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Air India history: क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली कमर्शियल फ्लाइट किसी विदेशी कंपनी ने नहीं, बल्कि टाटा ग्रुप ने शुरू की थी? 15 अक्टूबर 1932 को टाटा ग्रुप के मुखिया और देश के पहले कमर्शियल पायलट जे.आर.डी. टाटा ने अपनी एयरलाइन ‘Tata Airlines’ के तहत भारत की पहली उड़ान भरी थी. यह उड़ान कराची से बंबई (अब मुंबई) के बीच हुई थी. उस वक्त जे.आर.डी. टाटा खुद इस जहाज को उड़ा रहे थे. इस एक उड़ान ने भारत में सिविल एविएशन का इतिहास बदल दिया और यहीं से शुरू हुआ एयर इंडिया का सुनहरा सफर.
शुरुआत में टाटा एयरलाइंस का मकसद केवल लोगों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाना नहीं था, बल्कि डाक और पत्रों की डिलीवरी भी करना था. पहले रूट में कराची, अहमदाबाद, बंबई (मुंबई), बेल्लारी और मद्रास (चेन्नई) शामिल थे. धीरे-धीरे इस एयरलाइन ने अपना नेटवर्क बढ़ाया और 1939 में इसके रूट्स को त्रिवेंद्रम, दिल्ली, कोलंबो और लाहौर तक विस्तारित किया गया.
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में व्यापार और यात्रा दोनों बढ़े. इस दौर में टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर 1946 में ‘एयर इंडिया’ रखा गया. इसी साल कंपनी को एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी में भी बदल दिया गया, जिससे इसे व्यापक पैमाने पर विस्तार का अवसर मिला. Air India का नारा था — “Your Palace in the Sky”, यानी “आसमान में आपका महल”, जो उसके शानदार और लग्जरी अनुभव को दर्शाता था.
8 जून 1948 को एयर इंडिया ने इतिहास रच दिया जब उसने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान बंबई से लंदन के लिए भरी. इस यात्रा में दो स्टॉप थे — काहिरा और जिनेवा. यह सिर्फ एक फ्लाइट नहीं, बल्कि भारत के ग्लोबल एविएशन सेक्टर में प्रवेश की प्रतीक थी.
भारत सरकार ने 1953 में एयर इंडिया समेत देश की अन्य एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) कर दिया. इसके तहत दो कंपनियां बनीं- एयर इंडिया लिमिटेड (घरेलू उड़ानों के लिए) और एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड (अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए). यहीं से शुरू हुआ एयर इंडिया का सुनहरा युग, जब यह भारत की पहचान बन गई और "महाराजा" इसका ब्रांड एंबेसडर बन गया.
1990 के दशक में भारत में निजी एयरलाइंस को अनुमति मिलने लगी. जेट एयरवेज, सहारा, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइनों ने धीरे-धीरे मार्केट पर पकड़ बनानी शुरू कर दी. इसके कारण एयर इंडिया का मार्केट शेयर घटने लगा, और कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया. सरकारी स्वामित्व के कारण संचालन में लचीलापन कम रहा, जिससे प्रतिस्पर्धा में एयर इंडिया पिछड़ने लगी.
लगातार घाटे के बाद, सरकार ने एयर इंडिया के निजीकरण का फैसला लिया और लगभग 68 साल बाद, 2021 में एयर इंडिया दोबारा टाटा ग्रुप की झोली में आ गई. टाटा ग्रुप ने इसे 2.3 अरब डॉलर (लगभग ₹18,000 करोड़) में खरीदा. यह सौदा भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का एक ऐतिहासिक पल था — जहां एक कंपनी अपने संस्थापक परिवार के पास लगभग सात दशक बाद लौटी.
Air India अब अपने पुराने गौरव को वापस पाने की राह पर है. Tata Group ने एयरलाइन में बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण और निवेश शुरू किया है. कंपनी ने एयरबस और बोइंग से 470 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया है — जिसकी कुल वैल्यू लगभग 70 अरब डॉलर है. सीट अपग्रेड, केबिन डिज़ाइन और इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम पर 400 मिलियन डॉलर का निवेश किया जा रहा है. ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नई यूनिफॉर्म, बेहतर ऑनबोर्ड सर्विस और डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी काम चल रहा है.
आज एयर इंडिया 150 घरेलू गंतव्यों और 70 अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अपनी सेवाएं दे रही है. यह भारत की सबसे बड़ी और पुरानी एयरलाइन है जो अब फिर से अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पाने की राह पर है. टाटा ग्रुप का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में एयर इंडिया को एशिया की टॉप एयरलाइंस में शामिल किया जाए.
FAQs
सवाल 1: एयर इंडिया की पहली उड़ान कब और कहां से भरी गई थी?
15 अक्टूबर 1932 को टाटा एयरलाइंस के रूप में पहली उड़ान कराची से बंबई (अब मुंबई) के बीच भरी गई थी.
सवाल 2: एयर इंडिया का नाम कब बदला गया था?
1946 में टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया रखा गया था.
सवाल 3: एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था?
1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया था और इसे सरकार के अधीन लाया गया था.
सवाल 4: एयर इंडिया को दोबारा टाटा ग्रुप ने कब खरीदा?
2021 में टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया को 2.3 अरब डॉलर में सरकार से खरीदा.
सवाल 5: वर्तमान में एयर इंडिया कितने गंतव्यों तक उड़ान भरती है?
एयर इंडिया फिलहाल 150 घरेलू और 70 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक अपनी सेवाएं देती है.
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