेगा.वैसे इसका मतलब यह है कि जून, जुलाई और अगस्त के महीने में हवाई सफर करना न सिर्फ मुश्किल होगा, बल्कि आपकी जेब पर भी भारी पड़ेगा. अगर फ्लाइट में कटौती होती है तो टिकट के प्राइस बढ़ने के पूरे चांस हो जाएंगे.
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की वजह से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में आवाजाही बाधित हुई हैययह वो समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है.तो जब रास्ता रुका, तो ग्लोबल स्तर पर तेल की किल्लत शुरू हो गई और कच्चे तेल के दाम रॉकेट की तरह ऊपर चले गए
इसका सीधा असर 'एविएशन टर्बाइन फ्यूल' यानी एटीएफ (ATF) पर पड़ा है. हवाई जहाज का ईंधन इतना महंगा हो गया है कि एयरलाइंस कंपनियों के लिए पुरानी कीमतों पर उड़ानें भरना घाटे का सौदा साबित हो रहा है.तो इसके अलावा, ईरान और पाकिस्तान के एयरस्पेस के इस्तेमाल पर पाबंदियों ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे विमानों को लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है और खर्चा बढ़ रहा है.
भारतीय एयरलाइन मार्केट के 90% से ज्यादा हिस्से पर कब्जा रखने वाली इन दोनों कंपनियों के फैसले से हड़कंप मच गया है:
Air India: सबसे बड़ी कटौती एयर इंडिया में हो सकती है. कंपनी अपनी घरेलू उड़ानों में करीब 15% तक की कमी कर सकती है. आपको बता दें कि अभी एयर इंडिया हर हफ्ते करीब 3,800 उड़ानें भरती है.
IndiGo: देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो भी पीछे नहीं है, इंडिगो अपने ऑपरेशन्स में करीब 5% से 7% तक की कटौती कर रही है.असल में रोजाना करीब 1,950 फ्लाइट्स उड़ाने वाली इंडिगो के लिए यह छोटा सा प्रतिशत भी उड़ानों की संख्या में एक बड़ा अंतर पैदा करेगा.
सीधा सा गणित है कि जब मांग ज्यादा हो और सप्लाई (फ्लाइट्स) कम , तो कीमतें बढ़ना तय है.असल में घरेलू रूटों पर फ्लाइट्स कम होने से टिकटों की बुकिंग के लिए मारामारी मचेगी. पहले ही तेल महंगा होने से टिकट के दाम बढ़े हुए हैं, अब उड़ानों की संख्या घटने से 'लास्ट मिनट' बुकिंग करने वालों की जेब पूरी तरह कटनी तय है.
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कुल मिलाकर, ग्लोबल टेंशन ने भारतीय एविएशन सेक्टर की कमर तोड़ दी है.तो अगर आप 1 जून के बाद सफर करने वाले हैं, तो बेहतर होगा कि अपनी बुकिंग अभी से देख लें, वरना बाद में 'नो सीट' या 'महंगे दाम' आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं.